Inflation Bomb: 21 देशों में महंगाई का खतरा बढ़ा, US-ईरान युद्ध से आर्थिक संकट गहरा

  नई दिल्ली

अमेरिका और ईरान में युद्ध (US-Iran War) में भले ही सीजफायर चल रहा है, लेकिन दुनिया में इसका असर देखने को मिल रहा है. इस जंग से तेल-गैस की कीमतों में लगी आग के  चलते यूरोप में महंगाई का बम फूटा है. यहां के 21 देशों में महंगाई अप्रैल महीने में बढ़ (Inflation Attack) गई है, जिसकी सबसे बड़ी वजह एनर्जी प्राइस हाइक बना है. ऊर्जा की कीमतों में तगड़ा इजाफा देखने को मिली है. पहले से ही ये युद्ध ग्लोबल इकोनॉमी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा था और इसके सबूत भी सामने आने लगे हैं। 

होर्मुज ने बिगड़ा यूरोप का खेल 
US-Iran War के चलते दुनिया को तेल और गैस की सप्लाई के लिए महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता होर्मुज स्ट्रेट बंद होने (Hormuz Strait Closure) के चलते फ्यूल सप्लाई पर गहरा असर हुआ. पाकिस्तान, ब्रिटेन से लेकर श्रीलंका, भारत और साउथ कोरिया तक में इसका असर देखने को मिला. इन देशों में पेट्रोल-डीजल (Petrol-Diesel Price) से लेकर एलपीजी तक की कीमतों में तगड़ा इजाफा (LPG Price Hike) देखने को मिला। 

वहीं अप्रैल में यूरोप में महंगाई दर (Inflation In Europe) भी तेजी से बढ़ा है, क्योंकि ग्रोथ रेट लगातार कमजोर हो रहा है. इस तरह से Inflation Rate Rise न सिर्फ कंज्यूमर्स और यूरोपियन सेंट्रल बैंक के पॉलिसीमेकर्स दोनों के लिए चिंता की बात है। 

महंगाई से सहमे 21 देश
21 देश, जो शेयर्ड यूरो करेंसी का इस्तेमाल करते हैं, वो महंगाई बढ़ने से सहमे हुए हैं. इनमें ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, फिनलैंड, फ्रांस (France), जर्मनी (Germany), इटली (Italy), नीदरलैंड्स (Netherlands), स्पेन (Spain) जैसे नाम शामिल हैं.  एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोजोन में सालाना महंगाई दर मार्च में 2.6% से बढ़कर अप्रैल में 3% हो गई. इसकी बड़ी वजह एनर्जी की कीमतों में 10.9% की तगड़ी बढ़ोतरी रही। 

यूरोपियन यूनियन की स्टैटिस्टिकल एजेंसी यूरोस्टैट के अनुसार, कच्चे तेल की कीमत (Crude Price Hike) 120 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर ट्रेड करने से ये खराब हालात बने, जो कि 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध (US-Israel Vs Iran War) शुरू होने से पहले करीब 73 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रही था।  

ग्रोथ रेट ने किया निराश
न सिर्फ महंगाई, बल्कि यूरोजन की ग्रोथ रेट ने भी निराश किया है. साल के पहले तीन महीनों में यूरोज़ोन की ग्रोथ पिछली तिमाही की तुलना में इकोनॉमिक आउटपुट में 0.1% की मामूली बढ़त में रही. इन आंकड़ों को देखकर साफ कहा जा सकता है कि वेस्ट एशिया का युद्ध ग्लोबल इकॉनमी (Global Economy) के लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ है। 

सबसे खराब हालात ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक करने से बने हैं, जो कि वह समुद्री रास्ता है जिससे पहले दुनिया का लगभग 20% तेल फारस की खाड़ी के जरिए प्रोड्यूसर्स से कस्टमर्स तक जाता था. तेल की कीमतों में उछाल का असर गैस स्टेशनों और जेट फ्यूल की कीमतों पर तुरंत दिखा है। 

बढ़ती महंगाई ने चिंता जताई है कि यह धीमी या न के बराबर ग्रोथ के साथ इकॉनमी में शामिल हो सकती है, जो कि पॉलिसीमेकर्स के लिए एक बड़ी उलझन है और इसे स्टैगफ्लेशन कहा जाता है. इससे ECB जैसे सेंट्रल बैंकों के पास कुछ ही अच्छे ऑप्शन बचते हैं. महंगाई को कंट्रोल करने का सबसे आम तरीका यह है कि सेंट्रल बैंक अपनी बेंचमार्क इंटरेस्ट रेट बढ़ा (Policy Rate Hike) दे, लेकिन इससे चीजें खरीदने के लिए क्रेडिट कॉस्ट बढ़कर ग्रोथ धीमी हो सकती है। 

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