मिशन 2027 के लिए यूपी में कैबिनेट फेरबदल, योगी की नई टीम की झलक

लखनऊ 

उत्तर प्रदेश की सियासत में अगले कुछ घंटे बेहद हलचल भरे रहने वाले हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट का विस्तार अब किसी भी वक्त हो सकता है. सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय नेतृत्व की हरी झंडी मिलने के बाद संभावित मंत्रियों को आज शाम तक लखनऊ मुख्यालय पहुंचने के निर्देश दे दिए गए हैं. कयास लगाए जा रहे हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज राज्यपाल से मुलाकात कर सकते हैं, जिसके बाद शपथ ग्रहण की तारीख और समय पर आधिकारिक मुहर लग जाएगी। 

2027 का ‘प्लान’ और विकास के साथ हिंदुत्व
बीजेपी हमेशा 24X7 चुनावी मोड में रहने वाली पार्टी मानी जाती है. अब पार्टी की निगाहें 2027 में होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव पर टिकी हैं. बीजेपी यूपी में जीत की ‘हैट्रिक’ लगाने की तैयारी में है. इस मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए पार्टी न केवल सरकार का चेहरा बदलेगी, बल्कि बोर्ड, निगम और आयोगों में भी कार्यकर्ताओं को जगह देकर संगठन को मजबूती देगी. रणनीति साफ है, पश्चिम बंगाल की तर्ज पर ‘विकास और हिंदुत्व’ के साथ-साथ मजबूत जातिगत समीकरणों को साधना। 

महिला कोटे पर विशेष फोकस, अखिलेश के PDA को जवाब
इस बार के विस्तार में सबसे खास बात ‘नारी शक्ति’ पर फोकस है. बीजेपी महिला आरक्षण के मुद्दे पर विपक्ष, खासकर सपा को घेरने की तैयारी में है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद भी नारी शक्ति के अपमान पर विपक्ष को आड़े हाथों लेते रहे हैं. ऐसे में योगी कैबिनेट में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई जा रही है। 

    कृष्णा पासवान: फतेहपुर से तीन बार की विधायक कृष्णा पासवान का नाम सबसे आगे है. उनके जरिए बीजेपी न केवल महिला कार्ड खेलेगी, बल्कि दलित (पासी) समाज को भी साधेगी. यह अखिलेश यादव के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले की काट माना जा रहा है। 

    पूजा पाल: सपा की बागी विधायक पूजा पाल को भी मंत्री पद की जिम्मेदारी मिल सकती है.

सपा के बागी और पुराने दिग्गजों की एंट्री
मंत्रिमंडल में 6 नए चेहरों को जगह मिलने की पूरी संभावना है. इसमें जातिगत संतुलन का खास ख्याल रखा गया है:

    मनोज पांडेय: सपा से आए ब्राह्मण चेहरा मनोज पांडेय को मंत्री बनाकर बीजेपी अवध क्षेत्र में अपना आधार मजबूत करना चाहती है.
    चौधरी भूपेंद्र सिंह: पश्चिम यूपी के बड़े जाट नेता भूपेंद्र सिंह का मंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है.
    अशोक कटारिया: गुर्जर समाज में पैठ रखने वाले पूर्व मंत्री और एमएलसी अशोक कटारिया को एक बार फिर मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है.
    रोमी साहनी: खीरी क्षेत्र में सिखों और पंजाबी खत्री बिरादरी की नाराजगी दूर करने के लिए रोमी साहनी को मौका मिल सकता है.

प्रमोशन और विभागों में फेरबदल की तैयारी
सूत्रों का कहना है कि सिर्फ नए चेहरे ही शामिल नहीं होंगे, बल्कि पुराने मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड पर भी काम होगा. कुछ राज्य मंत्रियों (स्वतंत्र प्रभार) को उनकी बेहतर परफॉर्मेंस, खासकर बंगाल चुनाव के दौरान किए गए कार्यों के लिए कैबिनेट मंत्री के रूप में प्रमोट किया जा सकता है. साथ ही कई मंत्रियों के विभागों में बड़े बदलाव की भी चर्चा है। 

बुजुर्ग मंत्रियों को नहीं हटाएगी पार्टी?
सियासी गलियारों में चर्चा थी कि कुछ उम्रदराज मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है, लेकिन पार्टी के एक धड़े का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले ऐसा करने से गलत संदेश जा सकता है. चूंकि यह विस्तार कुछ ही समय के लिए है और जल्द ही आचार संहिता लागू हो जाएगी, इसलिए बीजेपी क्षेत्रीय क्षत्रपों और बुजुर्ग नेताओं को नाराज करने का जोखिम नहीं लेना चाहती। 

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