हेल्दी रहने के लिए पैदल चलना सबसे आसान तरीका है। यह आपके पूरे शरीर की फिटनेस को सही रखने में मदद करता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके चलने की स्पीड से उम्र की लंबाई पर असर पड़ता है। लीसेस्टर बायोकेमिकल रिसर्च सेंटर की स्टडी ने पता लगाया कि तेज चलने वालों या धीमा चलने वालों में से कौन ज्यादा जीते हैं? इसी सेंटर की दूसरी रिसर्च इसके पीछे का कारण भी बताती है।
तेज या धीमी गति, कैसे चलने वाले लोग जीते हैं लंबा?
लीसेस्टर सेंटर की रिसर्च ने यूके बायोबैंक के 474,919 लोगों के चलने की आदत का अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि तेज स्पीड से चलने की आदत वाले लोगों की संभावित उम्र (लाइफ एक्सपेक्टेंसी) धीमा चलने वालों के मुकाबले ज्यादा होती है। उन्होंने यह पता भी लगाया कि संभावित उम्र का शारीरिक वजन से ज्यादा फिजिकल एक्टिविटी से गहरा नाता है। उन्होंने पाया कि जो अंडरवेट (जरूरत से ज्यादा पतले) लोग धीमी स्पीड से चलते हैं, उनकी उम्र सबसे कम देखी जाती है। धीमा चलने वाले अंडरवेट पुरुषों की संभावित उम्र औसतन 64.8 साल और ऐसी अंडरवेट महिलाओं की औसतन उम्र 72.4 साल होती है।
शारीरिक वजन से बेहतर है ये इंडिकेटर
इस रिसर्च के प्रमुख लेखक प्रोफेसर टॉम येट्स कहते हैं कि हमारा शोध यह साफतौर पर दिखाता कि संभावित उम्र को देखने के लिए बॉडीवेट स्टेटस से ज्यादा बेहतर इंडिकेटर फिजिकल एक्टिविटी स्टेटस है। हमारा शोध लोगों को तेज चलकर अपनी उम्र बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करेगा। आपको बता दें कि यह शोध साल 2019 में प्रकाशित हुआ था।
दूसरा शोध: टेलोमेयर है कारण
2022 में कम्युनिकेशन बायोलॉजी पर प्रकाशित लीसेस्टर के दूसरे शोधकर्ताओं की रिसर्च तेज चलने और लंबी उम्र के कारण के बारे में बताती है। इसमें यूके बायोबैंक के 405,981 लोगों का अध्ययन किया गया। जिसमें पाया कि चलने की स्पीड हेल्थ के बारे में जानने का मजबूत संकेत है। अध्ययन में तेज गति से चलने वाले लोगों के ल्यूकोसाइट टेलोमेयर की लंबाई धीमा चलने वालों के मुकाबले ज्यादा मिली। इसी की वजह से उनकी संभावित उम्र में बढ़ोतरी का संबंध पाया गया।
टेमोमेयर और लंबी उम्र का रिश्ता
कई सारे शोधों के बाद टेलोमेयर को लाइफ एक्सपेक्टेंसी और उम्र संबंधी बीमारियों के साथ मजबूती से जोड़कर देखा गया। साइंस डायरेक्ट पर मौजूद शोध बताता है कि टेलोमेयर लीनियर क्रोमोजोमल डीएनए के आखिरी सिरे पर मौजूद कैप होती है। जो क्रोमोजोम को डैमेज होने से बचाती है और इनकी स्टेबिलिटी को बढ़ाती है। 100 साल से ज्यादा जीने वाले लोगों में टेलोमेयर की लंबाई कम उम्र में किसी बीमारी से मरने वाले लोगों की तुलना में अधिक पाई गई है।
