रिवरफ्रंट से स्पोर्ट्स हब तक: गोमती तट पर 2035 तक बदल जाएगी राजधानी की तस्वीर

लखनऊ

दिल्ली से जुड़े जिलों को लेकर बने एनसीआर की तर्ज पर उत्तर प्रदेश स्टेट कैपिटल रीजन (यूपी एससीआर) की प्रस्तावित योजना में लखनऊ में गोमती नदी के किनारे पर बड़े स्तर पर विकास का खाका तैयार किया गया है। इस योजना के तहत गोमती तट को केवल सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे पर्यटन, संस्कृति, वेलनेस और सार्वजनिक गतिविधियों के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है। योजना को दो चरणों में लागू करने का प्रस्ताव है, जिसमें राष्ट्र प्रेरणा स्थल से लेकर इकाना स्टेडियम तक गोमती किनारे आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

पहले चरण में बनेगा सांस्कृतिक और हेरिटेज कॉरिडोर: योजना के पहले चरण को वर्ष 2027 से 2032 तक लागू करने का प्रस्ताव है। इसमें एनएच-230 से आचार्य नरेंद्रदेव मार्ग तक करीब 11.5 किलोमीटर लंबे हिस्से का विकास किया जाएगा। इस हिस्से में प्रेरणा स्थल और आसपास के क्षेत्रों को सिटी फॉरेस्ट व सांस्कृतिक गतिविधियों के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है। प्रस्ताव के अनुसार यहां हेरिटेज प्रोमेनेड, कल्चरल प्लाजा, ओपन एयर एग्जीबिशन स्पेस, स्कल्पचर गार्डन और मेमोरी वॉल बनाई जाएंगी।

इसके अलावा सांस्कृतिक घाट, इंटरप्रेटिव पाथवे, रिवर डेक, फ्लोटिंग फाउंटेन और वाटर गार्डन जैसी सुविधाएं भी विकसित होंगी। रात के समय आकर्षण बढ़ाने के लिए सॉफ्ट और नॉन-इंट्रूसिव लाइट एंड साउंड जोन भी बनाए जाएंगे। योजना में यह भी प्रस्तावित है कि गोमती नदी के किनारे ऐसे सार्वजनिक स्थल विकसित किए जाएं जहां लोग सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदर्शनियां और मनोरंजन गतिविधियां कर सकें। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

वेलनेस और स्पोर्ट्स हब बनेगा गोमती तट
योजना का दूसरा चरण वर्ष 2030 से 2035 तक लागू किया जाएगा। इसमें एनएच-24 से आउटर रिंग रोड तक करीब 7.75 किमी क्षेत्र को विकसित किया जाएगा। इस हिस्से में वेलनेस एंड सस्टेनेबिलिटी पार्क और ग्रीन कॉरिडोर विकसित करने का प्रस्ताव है। यहां इंडोर स्पोर्ट्स एरिया, ओपन प्लेइंग कोर्ट, स्टार गेजिंग एरिया, ईको ट्रेल्स व प्रोमेनेड बनाए जाएंगे। गोमती बैराज, लोहिया पथ व इकाना स्टेडियम के आसपास के क्षेत्रों को आधुनिक रिवरफ्रंट सुविधाओं से जोड़ने की योजना है। आधुनिक वॉकिंग जोन व हरित क्षेत्र विकसित करने पर विशेष जोर है।

अशोक मार्ग से हनुमान सेतु तक विशेष कनेक्टिविटी
योजना में अशोक मार्ग, हनुमान सेतु, गोमती बैराज और लोहिया पथ को जोड़ते हुए एकीकृत रिवर कॉरिडोर विकसित करने का भी प्रस्ताव शामिल है। अधिकारियों का मानना है कि इससे शहर के विभिन्न हिस्सों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी बनेगी और गोमती तट राजधानी के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों में शामिल हो जाएगा।

अनूपगंज आरओबी के सभी पिलर बने, डेक का काम शुरू
दूसरी ओर, गोसाईगंज-मोहनलालगंज के बीच लखनऊ-सुल्ताननपुर रेल खंड पर स्थित अनूपगंज रेलवे क्रासिंग पर बनाए जा रहे ओवर ब्रिज के सभी पिलर तैयार कर लिए गए हैं। डेक निर्माण के लिए इनके ऊपर बेस भी बना दिए गए हैं। अब बलियाखेड़ा की तरफ से डेक(ब्रिज के ऊपर का सड़क वाला हिस्सा) बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। रेलवे क्रासिंग के पास का ब्रिज का ढांचा नहीं खड़ा किया गया है। इसे गर्डर रखने की प्रक्रिया शुरू करने के कुछ महीनों पहले ही तैयार किया जाएगा।

अनूपगंज आरओबी गोसाईगंज की तरफ से बलिया खेड़ा के पास से शुरू शुरू होगा और मोहनलालगंज की तरफ शिवलर के पास उतरेगा। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि ब्रिज के नीचे दोनों तरफ सर्विस लेन भी बनेगा। कुछ स्थानों पर सर्विस लेन के लिए भूमि अधिग्रहण चल रहा है। ब्रिज निर्माण कार्य में अभी तक 58% की प्रगति है।

रोजाना 100 से अधिक ट्रेनें गुजरती हैं: लखनऊ-सुल्तानपुर रेल खंड पर स्थित अनूपगंज क्रासिंग से रोजाना 100 से अधिक ट्रेनें गुजरती हैं। क्रासिंग से रोजाना 30 हजार से अधिक वाहनों की आवाजाही होती है। गेट बंद होने पर यहाँ 30 से 45 मिनट का लंबा जाम लगता है। इसी समस्या के समाधान के लिए शासन ने यहां रेलवे ओवर ब्रिज को मंजूरी दी है।
तीन लाख लोगों को लाभ

आरओबी के बनने से गोसाईगंज, मोहनलालगंज समेत आसपास के दो दर्जन से अधिक इलाकों और कॉलोनियों में रहने वाली तीन लाख से ज्यादा की आबादी को सीधे तौर पर आने-जाने में बड़ी राहत मिलेगी।

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