राजस्थान रॉयल्स की पहचान बन चुके थे संजू सैमसन, उनके जाने से टीम कमजोर: फाफ डुप्लेसी

नई दिल्ली
दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान फाफ डुप्लेसी का मानना है कि जिस तरह से महेंद्र सिंह धोनी चेन्नई सुपर किंग्स और विराट कोहली रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के पर्याय बन चुके हैं, इसी तरह से संजू सैमसन को राजस्थान रॉयल्स का चेहरा माना जा सकता था। फाफ ने कहा कि आरआर से संजू का जाना टीम के लिए बहुत बड़ा नुकसान है। सैमसन राजस्थान रॉयल्स की तरफ से दो कार्यकाल में 11 सत्र में खेले। वह इस टीम के सबसे सफल खिलाड़ी रहे हैं। उन्होंने रॉयल्स की तरफ से सर्वाधिक मैच खेलने के अलावा सर्वाधिक रन भी बनाए हैं। इस बार इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में वह चेन्नई सुपर किंग्स की तरफ से खेलेंगे।
 
डुप्लेसी ने जिओ हॉटस्टार से कहा, ‘अगर हम आईपीएल की टीमों पर गौर करें तो अधिकतर टीमों के पास कोई एक ऐसा खिलाड़ी रहा है जो लंबे समय तक फ्रेंचाइजी का चेहरा रहा जैसे रोहित शर्मा, महेंद्र सिंह धोनी और विराट कोहली। मैं संजू सैमसन को राजस्थान रॉयल्स के लिए उसी तरह का खिलाड़ी मानता हूं।’ उन्होंने कहा, ‘भले ही वह नई पीढ़ी के खिलाड़ी हैं, लेकिन वह उस फ्रेंचाइजी का चेहरा बन गए थे। जब मैं राजस्थान रॉयल्स के बारे में सोचता हूं, तो मुझे संजू सैमसन याद आते हैं। इसलिए मुझे लगता है कि उनका किसी अन्य टीम से जुड़ना प्रशंसकों, आईपीएल और टूर्नामेंट के लिए बहुत बड़ा झटका है, क्योंकि उन्होंने वहां बहुत बड़ी भूमिका निभाई है।’

डुप्लेसी ने कहा कि सैमसन के जाने से राजस्थान रॉयल्स के शीर्ष क्रम के बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल पर अतिरिक्त जिम्मेदारी आ जाएगी। सैमसन की मौजूदगी में जायसवाल अपना स्वाभाविक खेल खेलते थे लेकिन अब उन पर अधिक जिम्मेदारी आ गई है। उन्होंने कहा, ‘संजू की मौजूदगी में यशस्वी जायसवाल को अपना नैसर्गिक खेल खेलने का मौका मिलता था क्योंकि दूसरे छोर से संजू लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहा था। अब ऐसा नहीं होगा और उन पर अधिक जिम्मेदारी होगी। उस तरह के बल्लेबाज के लिए यह महत्वपूर्ण होता है कि वह जिम्मेदारी के बारे में नहीं सोचें। इसलिए यह सत्र उनके लिए सीखने की एक प्रक्रिया होगी।’

पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज लक्ष्मीपति बालाजी ने कहा कि राजस्थान रॉयल्स के रियान पराग को कप्तान नियुक्त करने के फैसले से उन्हें हैरानी हुई जबकि टीम में जायसवाल, ऑलराउंडर रविंद्र जडेजा और इंग्लैंड के सैम कुरेन जैसे अधिक अनुभवी खिलाड़ी मौजूद थे। उन्होंने कहा, ‘मुझे इस फैसले से थोड़ी हैरानी हुई क्योंकि उसके पास यशस्वी जायसवाल, रविंद्र जडेजा जैसे भारतीय खिलाड़ी और सैम कुरेन के रूप में विदेशी खिलाड़ी है जो कप्तानी कर सकते थे। इसलिए मुझे यह एक तरह का जुआ लगता है।’

बालाजी ने कहा कि ऐसे में टीम के मुख्य कोच और क्रिकेट निदेशक कुमार संगकारा की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा, ‘आईपीएल में कप्तानी सिर्फ मैदान पर फैसले लेने की क्षमता तक सीमित नहीं है बल्कि यह खिलाड़ियों को एकजुट रखने से भी जुड़ा है। इसलिए मुझे लगता है यह एक दोधारी तलवार है। कुमार संगकारा से निश्चित रूप से बहुत मदद मिलेगी।’

किशोर बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी के बारे में बालाजी ने कहा कि प्रतिद्वंद्वी टीमों ने शायद उनकी कमजोरियों की पहचान कर ली होगी, लेकिन इस 14 वर्षीय खिलाड़ी के लिए यह साबित करने का एक बड़ा अवसर है कि आईपीएल में पिछले साल का उनका प्रदर्शन महज संयोग नहीं था।

उन्होंने कहा, ‘हमने पिछले सत्र में वैभव सूर्यवंशी की प्रतिभा देखी है। उन्होंने गुजरात टाइटंस के खिलाफ बहुत अच्छे गेंदबाजी आक्रमण के सामने शतक बनाया था। लेकिन दूसरा साल किसी भी खिलाड़ी के लिए हमेशा चुनौतीपूर्ण होता है।’ बालाजी ने कहा, ‘यहीं पर कुमार संगकारा का मार्गदर्शन काम आएगा। विपक्षी टीमों ने निश्चित रूप से उनकी कुछ कमजोरियों की पहचान कर ली होगी। उनके पास अपने प्रदर्शन में निरंतरता बनाए रखने का यह शानदार अवसर होगा।’

 

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