PMGKAY के तहत फोर्टिफाइड चावल वितरण पर केंद्र सरकार ने लगाई रोक, स्टोरेज में न्यूट्रिशन कम होने का दावा

नई दिल्ली
 केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) और अन्य सरकारी योजनाओं के तहत दिए जाने वाले 'फोर्टिफाइड चावल' के वितरण को फिलहाल रोक दिया है. सरकार ने यह कदम चावल के लंबे समय तक भंडारण के दौरान पोषक तत्वों के खराब होने की चिंताओं के बीच उठाया है.

क्यों लिया गया यह फैसला?
खाद्य मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, आईआईटी खड़गपुर को एक विशेष अध्ययन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. इस स्टडी में यह जांचना था कि अलग-अलग मौसम और परिस्थितियों में फोर्टिफाइड चावल के दाने कितने समय तक अपनी गुणवत्ता बनाए रखते हैं.

रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. अध्ययन के अनुसार, नमी, तापमान और गोदामों में रखने के तरीके का चावल की क्वालिटी पर बुरा असर पड़ रहा है. रिपोर्ट में कहा गया कि लंबे समय तक रखे रहने और सामान्य रखरखाव के दौरान इन चावलों में मौजूद जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्व कम हो जाते हैं. इससे जिस मकसद के लिए चावल में पोषण मिलाया गया था, वह पूरा नहीं हो पा रहा है.

भंडारण की समस्या सबसे बड़ी चुनौती
भारत के सरकारी गोदामों में चावल की उपलब्धता जरूरत से कहीं ज्यादा है. आंकड़ों के अनुसार, केंद्रीय पूल में लगभग 674 लाख मीट्रिक टन चावल उपलब्ध है, जबकि सालाना जरूरत सिर्फ 372 लाख मीट्रिक टन की है. इस कारण चावल को गोदामों में 2 से 3 साल तक रखा जाता है. इतने लंबे समय तक फोर्टिफाइड चावल में मिलाए गए विटामिन और आयरन अपनी शक्ति खो देते हैं.

आम जनता पर क्या होगा असर?
सरकार ने साफ किया है कि इस फैसले से राशन कार्ड धारकों को मिलने वाले अनाज की मात्रा में कोई कमी नहीं आएगी.

    राशन मिलता रहेगा: लाभार्थियों को उनके हक का पूरा चावल मिलेगा, बस वह अब फोर्टिफाइड (मिश्रित) नहीं होगा.
    इन योजनाओं पर असर: यह फैसला PDS (राशन दुकान), आंगनवाड़ी (ICDS) और स्कूलों में मिलने वाले मिड-डे मील (PM POSHAN) पर लागू होगा.
    राज्यों को छूट: खरीफ सीजन 2025-26 के लिए राज्यों को छूट दी गई है कि वे अपनी सुविधा के अनुसार फोर्टिफाइड या सामान्य चावल बांट सकते हैं.

क्या है फोर्टिफाइड चावल?
बता दें कि कुपोषण और एनीमिया (खून की कमी) को दूर करने के लिए सामान्य चावल में आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन B12 जैसे पोषक तत्व मिलाए जाते हैं. इसे 2019 में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया था और मार्च 2024 तक इसे पूरे देश में लागू कर दिया गया था.

आगे क्या?
खाद्य मंत्रालय के अनुसार, यह रोक स्थायी नहीं है. सरकार अब एक ऐसी नई तकनीक या सिस्टम पर काम कर रही है जिससे चावल के पोषक तत्व लंबे समय तक खराब न हों. जैसे ही कोई बेहतर तरीका मिल जाएगा, इस योजना को फिर से शुरू किया जा सकता है.

More From Author

2027 की जनगणना के लिए यूपी में तेज़ी से काम शुरू, अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

रिपोर्ट के मुताबिक, मेमोरी सप्लाई की कमी से 2026 में हो सकता है वैश्विक स्मार्टफोन शिपमेंट में गिरावट

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

RO No. 13695/1

RO No. 13379/55

city24x7.news founded in 2021 is India’s leading Hindi News Portal with the aim of reaching millions of Indians in India and significantly worldwide Indian Diaspora who are eager to stay in touch with India based news and stories in Hindi because of the varied contents presented in an eye pleasing design format.