क्या ईरान में 45 दिन का युद्ध विराम होगा? पाकिस्तान समेत कई देशों की पेशकश पर निर्भर स्थिति

वाशिंगटन

अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध से मची वैश्विक उथल-पुथल के बीच एक अच्छी खबर सामने आई है। जानकारी के मुताबिक दोनों पक्षों के बीच सीजफायर कराने के लिए पाकिस्तान सहित अन्य मध्यस्थों ने पूरा जोर लगाया है और 45 दिनों के सीजफायर प्लान पर बातचीत शुरू हो गई है। बता दें कि बीते 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद से यह जंग जारी है। ईरान ने जवाब में इजरायल और खाड़ी देशों पर मिसाइलें बरसाई हैं। वहीं इस युद्ध की वजह से ईंधन आपूर्ति को लेकर भी चिंताएं बढ़ी हुई हैं।

इस बीच एक्सियोस ने रविवार को चार अमेरिकी, इजरायली और क्षेत्रीय सूत्रों के हवाले से बताया कि अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय मध्यस्थों का एक समूह 45 दिन के संभावित सीजफायर की शर्तों पर चर्चा कर रहा है। इस सीजफायर प्लान से युद्ध का हमेशा के लिए अंत भी हो सकता है।
क्या है सीजफायर प्लान?

रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्यस्थ दो चरणों वाले एक समझौते की शर्तों पर चर्चा कर रहे हैं। इसमें बताया गया है कि पहला चरण 45 दिन का संभावित सीजफायर होगा, जिसके दौरान युद्ध को हमेशा के लिए खत्म करने पर बातचीत की जाएगी। वहीं दूसरा चरण युद्ध को समाप्त करने के समझौते पर आधारित होगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर बातचीत के लिए और समय की जरूरत पड़ी, तो सीजफायर की अवधि बढ़ाई जा सकती है।
एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे मध्यस्थ

युद्धविराम के लिए जुटे सभी मध्यस्थ एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने एपी को बताया है कि संघर्षविराम कराने की उनकी सरकार की कोशिशें सही दिशा में आगे बढ़ रही हैं। इससे सीजफायर को लेकर उम्मीदें एक बार फिर लौटी हैं। वही क्षेत्र के दो अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तान के अलावा तुर्किये और मिस्र के मध्यस्थ भी अमेरिका और ईरान को बातचीत की मेज पर लाने के प्रयास में जुटे हुए हैं।
ईरान ने रखी हैं शर्तें

एक्सियोस ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि होर्मुज को पूरी तरह से खोलने और ईरान के पास अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम होने जैसे मुद्दों को केवल एक अंतिम समझौते के हिस्से के रूप में ही सुलझाया जा सकता है। इसके अलावा मध्यस्थ अमेरिका के लिए विश्वास-बहाली के उपायों पर काम कर रहे हैं और उन कदमों की तलाश कर रहे हैं जिन्हें अमेरिका ईरान की कुछ मांगों को पूरा करने के लिए उठा सकता है। वही ईरान ने युद्ध खत्म करने के शर्त के रूप में युद्ध का हर्जाना और सुरक्षा की गारंटी समेत कई मांगें रखी हैं।
ट्रंप ने दी है डेडलाइन

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को ईरान को एक बार फिर धमकी देते हुए कहा कि ईरान के साथ सोमवार तक समझौता होने की प्रबल संभावना है। हालांकि ट्रंप ने यह भी कहा है कि अगर ईरान ने तेजी नहीं दिखाई तो अमेरिका और तेजी से हमले करेगा। ट्रंप ने फॉक्स न्यूज से बातचीत में कहा कि अगर ईरान समझौते की दिशा में तेजी नहीं दिखाता है तो वह सब कुछ उड़ा देने और तेल पर नियंत्रण करने जैसे विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने वार्ता जारी रखने के लिए ईरानी वार्ताकारों को राहत दी है।

इससे पहले ट्रंप ने रविवार सुबह एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को नहीं खोला गया तो ईरान के ऊर्जा संयंत्रों और पुलों पर हमले किए जाएंगे। ट्रंप ने अपशब्दों का इस्तेमाल करते हुए ईरान को चेतावनी दी कि अगर जलमार्ग को समुद्री यातायात के लिए नहीं खोला गया, तो ईरान को 'नरक बना दिया जाएगा।
ईरान ने दिया दो टूक जवाब

वहीं ईरान ने ट्रंप को दो टूक जवाब दे दिया है। ईरान के संस्कृति मंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति की धमकियों को खारिज करते हुए उन्हें 'अस्थिर और भ्रम में रहने वाला व्यक्ति' करार दिया। सैयद रजा सालिही-अमीरी ने रविवार को एक साक्षात्कार में कहा, ''ईरानी समाज उनके बयानों पर आम तौर पर ध्यान नहीं देता क्योंकि उसका मानना है कि उनमें व्यक्तिगत, व्यवहारिक एवं भाषाई संतुलन का अभाव है और वह लगातार परस्पर विरोधी रुख अपनाते रहते हैं।'' सालिही-अमीरी ने कहा, ''ऐसा लगता है कि ट्रंप एक ऐसे व्यक्ति बन गए हैं, जिसका पूरा विश्लेषण न तो ईरानी कर पा रहे हैं और न ही अमेरिकी।'' उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज ‘दुनिया के लिए खुला है, लेकिन ईरान के दुश्मनों के लिए बंद है।’

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