पीपल-बरगद काटना माना गया अशुभ, जानिए वास्तु में क्या कहते हैं नियम

घर के आसपास या किसी प्लॉट पर लगे पेड़-पौधों को कई बार काटना मजबूरी हो जाता है। वैसे तो हम बिना सोचे-समझे पुराने पेड़ को काट देते हैं। लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार, पेड़ काटना कोई साधारण काम नहीं है। गलत तरीके से पेड़ काटने से वास्तु दोष पैदा होता है, जिसका प्रभाव पूरे परिवार पर पड़ता है। इससे मानसिक तनाव, आर्थिक हानि, स्वास्थ्य समस्या और पारिवारिक कलह बढ़ सकती है। सही नियमों का पालन करके हम प्रकृति का सम्मान कर सकते हैं और घर की सकारात्मक ऊर्जा को बचाए रख सकते हैं।

पेड़ का अपना आभामंडल और ऊर्जा
वास्तु शास्त्र के अनुसार, हर पेड़ का अपना आभामंडल होता है। जब हम बिना किसी नियमों का ध्यान रखे पेड़ काटते हैं, तो वह स्थान शोक और नकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है। इसका सबसे ज्यादा असर घर के मुखिया पर पड़ता है। ऐसे में पेड़ काटने से पहले वास्तु नियमों को समझना बहुत जरूरी है।

देव वृक्षों को काटने का महापाप
पीपल, बरगद और गूलर को देव वृक्ष माना गया है। इनमें देवताओं और पितरों का वास होता है। इन्हें काटने से भारी वास्तु दोष, पितृ दोष और संतान संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। अगर इन पेड़ों की शाखाएं दीवार या तारों को नुकसान पहुंचा रही हों, तब भी इन्हें काटने से पहले विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। बिना पूजा के इन पेड़ों को काटना बहुत अशुभ माना जाता है।

पेड़ काटने से पहले माफी और पूजा
पेड़ काटने से पहले उसकी पूजा जरूर करें। पूजा के दौरान पेड़ को गंध, पुष्प और नैवेद्य अर्पित करें। तने को सफेद कपड़े से ढककर उस पर सफेद सूत लपेटें। इसके बाद पेड़ से प्रार्थना करें कि उस पर रहने वाले सूक्ष्म जीव दूसरे स्थान पर चले जाएं। पूजा के बाद ही काटने का कार्य शुरू करें। कहा जाता है कि ऐसा करने से वास्तु दोष की संभावना काफी कम हो जाती है।

शुभ समय और निषिद्ध दिन
पेड़ काटने के लिए कुछ दिन और नक्षत्र विशेष रूप से शुभ माने गए हैं। चतुर्थी, नवमी या चतुर्दशी तिथि अच्छी मानी जाती है। शुभ नक्षत्रों में मृगशिरा, पुनर्वसु, अनुराधा, हस्त, मूल, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद, स्वाति और श्रवण शामिल हैं। पेड़ काटने के लिए सुबह का समय सबसे अच्छा होता है।

निषिद्ध दिन: भूलकर भी मंगलवार, शनिवार या अमावस्या को पेड़ ना काटें। गुरुवार और रविवार को भी बचना चाहिए। दोपहर में पेड़ काटने से बचें।
दिशाओं का महत्व और क्षतिपूर्ति

ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में स्थित पेड़ काटना सबसे हानिकारक माना जाता है। यह सात्विक ऊर्जा का द्वार है, इसलिए यहां का पेड़ काटने से किस्मत पर बुरा प्रभाव पड़ता है। दक्षिण दिशा में पेड़ हटाना अपेक्षाकृत कम हानिकारक होता है। पेड़ को हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर से काटना शुरू करें। वास्तु शास्त्र में प्रकृति के ऋण का भुगतान का नियम है। अगर एक पेड़ काटना पड़े, तो उसके बदले कम से कम 10 नए पौधे लगाएं। जब ये पौधे फलने-फूलने लगें, तब क्षतिपूर्ति पूरी मानी जाती है।

सही विधि और शुभ मुहूर्त में पेड़ काटने से वास्तु दोष नहीं लगता। इससे घर की सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और परिवार पर संकट के बादल नहीं मंडराते हैं। वास्तु विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पेड़ काटने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी या वास्तु विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें।

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