हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारतीय नौसेना की बड़ी कूटनीति, खाड़ी और दक्षिण-पूर्व एशिया के बंदरगाहों पर दी दस्तक

नई दिल्ली
भारतीय नौसेना ने दिसंबर 2025 से मार्च 2026 की अवधि के दौरान हिंद-प्रशांत क्षेत्र के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर अपनी रणनीतिक मौजूदगी को मजबूती से पेश किया है. इस दौरान भारतीय युद्धपोतों ने खाड़ी देशों, लाल सागर, दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य हिंद महासागर के विभिन्न देशों में 'ओवरसीज पोर्ट कॉल्स' यानी विदेशी बंदरगाहों का दौरा किया है.

ये ऑपरेशन नौसैनिक कूटनीति की कोशिशों को बेहतर करने और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चलाए गए थे. नौसेना के विभिन्न जहाजों ने फ्रांस से लेकर ऑस्ट्रेलिया और तंजानिया तक अपनी पहुंच बनाई. खुले स्रोतों और सार्वजनिक रिपोर्टिंग के आधार पर तैयार ये ब्योरा भारत की हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपस्थिति बनाए रखने की महत्वाकांक्षा को दिखाता है.

गल्फ-रेड सी क्षेत्र
रिपोर्ट में बताया गया है कि दिसंबर 2025 और मार्च 2026 के बीच भारतीय जहाजों ने खाड़ी और लाल सागर क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण दौरे किए. आईएनएस सुदर्शन ने मार्च 2026 में फ्रांस और फरवरी 2026 में ओमान का दौरा किया.

वहीं, आईएनएस त्रिकंड मार्च 2026 में तंजानिया और मोजाम्बिक के बंदरगाहों पर पहुंचा. तलवार क्लास के जहाजों ने दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 के दौरान जिबूती और ओमान में उपस्थिति दर्ज कराई.

इसके अलावा आईसीजीएस सार्थक ने दिसंबर 2025 में कुवैत, सऊदी अरब और ईरान के बंदरगाहों पर पोर्ट कॉल किए जो इस क्षेत्र में भारत के बढ़ते सुरक्षा हितों को रेखांकित करता है.

दक्षिण-पूर्व एशिया में भारतीय नौसेना
वहीं, दक्षिण-पूर्व एशिया के समुद्री रास्तों पर भी भारतीय नौसेना की सक्रियता काफी ज्यादा रही. दिसंबर 2025 में आईसीजीएस विग्रह ने मलेशिया और इंडोनेशिया का दौरा किया. जनवरी 2026 में आईएनएस शार्दुल और आईएनएस तीर सिंगापुर पहुंचे, जबकि आईएनएस सुजाता और आईसीजीएस सारथी ने इंडोनेशिया और थाईलैंड के बंदरगाहों पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई. ये पोर्ट कॉल्स न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करते हैं, बल्कि महत्वपूर्ण 'सी-लेन' (Sea Lanes) की सुरक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को भी दिखाते हैं.

हिंद महासागर से ऑस्ट्रेलिया तक पहुंच
उधर, भारत ने मध्य हिंद महासागर के द्वीपीय देशों में भी भारतीय नौसेना ने अपनी कूटनीति जारी रखी. आईएनएस शारदा और आईएनएस सागरध्वनि ने दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में मालदीव का दौरा किया.

इसी दौरान आईएनएस सुनयना और संकल्प मॉरीशस पहुंचे. आईएनएस त्रिकंड और संकल्प ने मार्च 2026 तक सेशेल्स में अपनी उपस्थिति बनाए रखी. सबसे महत्वपूर्ण तैनाती मार्च 2026 में आईएनएस नीलगिरी की रही, जिसने ऑस्ट्रेलिया के बंदरगाह पर पोर्ट कॉल किया. ये व्यापक विस्तार भारत की वैश्विक समुद्री भूमिका और सुरक्षा नेटवर्क को और ज्यादा प्रभावी बनाते हैं.

 

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