विष्णु देव साय का सफर: पंच, सरपंच, सांसद और अब मुख्यमंत्री – जशपुर के लाल की अद्भुत यात्रा

रायपुर 

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 21 फरवरी को अपना 62वां जन्मदिन मना रहे हैं.  आज विष्णु देव साय अपने गृह ग्राम बागिया जाएंगे. यहां वे अपने परिवार के साथ जन्मदिन मनाएंगे और क्षेत्र के लोगों से भी मुलाकात करेंगे. सीएम के 62वें जन्मदिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने बधाई दी. 1964 में एक साधारण किसान परिवार में जन्मे विष्णु देव साय ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत गांव की राजनीति से की. उनका राजनीतिक सफर पंच, सरपंच, विधायक, और फिर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री बने तक का रहा. उनकी सादगी, संगठन में स्थापित प्रभाव और शांत स्वभाव की राजनीति उन्हें एक अलग पहचान देती है. बीजेपी के आदिवासी चेहरे के तौर पर उभरे साई को जमीनी नेता और संगठन के भरोसेमंद कार्यकर्ता के तौर पर जाना जाता है.

21 फरवरी 1964 में हुआ था जन्म
विष्णु देव साय के जन्मदिन के मौके पर आइए जानते हैं, उनके जीवन और राजनीतिक सफर के बारे में. विष्णु देव साय का 21 फरवरी 1964 में किसान परिवार में जन्म हुआ था. उनका जन्म जशपुर जिले के फरसाबहार विकासखंड के ग्राम बगिया में हुआ था. उनके पिता राम प्रसाद साय एक किसान थे और उनकी मां जसमनी देवी गृहिणी थीं. गांव के माहौल में पले-बढ़े साय ने कुनकुरी से हायर सेकेंडरी की पढ़ाई की. उन्होंने 1991 में कौशल्या देवी साय से शादी की. उनके परिवार के पॉलिटिकल रिश्ते भी थे. उनके दादा नरहरि प्रसाद साय, मेंबर ऑफ पार्लियामेंट और यूनियन मिनिस्टर रहे, जबकि परिवार के दूसरे सदस्य भी विधायक रहे.

पंच के तौर पर शुरू हुआ पॉलिटिकल करियर
साय ने अपना पॉलिटिकल करियर 1989 में बगिया ग्राम पंचायत में पंच के तौर पर शुरू किया था. 1990 में वे बिना किसी विरोध के सरपंच चुने गए यह साल उनके लिए एक बड़ा पॉलिटिकल टर्निंग पॉइंट साबित हुआ. उसी साल उन्होंने अविभाजित मध्य प्रदेश की तपकारा विधानसभा सीट से बीजेपी कैंडिडेट के तौर पर चुनाव लड़ा और विधायक बने.

1990 से 1998 तक विधायक चुने गए साय
1990 से 1998 तक विधायक के तौर पर लगातार दो कार्यकाल के दौरान, उन्होंने आदिवासी इलाके में अपनी मजबूत पकड़ बनाई और संगठन में खुद को एक भरोसेमंद लीडर के तौर पर स्थापित किया.

1999 से 2014 सांसद रहे विष्णु देव साय
विष्णु देव साय पहली बार 1999 में रायगढ़ लोकसभा सीट से सांसद चुने गए. जिसके बाद वो 1999, 2004, 2009 और 2014 में लगातार चार बार सांसद चुने गए. अपने संसदीय कार्यकाल के दौरान, उन्होंने कई महत्वपूर्ण समितियों में काम किया, जिनमें खाद्य और सार्वजनिक वितरण, सूचना प्रौद्योगिकी, जल संसाधन और वाणिज्य समितियां शामिल थीं.

2014 से 2019 तक केंद्रीय मंत्री रहे साय

जिसके बाद 2014 में केंद्र में बीजेपी की सरकार आने के बाद उन्हें माइंस और स्टील के लिए केंद्रीय राज्य मंत्री बनाया गया. 2014 से 2019 के बीच उन्होंने स्टील, माइंस और लेबर एंड एम्प्लॉयमेंट जैसे मंत्रालयों में जिम्मेदारियां संभालीं. 

लखीराम अग्रवाल को माना जाता है साय का पॉलिटिकल गुरु

अविभाजित मध्य प्रदेश में बीजेपी के सीनियर नेता लखीराम अग्रवाल को साय का पॉलिटिकल गुरु माना जाता है. कहा जाता है कि लखीराम अग्रवाल ने उन्हें आगे बढ़ाया और 1990 में उन्हें विधानसभा का टिकट दिलाने में अहम भूमिका निभाई. उनके अनुशासन, आदिवासी समुदाय में मजबूत असर और विवादों से दूर रहने की पहचान ने साय को बीजेपी के अंदर एक भरोसेमंद नेता बना दिया.

2023 में छत्तीसगढ़ के सीएम बने साय

2023 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने साय को अहम जिम्मेदारियां दीं. उन्होंने मैनिफेस्टो कमेटी, बस्तर और सरगुजा इलाकों में बड़े पैमाने पर जनसंपर्क अभियान में एक अहम भूमिका निभाई. आदिवासी समुदाय के नेता के तौर पर उन्हें स्ट्रेटेजी के साथ आगे बढ़ाया गया. विष्णु देव साई 3 दिसंबर, 2023 को MLA चुने गए और 10 दिसंबर 2023 को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेकर राज्य का नेतृत्व संभाला.

 

 

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