होर्मुज संकट में ट्रंप को झटका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने मना किया, साउथ कोरिया ने दिया असमंजसपूर्ण जवाब

वाशिंगटन

अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध (US-Iran War) में ईरानी घमकियों के मद्देनजर डोनाल्ड ट्रंप ने सहयोगी देशों से Hormuz Strait की सुरक्षा के लिए युद्धपोत भेजने की अपील की थी. दुनिया के 20% तेल की आवाजाही के लिए जरूरी इस समुद्री रूट को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति आर-पार के मूड में हैं और बड़ा बयान देते हुए कहा कि ये देखना दिलचस्प होगा कि कौन से देश हमारे अनुरोध को ठुकराते हैं और हमारी मदद के लिए युद्धपोत नहीं भेजता है. इस बीच बता दें कि जापान से लेकर ऑस्ट्रेलिया और तुर्की तक ने होर्मुज में अपने युद्धपोत भेजने से लगभग इनकार कर दिया है।

ट्रंप बोले- हम 7 देशों से कर रहे बात 
होर्मुज को लेकर ईरान की धमकियों (Iran Warnings On Hormuz) के बीच ट्रंप ने कई देशों से युद्धपोत भेजने का आह्वान बीते दिनों किया था. इस बीच एयर फोर्स वन में बोलते हुए Donald Trump ने कहा कि वह होर्मुज की निगरानी के लिए अन्य देशों से सहयोग के लिए बातचीत कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि उनका प्रशासन Hormuz Strait की सुरक्षा को लेकर 7 देशों से बातचीत कर रहा है. ट्रंप ने ईरान युद्ध के तीसरे हफ्ते में प्रवेश करने के साथ क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर इसके प्रभाव पर जोर दिया।

'मदद करे तो अच्छा, न करे तो बहुता अच्छा'
Donald Trump होर्मुज स्ट्रेट को लेकर पूरी तर अब आर-पार के मूड में नजर आ रहे हैं और सहयोगी देशों से मदद की अपील में भी उनकी सख्ती साफ झलक रही है. उन्होंने कहा है कि अगर ये देश हमारी मदद करते हैं तो बहुत अच्छा है और अगर नहीं करते हैं, तो भी बहुत अच्छा है. ट्रंप ने आगे कहा कि यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन सा देश Hormuz Strait को खुला रखने जैसे छोटे से प्रयास में हमारी मदद नहीं करेगा।

इन देशों से सहयोग की आस
राष्ट्रपति ने कहा कि खाड़ी देशों के तेल पर निर्भर देशों को होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेनी ही चाहिए. मैं मांग करता हूं कि ये देश आगे आएं और अपने क्षेत्र की रक्षा करें, क्योंकि यह उनका क्षेत्र है, यह वह स्रोत है जहां से उन्हें ऊर्जा मिलती है. हालांकि ट्रंप ने सभी 7 देशों का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने उम्मीद जताते हुए कहा कि कई देश होर्मुज के जरिए होने वाले तेल यातायात को सुचारू रखने के लिए युद्धपोत भेजेंगे. उन्होंने चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन का नाम उन देशों में लिया, जिनसे उन्हें सहयोग की उम्मीद है. हालांकि, किसी भी देश ने अभी तक ट्रंप की इस अपील पर आगे आकर अपनी प्रतिक्रिया नहीं दी है और न ही युद्धपोत भेजे हैं।

जापान-ऑस्ट्रेलिया से तुर्की तक का इनकार
ट्रंप के युद्धपोत भेजने की अपील पर जापान का कहना है कि अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दूसरे देशों से होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा में मदद के लिए वॉरशिप भेजने को कहा था, लेकिन वह समुद्री सुरक्षा ऑपरेशन पर विचार नहीं कर रहा है. जापानी प्रधानमंत्री (Japan PM) का कहना है कि जापान को अभी तक US से होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों को एस्कॉर्ट करने के लिए अपनी नेवी भेजने का रिक्वेस्ट नहीं मिला है, इसलिए जवाब देना मुश्किल है।

वहीं दूसरी ओर एएफपी की रिपोर्ट की मानें, तो ऑस्ट्रेलिया का कहना है कि ट्रंप के रिक्वेस्ट के बाद वह होर्मुज स्ट्रेट में नेवी शिप नहीं भेजेगा. नाटो में अमेरिका के पार्टनर तुर्की ने इस जंग से पहले ही पल्ला झाड़ लिया है. वहीं साउथ कोरिया इस बात पर ध्यान से विचार करने की बात कह रहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में अपना वॉरशिप तैनात किया जाए या नहीं।

फ्रांस ने भी झाड़ लिया पल्ला 
न सिर्फ जापान, कोरिया, तुर्की और ऑस्ट्रेलिया, बल्कि अब फ्रांस की रक्षा मंत्री कैथरीन वॉट्रिन ने भी ट्रंप के अनुरोध पर दो टूक जबाव दिया है. उन्होंने कहा है कि जब तक युद्ध बढ़ता रहेगा, फ्रांस Hormuz Strait में अपने जंगी जहाज नहीं भेजेगा. वहीं जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वेडेफुल ने ऑपरेशन के बढ़ने की संभावना पर शक जताया और जर्मन ब्रॉडकास्टर ARD को बताया कि EU मिशन असरदार नहीं था, इसीलिए मुझे बहुत शक है कि एस्पाइड्स को होर्मुज तक बढ़ाने से ज्यादा सुरक्षा मिलेगी।

ईरान की झमता लगभग खत्म!
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपनी बात को दोहराते हुए कहा कि ईरान की उत्पादन क्षमता लगभग खत्म हो चुकी है, यही कारण है कि वह कम मिसाइलें दाग रहा है. ऐसे में होर्मुज की सुरक्षा और निगरानी का यह एक छोटा प्रयास है, हमने पहले ही ईरान की उत्पादन क्षमता को पूरी तरह नष्ट कर दिया है. उसकी ओर से मिसाइलें ही नहीं, बल्कि दागे जा रहे ड्रोनों की संख्या भी बहुत कम हो गई है और ये पहले की तुलना में करीब 20% रह गए हैं।

इन देशों से सहयोग की उम्मीद
हालांकि ट्रंप ने सभी सात सरकारों का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि कई देश होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले समुद्री यातायात को सुचारू रखने के लिए युद्धपोत भेजेंगे, जहां से दुनिया के 20 प्रतिशत तेल का परिवहन होता है। उन्होंने चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन का नाम उन देशों में लिया जिनसे उन्हें सहयोग की उम्मीद है। 

इतना खास क्यों है Hormuz?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से वो देश सबसे ज्यादा प्रभावित हैं जो सीधे तौर पर इस चोक पॉइंट से जुड़े हैं और तेल आयात पर निर्भर हैं. भारत और चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाएं भी सीधे तौर पर इस रास्ते पर निर्भर हैं. ऐसे में यहां रुकावट इनकी आर्थिक हालात बिगड़ने में अहम रोल निभा सकती हैं. बता दें कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे अहम चोक पॉइंट है, जहां से रोजाना लगभग 20 मिलियन बैरल तेल, यानी दुनिया की कुल खपत का करीब 20 प्रतिशत, गुजरता है. इसके साथ ही दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) भी इसी रास्ते से भेजी जाती है।

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