तेल संकट का समाधान: मोदी सरकार ने अरुणाचल को बनाया भारत का नया ‘ऑयल फील्ड

नई दिल्ली

ईरान जंग की वजह से दुन‍िया में तेल गैस का गंभीर संकट है. अभी तो सीजफायर हो गया है, लेकिन कब यह इलाका फ‍िर आग की चपेट में आ जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता. इसल‍िए मोदी सरकार ने अभी से ऐसी तैयारी शुरू कर दी है क‍ि तेल गैस का संकट ही नहीं रहेगा. सरकार ने अरुणाचल प्रदेश में दो बड़े हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स को मंजूरी देकर साफ कर दिया है कि भारत अब तेल के लिए खाड़ी देशों का मोहताज नहीं रहेगा. जान‍िए कैसे ये प्रोजेक्ट्स चीन की नाक के नीचे नॉर्थ-ईस्ट की किस्मत बदल देंगे। 

जिस वक्त पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सीजफायर के बाद ईरान होर्मुज का ताला खोलता है या नहीं, या तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाती हैं या नहीं, ठीक उसी वक्त मोदी कैबिनेट ने एक बहुत बड़ा फैसला ल‍िया है. सरकार ने देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के ल‍िए मिशन मोड पर काम शुरू कर द‍िया है. बुधवार को केंद्रीय कैब‍िनेट ने अरुणाचल प्रदेश में जिन दो प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली दी, वे भारत को खाड़ी देशों के तेल पर निर्भरता कम करने और ग्रीन एनर्जी की तरफ बढ़ने में मदद करेंगे। 

40,000 करोड़ का एनर्जी गिफ्ट
    1200 मेगावाट का कालाई-II प्रोजेक्ट: अरुणाचल प्रदेश के अंजा जिले में बनने वाला यह प्रोजेक्ट लोहित बेसिन में पहला बड़ा हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट है.इस पर 14,105.83 करोड़ का खर्च आएगा. जब यह बनकर तैयार हो जाएगा तो इससे हर साल 4852.95 मिलियन यूनिट ब‍िजली का प्रोडक्‍शन होगा. यह THDC इंडिया लिमिटेड और अरुणाचल प्रदेश सरकार का जॉइंट वेंचर होगा, जिसे भारत सरकार की तरफ से फाइनेंशियल सपोर्ट मिलेगा. यह प्रोजेक्ट न केवल अरुणाचल में बिजली की सप्लाई सुधारेगा, बल्कि पीक डिमांड को मैनेज करने और नेशनल ग्रिड को बैलेंस करने में बहुत बड़ा योगदान देगा।

    1720 मेगावाट का कमला प्रोजेक्ट: यह अरुणाचल प्रदेश का दूसरा बड़ा तोहफा है. इस प्रोजेक्ट की ताकत कालाई-II से भी ज्यादा है, जिससे पूरा क्षेत्र रोशनी से नहा उठेगा. जब ये दोनों प्रोजेक्ट्स अपनी पूरी क्षमता पर काम करेंगे, तो अरुणाचल प्रदेश भारत के लिए ‘बिजली का पावरहाउस’ बन जाएगा। 

अरुणाचल बनेगा पावरहाउस और रोज़गार का हब
मोदी सरकार का यह फैसला सिर्फ बिजली बनाने के लिए नहीं है, बल्कि यह नॉर्थ-ईस्ट के लोगों की साख और सम्मान से भी जुड़ा है. इन प्रोजेक्ट्स को बनाने और चलाने में हजारों लोगों की जरूरत होगी. बड़ी संख्या में लोगों को रोज़गार मिलेगा. इन प्रोजेक्ट्स तक पहुंचने के लिए अरुणाचल में लगभग 29 किलोमीटर की नई सड़कें और पुल बनाए जाएंगे. इससे पूरा इलाका मेनस्ट्रीम से जुड़ जाएगा. इन प्रोजेक्ट्स के शुरू होने से अरुणाचल प्रदेश को 12% बिजली बिल्कुल मुफ्त मिलेगी. इसके अलावा, एक अतिरिक्त 1% बिजली लोकल एरिया डेवलपमेंट फंड के लिए रिजर्व होगी, जिससे स्थानीय स्कूलों, अस्पतालों और सड़कों का विकास होगा। 

चीन की नाक के नीचे विकास का ‘डंका’
इस प्रोजेक्‍ट के पीछे एक बहुत बड़ी जियो-पॉलिटिकल ड‍िप्‍लोमेसी भी छिपी है. जिस इलाके में ये प्रोजेक्ट्स बन रहे हैं, उस पर चीन अक्सर अपनी नजरें गड़ाता रहता है. ऐसे संवेदनशील इलाके में ₹40,000 करोड़ का निवेश करना और हाइड्रो पावर के जरिए पानी पर अपना कंट्रोल मजबूत करना चीन के लिए एक बड़ा संदेश है. मोदी सरकार ने यह साफ कर दिया है कि नॉर्थ-ईस्ट भारत का अभिन्न हिस्सा है और यहां विकास की गति अब रुकने वाली नहीं है. यह एक्ट ईस्ट पॉलिसी का एक जबरदस्त उदाहरण है। 

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