घूसखोर पंडित पर विवाद: वैभव पाठक ने दायर किया परिवाद, नेटफ्लिक्स समेत कई पर कानूनी कार्रवाई

जबलपुर

मनोज बाजपेयी की फिल्म ‘घूसखोर पंडत' को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा. नाम बदलने के बाद भी मामला अदालत तक पहुंच चुका है और अब इससे जुड़ी कानूनी कार्रवाई और सख्त हो गई है. जबलपुर जिला न्यायालय ने परिवाद पर सुनवाई करते हुए फिल्म के निर्माता‑निर्देशक नीरज पांडे के साथ‑साथ Netflix के कई शीर्ष अधिकारियों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं. समाज के एक वर्ग की भावना आहत होने का आरोप लगाते हुए परिवादी ने इस मामले को गंभीर सांस्कृतिक और सामाजिक मुद्दा बताया है.

अदालत में दर्ज हुआ परिवादी का बयान

जबलपुर के प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी पंकज सविता की अदालत में सोमवार को परिवादी वैभव पाठक का बयान दर्ज किया गया. उन्होंने फिल्म के विवादित शीर्षक का विरोध करते हुए इसे ब्राह्मण समुदाय की गरिमा पर प्रहार बताया. अदालत ने बयान सुनने के बाद फिल्म के निर्माता‑निर्देशक सहित Netflix के संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए.

Netflix के शीर्ष अधिकारियों को नोटिस

नोटिस जिन लोगों को भेजा गया है, उनमें Netflix (USA) के अध्यक्ष रीड हेस्टिंग्स, सह‑मुख्य कार्यकारी अधिकारी टेड सरंदास, मुख्य सामग्री अधिकारी बेला बजरिया और Netflix इंडिया की उपाध्यक्ष मोनिका शेरगिल शामिल हैं. अदालत ने इन सभी से इस मामले में जवाब माँगने के निर्देश दिए हैं.

परिवाद में रीड हेस्टिंग्स (अध्यक्ष, नेटफ्लिक्स यूएसए), टेड सरंदास (सह-मुख्य कार्यकारी अधिकारी, नेटफ्लिक्स यूएसए), बेला बजरिया (मुख्य सामग्री अधिकारी, नेटफ्लिक्स यूएसए) और नेटफ्लिक्स की भारतीय वितरक मोनिका शेरगिल को भी पक्षकार बनाया गया है।

अभियुक्तों के विरुद्ध नोटिस जारी करने का आदेश

सोमवार को जेएमएफसी न्यायालय ने परिवादी के बयान दर्ज करने के बाद प्राथमिक दृष्टया आपराधिक मानहानि का मामला पाते हुए पांचों प्रस्तावित अभियुक्तों के विरुद्ध नोटिस जारी करने का आदेश पारित किया। न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी पंकज सविता ने यह आदेश परिवादी पं. वैभव पाठक के शपथ-पत्र और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर दिया।

परिवादी पं. वैभव पाठक (मध्य प्रदेश प्रगतिशील ब्राह्मण महासभा के सक्रिय सदस्य) ने अदालत को बताया कि फिल्म के शीर्षक में प्रयुक्त शब्दों से ब्राह्मण समुदाय की सामाजिक गरिमा को ठेस पहुंची है। उनका कहना है कि ‘पंडित’ शब्द भारतीय संस्कृति में विद्या, वैदुष्य और धार्मिक पवित्रता का प्रतीक रहा है, ऐसे में इसे ‘घूसखोर’ जैसे शब्द के साथ जोड़ना पूरे समुदाय की छवि को धूमिल करने का प्रयास है।

प्रचार-प्रसार से हुई सामाजिक क्षति

परिवादी की ओर से अधिवक्ता असीम त्रिवेदी ने तर्क रखा कि भले ही सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद फिल्म का शीर्षक बदला जा रहा हो, लेकिन पहले किए गए व्यापक प्रचार-प्रसार से जो सामाजिक क्षति हुई है, वह अपरिवर्तनीय है। इसलिए संबंधित व्यक्तियों को विधि सम्मत जवाबदेह ठहराया जाना आवश्यक है।

पंडित शब्द को नकारात्मक विशेषण के साथ जोड़ा

पं. वैभव पाठक ने अदालत के समक्ष कहा कि यह मामला केवल एक फिल्म के शीर्षक का नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक अस्मिता का प्रश्न है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि ‘पंडित’ उपाधि को जवाहरलाल नेहरू और अटल बिहारी वाजपेयी जैसी विभूतियों ने गौरवान्वित किया है, ऐसे शब्द को नकारात्मक विशेषण के साथ जोड़ना भारतीय परंपरा का अपमान है।

अब इस मामले में नोटिस जारी होने के बाद सभी पक्षों को अदालत में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखना होगा। प्रकरण की अगली सुनवाई की तिथि शीघ्र निर्धारित की जाएगी।

परिवादी की दलील: भावनाएं आहत 

परिवादी की ओर से अधिवक्ता असीम त्रिवेदी ने अदालत में कहा कि भले ही शीर्षक बदलने की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन फिल्म के पहले किए गए प्रचार‑प्रसार ने समाज के एक बड़े वर्ग को चोट पहुंचाई है. उनका कहना है कि इससे ब्राह्मण समुदाय की प्रतिष्ठा को नुकसान हुआ है, जो केवल नाम बदल देने से भरपाई नहीं हो सकता.

"पंडित" शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति

परिवाद में यह भी तर्क दिया गया कि “पंडित” शब्द भारतीय संस्कृति में विद्वता, ज्ञान और धार्मिक प्रतिष्ठा से जुड़ा है. इसे “घूसखोर” जैसे नकारात्मक शब्द के साथ जोड़ना न केवल एक काल्पनिक चरित्र का चित्रण है, बल्कि पूरे समुदाय की सामाजिक छवि को प्रभावित करता है. परिवादी ने यह भी कहा कि यह मामला सिर्फ एक शीर्षक का नहीं, बल्कि सामाजिक पहचान और सम्मान से जुड़ा प्रश्न है.
राष्ट्रीय हस्तियों का उल्लेख भी आया सामने

याचिका में कहा गया कि “पंडित” शब्द को देश की प्रमुख हस्तियों पंडित जवाहरलाल नेहरू और पंडित अटल बिहारी वाजपेयी ने सम्मान दिया है. ऐसे में इस शब्द को विवादित संदर्भ से जोड़ना भारतीय परंपरा और मूल्यों के खिलाफ है. अदालत जल्द ही इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख निर्धारित करेगी. नोटिस जारी होने के बाद अब फिल्म निर्माताओं और Netflix की ओर से जवाब दर्ज होने की प्रतीक्षा की जा रही है.

 

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