LPG सिलेंडर वितरण में बदलाव, ग्राहकों को मिलेगा नया तरीका, जानें पूरी जानकारी

नई दिल्ली

 पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब भारत की रसोई तक पहुंचने लगा है। एलपीजी (रसोई गैस) की सप्लाई पर दबाव बढ़ने के बीच भारत ने अब स्पॉट मार्केट से LPG खरीदना शुरू कर दिया है, ताकि घरों और कारोबार में गैस की कमी न हो। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) दुनिया का बड़ा ऊर्जा सप्लायर है। लेकिन, हाल के संघर्ष के कारण वहां से सप्लाई प्रभावित हुई है। ऐसे में भारत, जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, अब तुरंत जरूरत पूरी करने के लिए स्पॉट खरीदारी कर रहा है। सरकारी तेल कंपनियां (OMCs) अब अमेरिका जैसे देशों से अतिरिक्त LPG कार्गो खरीद रही हैं, जो जून-जुलाई तक भारत पहुंचने की उम्मीद है।

भारत में रोजाना करीब 80,000 टन LPG की जरूरत होती है। अच्छी बात यह है कि देश ने अपनी घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाई है। पहले घरेलू उत्पादन कम था, जो अब बढ़कर करीब 46,000 टन प्रति दिन हो गया है, यानि अब भी एक बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर है।

पहले भारत की लगभग 90% LPG सप्लाई खाड़ी देशों (UAE, कतर, सऊदी अरब आदि) से आती थी। लेकिन, अब सरकार ने रणनीति बदलते हुए आयात के स्रोत बढ़ा दिए हैं। अब इस लिस्ट में अमेरिका, नॉर्वे, कनाडा, अल्जीरिया और रूस जैसे देशों को जोड़ा गया है। पहले 10 देशों से आयात होता था, अब इसे बढ़ाकर 15 देशों तक कर दिया गया है।

सरकार के मुताबिक करीब 8 लाख टन LPG का आयात पहले ही सुनिश्चित किया जा चुका है। हाल ही में 10 जहाज भारत पहुंचे, जिनमें से 9 में कुकिंग गैस थी। यह दिखाता है कि सरकार सप्लाई चेन को बनाए रखने के लिए लगातार सक्रिय है।

आसान भाषा में समझें तो लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट पहले से तय कीमत और सप्लाई पर होती है। इस स्पॉट खरीदारी में तुरंत जरूरत के हिसाब से बाजार से खरीद की जाती है। अभी भारत स्पॉट खरीद इसलिए कर रहा है, क्योंकि अचानक सप्लाई में कमी आई है।

फिलहाल सरकार का फोकस साफ है कि घरेलू गैस सप्लाई बाधित न हो। इसलिए सिलेंडर की उपलब्धता बनी रहने की उम्मीद है। हालांकि, अगर अंतरराष्ट्रीय कीमतें ज्यादा समय तक ऊंची रहती हैं, तो भविष्य में कीमतों पर असर पड़ सकता है।

पश्चिम एशिया के संकट के कारण भारत ने LPG सप्लाई को सुरक्षित रखने के लिए ये नई रणनीति अपनाई है। इसका मकसद साफ है कि देश में गैस की कमी न हो और हर घर तक सिलेंडर समय पर पहुंचे।

बिना DAC नहीं मिलेगा LPG
अब उपभोक्ताओं को सिलेंडर प्राप्त करने के लिए Delivery Authentication Code यानी DAC बताना अनिवार्य होगा। यह कदम गैस की कालाबाजारी और फर्जी डिलीवरी की शिकायतों को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से सही उपभोक्ता तक ही सिलेंडर की पहुंच सुनिश्चित होगी।

क्या है DAC और क्यों हुआ अनिवार्य
DAC यानी Delivery Authentication Code एक प्रकार का OTP होता है, जो उपभोक्ता के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजा जाता है। जब डिलीवरी कर्मी सिलेंडर लेकर घर पहुंचता है, तो उपभोक्ता को यह कोड बताना होता है। बिना DAC बताए डिलीवरी को वैध नहीं माना जाएगा। यह प्रणाली पारदर्शिता बढ़ाने और गलत वितरण को रोकने के लिए लागू की गई है।

कैसे काम करता है यह नया सिस्टम
जब कोई उपभोक्ता LPG सिलेंडर बुक करता है, तो डिलीवरी से पहले उसके मोबाइल नंबर पर 4 से 6 अंकों का DAC स्वतः भेज दिया जाता है। उपभोक्ता को इस कोड को सुरक्षित रखना होता है और केवल अधिकृत डिलीवरी कर्मी को ही बताना होता है। इस प्रक्रिया के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि सिलेंडर सही व्यक्ति को ही सौंपा गया है।

अलग से आवेदन की जरूरत नहीं
इस नई व्यवस्था के लिए उपभोक्ताओं को किसी प्रकार का अतिरिक्त आवेदन करने की आवश्यकता नहीं है। DAC सिस्टम पूरी तरह स्वचालित है और सिलेंडर बुकिंग के साथ ही सक्रिय हो जाता है। इससे उपभोक्ताओं को किसी अतिरिक्त प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा और सुरक्षा भी सुनिश्चित रहेगी।

अंतरराष्ट्रीय हालात का भी असर
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होरमुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के कारण ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है। इन वैश्विक परिस्थितियों के बीच सरकार घरेलू स्तर पर आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू और पारदर्शी बनाए रखने के लिए ऐसे कदम उठा रही है, ताकि किसी प्रकार की अनियमितता या कालाबाजारी को रोका जा सके।

उपभोक्ताओं के लिए जरूरी सावधानिया
उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर अपडेट रखें और DAC को किसी अनधिकृत व्यक्ति के साथ साझा न करें। डिलीवरी के समय ही इस कोड को बताएं और सुनिश्चित करें कि सिलेंडर सही तरीके से प्राप्त हुआ है। इससे न केवल उनकी सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि पूरी व्यवस्था भी अधिक विश्वसनीय बनेगी।

पारदर्शिता की दिशा में अहम कदम
DAC प्रणाली LPG वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे न केवल उपभोक्ताओं का भरोसा मजबूत होगा, बल्कि गैस वितरण प्रणाली में सुधार भी देखने को मिलेगा।

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