इंद्रावती नेशनल पार्क के अंदर विकास की एंट्री, 79 साल बाद सागमेटा गांव जुड़ा सड़क से

बीजापुर.

जिले के इंद्रावती नेशनल पार्क क्षेत्र में बसे सागमेटा गाँव के लिए 2 अप्रैल 2026 का दिन ऐतिहासिक बन गया, जब पहली बार बस सेवा गाँव तक पहुँची। दशकों से बुनियादी सुविधाओं से वंचित इस क्षेत्र के करीब 600 परिवारों को अब बाजार, अस्पताल और प्रशासनिक सेवाओं तक सीधी पहुंच मिल सकेगी। इससे पहले ग्रामीणों को 17 किलोमीटर पैदल सफर करना पड़ता था, जिससे दिनचर्या और जीवन स्तर प्रभावित होता था।

इस बदलाव के पीछे स्थानीय युवाओं और प्रशासन का संयुक्त प्रयास रहा, जिन्होंने बस संचालकों को सेवा विस्तार के लिए तैयार किया और सुरक्षा का भरोसा दिलाया। क्षेत्र में स्थापित सुरक्षा कैंपों और सड़क निर्माण ने इस परिवर्तन को संभव बनाया है, जिससे विकास की राह खुली है। बस सेवा शुरू होने से शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों तक पहुंच आसान होगी। सागमेटा और आसपास के गाँवों में इस पहल ने उम्मीद की नई किरण जगा दी है और यह साबित किया है कि इच्छाशक्ति और समन्वय से दूरस्थ क्षेत्रों तक भी विकास पहुँच सकता है।

बीजापुर का 200 किलोमीटर का लंबा सफर
बीजापुर का आखिरी गांव पामेड़, जहां जाने के लिए लोगों को कभी 200 किलोमीटर का लंबा सफर तय करना पड़ता था, अब सीधे जिले से जुड़ गया है। यह वही इलाका है, जहां सड़कों पर वाहनों की आवाज से ज्यादा धमाकों की गूंज सुनाई देती थी। जहां विकास का सपना, नक्सलियों के साये में दम तोड़ देता था। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। सरकार ने इस दुर्गम क्षेत्र तक बस सेवा शुरू कर दी है, जो न सिर्फ एक सफर को आसान बना रही है, बल्कि नक्सल प्रभावित इस इलाके को मुख्यधारा से जोड़ने की एक नई उम्मीद भी जगा रही है।

पामेड़ गांव अब बस सेवा से जुड़ा
छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले का आखिरी गांव पामेड़ अब बस सेवा से जुड़ गया है। यह गांव अब तक सीधे जिले से नहीं जुड़ा था और वहां पहुंचने के लिए लोगों को तेलंगाना के रास्ते जाना पड़ता था। लेकिन अब राज्य सरकार ने नक्सल प्रभावित इस क्षेत्र में विकास को गति देने के लिए सात पंचायतों को जोड़ते हुए पामेड़ तक बस सेवा शुरू की है। यह कदम बीजापुर के तेजी से विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। बीजापुर, जो अक्सर नक्सली हमलों, आईईडी ब्लास्ट और मुठभेड़ों की वजह से सुर्खियों में रहता था, अब एक नई पहचान की ओर बढ़ रहा है।

50 साल बाद बस सेवा की शुरुआत
पिछले 50 सालों से इस इलाके में कोई बस सेवा उपलब्ध नहीं थी। पहले यहां सड़कें थीं, लेकिन उन पर वाहनों का संचालन नहीं होता था। धीरे-धीरे नक्सलियों ने इस पूरे क्षेत्र पर कब्जा कर लिया और वहां विकास कार्य रुक गए। लेकिन अब सरकार की ओर से यहां तेजी से सड़क निर्माण, सुरक्षा कैंप और अन्य बुनियादी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। अधिकारियों के मुताबिक, बीते चार महीनों में नक्सल प्रभावित इस इलाके में विकास कार्यों की रफ्तार काफी तेज हुई है। इस बस सेवा की शुरुआत से स्थानीय लोगों को काफी राहत मिलेगी और वे सीधे जिला मुख्यालय से जुड़ सकेंगे।

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