कुबेरेश्वर धाम में हुई ग्रीन शिवरात्रि, पंडित प्रदीप मिश्रा के मार्गदर्शन में शिवभक्तों ने लगाए पौधे

सीहोर

कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के पावन सानिध्य में इस साल महाशिवरात्रि के मौके पर कुबेरेश्वर धाम में एक अनूठा और पर्यावरण-हितैषी 'ग्रीन शिवरात्रि महोत्सव' का आयोजन किया गया. माना जाता है कि शिव प्रकृति के देवता हैं और इस बार कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने ग्रीन शिवरात्रि मनाने का आह्वान किया था. 

महाशिवरात्रि पर प्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के कुबेरेश्वर धाम में शिवभक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी. बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचे, हर हाथ में एक पौधा है और मकसद है पर्यावरण संरक्षण. शिवभक्तों ने मदिर परिसर में शिवरात्रि पर आरती के बाद पूरे विधि विधान से पौधे लगाए.
आध्यात्मिकता को प्रकृति संरक्षण से जोड़ने का सराहनीय प्रयास

यह आयोजन आध्यात्मिकता को प्रकृति संरक्षण से जोड़ने का एक सराहनीय प्रयास है. एक करोड़ पौधे लगाने का संकल्प लिया है, उन्होंने सभी लोगों से पौधे लगाने की अपील की है. श्रद्धालुओं ने यहां पर बेल और शमी के पौधे लगाए. इनका कहना है कि प्रकृति से ही हमारा अस्तित्व है, आज वातावरण प्रदूषण सबसे बड़ी समस्या है इसलिए ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाना जरूरी हो गया है. 
ज्योतिर्लिंग गार्डन की स्थापना

इस महोत्सव का मुख्य आकर्षण 'ज्योतिर्लिंग गार्डन' की स्थापना है. पंडित प्रदीप मिश्रा द्वारा परिसर में 12 विशेष पौधे रोपे जाएंगे जो भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों का प्रतिनिधित्व करेंगे. इन पौधों को धाम से उनकी वास्तविक भौगोलिक दूरी के आधार पर स्केल डिस्टेंस पद्धति से रोपित किया जाएगा.
प्रमुख दूरियां (किलोमीटर में)

    श्री महाकालेश्वर: 127.00 किमी
    श्री ओंकारेश्वर: 135.00 किमी
    श्री केदारनाथ: 864.00 किमी
    श्री रामेश्वरम: 1557.00 किमी

पर्यावरण संरक्षण के तीन मुख्य संकल्प

आयोजन के दौरान तीन प्रमुख बिंदुओं पर विशेष बल दिया जा रहा है. 

    बेलपत्र पौधारोपण: प्रकृति की सेवा हेतु धाम में व्यापक स्तर पर बेलपत्र के पौधे लगाए जाएंगे.
    अभिषेक जल का सदुपयोग: शिवलिंग पर अर्पित किए गए जल को व्यर्थ बहने से रोककर उसे भूगर्भ जल पुनर्भरण और पौधों की सिंचाई हेतु उपयोग में लाया जाएगा.
    वैज्ञानिक निर्माल्य विसर्जन: पूजा के बाद एकत्रित फूलों और बेलपत्रों (निर्माल्य) को नदियों में विसर्जित करने के बजाय उनसे जैविक खाद बनाई जाएगी. 

बेटी और बहू के सम्मान का संदेश 

पंडित मिश्रा ने सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार करते हुए कहा कि बेटी आपके पुण्यों की रसीद है.' उन्होंने एक नया नारा देते हुए कहा, ''अब केवल 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ ही नहीं बल्कि 'बहू पढ़ाओ, देश बचाओ के संकल्प की आवश्यकता है. जिस घर में बेटी और बहू का सम्मान होता है, वहां दरिद्रता कभी नहीं आती.''
जल संरक्षण की सीख

पर्यावरण के प्रति सचेत करते हुए उन्होंने कहा कि शादियों में पानी की बर्बादी रोकना अनिवार्य है. पानी की बोतलों पर लिखा होना चाहिए कि 'मैं जल हूं, आने वाला कल हूं. अगर हमने आज जल का सम्मान नहीं किया, तो भविष्य में इसके लिए तरसना पड़ेगा.''

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