US-ईरान शांति वार्ता क्यों टूटी? परमाणु हथियार बना सबसे बड़ा रोड़ा

नई दिल्ली

पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही उच्च स्तरीय शांति वार्ता 21 घंटे तक चली सघन चर्चा के बाद भी बेनतीजा रही। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर ऐसी कौन सी बात हुई, जिसके कारण शांति वार्ता छोड़कर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस वहां से निकल गए।

दरअसल, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस समझौते के विफल होने की वजह ईरान ने परमाणु हथियारों से जुड़ी अनिवार्य शर्तों को न मानना बता रहे हैं, तो वहीं ईरान ने अमेरिका पर अतार्किक और बेतुकी मांगें थोपने का आरोप लगाया है।

क्यों विफल हुई शांतिवार्ता?
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में 21 घंटे तक चली बातचीत के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस ने विस्तार से चर्चा करने और सार्वजनिक रूप से बातचीत करने से इनकार कर दिया, लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा कि मुख्य विवाद परमाणु हथियारों पर था।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने कहा कि यह ईरान के लिए बुरी खबर है और उनकी टीम अंतिम और सर्वोत्तम प्रस्ताव पेश करने के बाद वार्ता खत्म कर दी है।
कैसे बिगड़ी बात?

शांति वार्ता के दौरान अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस ने कहा, "हमें एक सकारात्मक प्रतिबद्धता देखने की जरूरत है कि वे परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश नहीं करेंगे और न ही ऐसे उपकरण हासिल करने की कोशिश करेंगे जो उन्हें जल्दी से परमाणु हथियार प्राप्त करने में सक्षम बना सकें। वेंस ने तया कि यही लक्ष्य अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का भी है और यही वे बातचीत के माध्यम से हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।

वेंस ने एक अलंकारिक प्रश्न पूछा कि क्या ईरानियों में दीर्घकाल में परमाणु हथियार विकसित न करने की इच्छाशक्ति है? जिसका ईरानियों ने सीधा सा जवाब 'नहीं' में दिया।

शनिवार को इस्लामाबाद में चली शांति वार्ता के दौरान ईरान की जब्त संपत्तियों पर चर्चा हुई, इस बारे में एक पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए वैंस ने कहा कि इस पर और कई अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन हम ऐसी स्थिति तक नहीं पहुंच सके जहां ईरानी हमारी शर्तों को स्वीकार करने के लिए तैयार हों।

ईरान ने अमेरिका की बेतूकी मांगो की आलोचना की
ईरान ने मध्य पूर्व में युद्ध समाप्त करने के उद्देश्य से इस्लामाबाद में चल रही वार्ता में गतिरोध के लिए अमेरिका की बेतूकी मांगो को जिम्मेदार ठहराया है। ईरानी सरकारी प्रसारक आईआरआईबी ने बताया, "ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने ईरानी जनता के राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए 21 घंटे तक लगातार और गहन बातचीत की।

ईरानी प्रतिनिधिमंडल की विभिन्न पहलों के बावजूद, अमेरिकी पक्ष की अनुचित मांगों ने बातचीत की प्रगति को रोक दिया। इस प्रकार बातचीत समाप्त हो गई।"

 

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