केला निर्यात में फ्रूट केयर और पैक हाउस अपनाने से बढ़ेगा निर्यात

भोपाल 

कृषक कल्याण वर्ष-2026

जिले को केले के एक्सपोर्ट हब के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से एक दिवसीय कृषि उन्नयन संवाद का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में अंतर्राष्ट्रीय कृषि विशेषज्ञों, निर्यातकों और प्रगतिशील किसानों सहित बड़ी संख्या में जिले के प्रेक्षक सम्मिलित हुए, जहाँ जिले के केले को वैश्विक मानकों पर खरा उतारने के लिए विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए।

अंतर्राष्ट्रीय केला विशेषज्ञ  के. बी. पाटिल ने किसानों को कहा कि जिस प्रकार बच्चों को संभाला जाता है, उसी प्रकार पैकिंग के दौरान केले की फ्रूट केयर जरूरी है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में अब स्पॉटलेस और फ्रेश केले की मांग है। केला निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अब पारंपरिक तरीकों को छोड़कर आधुनिक फ्रूट केयर और वैज्ञानिक पैकेजिंग पर ध्यान देना ज़रूरी हैं। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में निर्यात और प्रतिस्पर्धा के लिए गुणवत्ता पर विशेष जोर दिया जाना चाहिए। क्योंकि पहले केला आंखों से देखा जाता है, इसके बाद खाया जाता है। क्योंकि अब वह ज़माना गया जब फल विक्रेता केलों को यह कहकर बेचते थे कि ले जाइए साहब छींटे वाला केला है, परतु वास्तविक में यह पकने की नहीं बल्कि सड़न की प्रक्रिया की शुरूआत होती है।

 पाटिल ने कहा कि पैक हाउस के महत्व को बताते हुए कहा कि केले की पैकिंग खेतों के बजाय पैक्स हाउस में की जानी चाहिए जिससे वे लंबे समय तक ताजे रहें। उन्होंने कहा कि कृषकों एवं उद्योग के दृष्टिकोण से केले के उत्पादन संबंधी चुनौतियों,संभावनाओं एवं उपायों पर विस्तृत जानकारी दी। जिले में लगभग 3,600 हेक्टेयर में केले की खेती हो रही है, जिसकी उत्पादकता 850 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। यहाँ के किसानो ने क्लाइमेट चेंज को मात देने वाले मॉडल्स अपनाए हैं। किसानों को टिश्यू कल्चर के लाभों और उद्योग की चुनौतियों को समझते हुए चहुमुखी प्रयास करने होंगे।

केला निर्यात विशेषज्ञ  अमोल महाजन ने बताया कि भारत दुनिया का 26 प्रतिशत केला उत्पादित करता है, लेकिन निर्यात के मामले में हम अभी 9वें स्थान पर हैं। भौगोलिक स्थिति के आधार पर फिलीपींस और इक्वाडोर जैसे देशों की तुलना में भारत से मिडिल ईस्ट देशों तक माल पहुँचाना आसान और कम समय लेने वाला है। निर्यात के क्षेत्र में एक बहुत अच्छा अवसर है। निर्यात एवं व्यापार में नए अवसर के लिये पैक हाउस,कोल्ड स्टोरेज, फ्रूट सर्विस, ट्रांसपोर्ट, वेंडर एवं मटेरियल सप्लाई के लिये प्रयास किए जाए तो सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। साथ ही, पैकिंग कार्यों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। मिर्च एक्सपोर्ट की जानकारी खरगोन के  अभिषेक पाटीदार ने दी। उन्होंने मार्केट चेन, कृषि लागत ,जैविक एवं प्राकृतिक खेती के सम्बन्ध में भी अपनी विचार साझा किए।

कृषि संवाद कार्यक्रम में कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञों द्वारा किसानों को कृषि के क्षेत्र में मार्गदर्शन दिया गया। इस क्रम में जैन इरीगेशन जलगांव के अंतर्राष्ट्रीय केला विशेषज्ञ  केबी पाटिल, एग्रोनॉमिस्ट  अजहर जैदी, जैन कृषि तीर्थ जलगांव के डॉ. सुधीर भोंगले द्वारा टिश्यू कल्चर तकनीक पर, मुंबई एवं बुरहानपुर के केला एक्सपोर्टर  अमोल महाजन द्वारा केला एक्सपोर्ट, खरगोन के  अभिषेक पाटीदार, वैज्ञानिक डॉ. महेन्द्र सिंह, रिटायर्ड वैज्ञानिक डॉ. व्हायके जैन, अवार्ड टू बनाना फॉर्मर ऑफ इंडिया  संतोष लछेटा द्वारा केला उत्पादन तकनीक एवं जिले के प्रगतिशील किसान  भरत पाटीदार,  बलराम जाट एवं कृषि विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिया गया।

कार्यक्रम के दौरान कृषि, उद्यानिकी और पशुपालन विभाग द्वारा आधुनिक कृषि यंत्रों और उन्नत बीजों की प्रदर्शनी लगाई गई। पात्र किसानों को कृषि उपकरणों के लिये अनुदान सहायता राशि के प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए।

कार्यक्रम में लोकसभा सांसद  गजेन्द्र सिंह पटेल,जिला पंचायत अध्यक्ष  बलवंत सिंह पटेल ,पूर्व कैबिनेट मंत्री  प्रेम सिंह पटेल, कलेक्टर मती जयति सिंह सहित अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों की उपस्थिति में किसानों को आधुनिक खेती और वैश्विक बाजार से जुड़ने की रणनीतियां बताई गई।

 

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