नदी जोड़ो परियोजनाओं से बदल रही है किसानों की तकदीर और मध्यप्रदेश की तस्वीर

भोपाल. 
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश की तीन अंतर्राज्यीय सिंचाई परियोजनाएं किसानों की समृद्धि और प्रदेश की तरक्की का आधार बन रही हैं। इन परियोजनाओं से जब किसान के खेतों तक पानी पहुँचेगा तो मिट्टी सोना उगलेगी। किसानों को भरपूर पानी मिलेगा, जिससे वे एक वर्ष में तीन-तीन फसलें ले सकेंगे।

तीन पड़ोसी राज्यों उत्तर प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र के साथ प्रदेश में तीन बड़ी अंतर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजनाओं पर तेजी से कार्य हो रहा है। उत्तर प्रदेश के साथ केन-बेतवा लिंक परियोजना, राजस्थान के साथ पार्वती-चंबल-कालीसिंध परियोजना और महाराष्ट्र के साथ मेगा-तापी अंडरग्राउंड वॉटर रिचार्ज परियोजना पर कार्य किया जा रहा है। इन परियोजनाओं के पूरा होने पर मध्यप्रदेश में कृषि, उद्योग, पेयजल के लिए पर्याप्त मात्रा में जल उपलब्ध होगा। इन परियोजनाओं की विशेषता यह है कि इन पर आने वाली लागत का 90% खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी। वर्तमान में मध्यप्रदेश का सिंचाई रकबा लगभग 55 लाख हेक्टेयर है। वर्ष 2028-29 तक इसे 100 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य मध्यप्रदेश सरकार ने रखा है।

"केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना"
अंतर्राज्यीय नदियों को जोड़ने की दिशा में केन्द्र सरकार, मध्यप्रदेश एवं उत्तर प्रदेश सरकार मिल कर देश की प्रथम अंतर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजना "केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना" का निर्माण कर रही है। इसकी कुल लागत 44,604 करोड़ रूपये है। मध्यप्रदेश के कार्यांश के लिए केन-बेतवा लिंक परियोजना की लागत 24,293 करोड़ रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति मध्यप्रदेश शासन द्वारा अप्रैल 2024 में जारी की गई। परियोजना के प्रथम चरण में दौधन बांध का प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिसंबर 2025 को शिलान्यास किया गया। परियोजना से दो चरणों में मध्यप्रदेश में 8 लाख 11 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में वार्षिक सिंचाई क्षमता विकसित की जानी है।

परियोजना में 126 एम.सी.एम. जल से 10 जिलों की 41 लाख आबादी को पेयजल की सुविधा प्राप्त होगी। इससे 103 मेगावाट विद्युत उत्पादन किया जायेगा। परियोजना से 10 जिले छतरपुर, पन्ना, दमोह, सागर, टीकमगढ़, निवाड़ी, रायसेन, शिवपुरी, दतिया एवं विदिशा लाभान्वित होंगे। साथ ही छतरपुर, टीकमगढ़ एवं निवाड़ी के कुल 42 ऐतिहासिक तालाबों का जीर्णोद्धार भी किया जायेगा।

संशोधित पार्वती-कालीसिंध चंबल लिंक परियोजना
मध्यप्रदेश राज्य की अंतर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजना के अंतर्गत संशोधित पार्वती-कालीसिंध चंबल लिंक को धरातल पर लाने के लिए अनुमानित निर्माण राशि 35 हजार करोड़ रूपये है। इस परियोजना से मध्यप्रदेश राज्य में मालवा और चंबल क्षेत्र के 13 जिलों उज्जैन, गुना, शिवपुरी, श्योपुर, भिंड, मुरैना, सीहोर, शाजापुर, देवास, राजगढ़, मंदसौर, आगर-मालवा एवं इंदौर के 2012 ग्रामों की लगभग 6 लाख 15 हजार हेक्टेयर भूमि में सिंचाई हेतु जल उपलब्ध होगा। मालवा एवं चंबल क्षेत्र के 11 जिलों की 43 लाख आबादी को 61 एम.सी.एम. जल आरक्षित किया जाकर पेयजल की सुविधा प्राप्त होगी। साथ ही परियोजना से उद्योगों हेतु 17.4 मि.घ.मी. जल उपलब्ध होगा। दिसंबर 2024 में जयपुर में "पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजना" का अनुबंध सहमति पत्र (मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट) भारत सरकार राजस्थान एवं मध्यप्रदेश के मध्य हस्ताक्षरित किया गया। पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना अंतर्गत परियोजना समूह की लागत 31479.48 करोड़ रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति मध्यप्रदेश शासन द्वारा जारी की गई है। यह परियोजना मध्यप्रदेश के चंबल और मालवा क्षेत्र के जिलों में जल आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना से लगभग 7 लाख 84 हजार कृषकों के जीवन में समृद्धि और खुशहाली आएगी। इस लिंक परियोजना के अंतर्गत 22 वृहद सिंचाई परियोजना के निर्माण के साथ ही 60 वर्ष पुरानी चम्बल दांई तट नहर एवं वितरिका तंत्र के आधुनिकीकरण से मुरैना, भिंड, एवं श्योपुर जिलों के 1205 ग्रामों में 3 लाख 62 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में किसानों को सिंचाई का सुनिश्चित लाभ मिलेगा।

मेगा तापी रीचार्ज परियोजना
मेगा तापी रीचार्ज परियोजना पारंपरिक जल भंडारण के स्थान पर भू-गर्भ जल पुर्नभरण योजना है, जिसका उददेश्य मानसून के दौरान तापी नदी के अतिरिक्त जल को नियंत्रित तरीके से भू-जल भरण के लिये उपयोग किया जाकर भू-जल स्तर में वृद्धि किया जाना है। तापी नदी के दाहिने किनारे सतपुड़ा पर्वत माला के तल पर स्थित बजाड़ा जोन में कृत्रिम भू-जल पुनर्भरण किया जायेगा। परियोजना की लागत 19 हजार 244 करोड़ है, जिससे बुरहानपुर एवं खण्डवा जिले के 01 लाख 23 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की जायेगी। मई 2025 को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेन्द्र फडणवीस एवं मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मध्य इसे राष्ट्रीय परियोजना के रूप में निर्मित किये जाने की सहमति प्रदान की गई।

माइक्रो सिंचाई में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी
उल्लेखनीय है कि माइक्रो सिंचाई में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी राज्य है एवं इस पद्धति के माध्यम से जल का अधिकतम उपयोग कर पाइप के माध्यम से प्रत्येक किसान के खेत तक पानी पहुंचाया जाता है। साथ ही ऐसे क्षेत्रों में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाती है, जहां नहरों से पानी पहुंचाना कठिन हो। वर्तमान में प्रदेश में निर्माणाधीन अधिकतम वृहद एवं मध्यम सिंचाई परियोजनाओं में इस पद्धति का उपयोग किया जा रहा है।

 

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