‘गाय-बकरे-ऊंट और दुम्बा की कुर्बानी होगी’, हुमायूं कबीर के बयान से बढ़ा विवाद

मुर्शिदाबाद
 बकरीद से पहले पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है. आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के प्रमुख और विधायक हुमायूं कबीर के बयान ने राज्य का राजनीतिक माहौल गरमा दिया है. हुमायूं कबीर ने गाय की कुर्बानी को लेकर साफ शब्दों में कहा है कि कुर्बानी की परंपरा 1400 साल पुरानी है और इसे कोई नहीं रोक सकता. उन्होंने कहा कि जब तक दुनिया रहेगी, तब तक कुर्बानी भी होती रहेगी। 

बातचीत में हुमायूं कबीर ने बंगाल सरकार और सत्ता पक्ष पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि सरकार कभी कुछ बोलती है और अगले दिन कुछ और कहती है. उनके मुताबिक, सरकार मुसलमानों को गाय खाने से रोकने की बात कर सकती है, क्योंकि सरकार के पास सत्ता है, लेकिन कुर्बानी तो होगा ही। 

पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम 1950 के तहत राज्य सरकार की ओर से जनता के लिए जारी नोटिस पर आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के प्रमुख हुमायूं कबीर ने कहा- ‘सरकार मुसलमानों से बीफ न खाने का नियम बना सकती है, लेकिन धार्मिक कुर्बानी (क़ुर्बानी) जारी रहेगी. हम किसी भी आपत्ति को नहीं मानेंगे. यह एक ऐसी परंपरा है जो 1400 सालों से चली आ रही है और जब तक यह दुनिया रहेगी, तब तक जारी रहेगी.’
‘सुवेंदु अधिकारी सरकार चलाएं, धार्मिक परंपराओं में दखल ना दें। 

AJUP चीफ ने कहा कि अगर कोई कुर्बानी रोकने की कोशिश भी करेगा तो लोग उसकी बात नहीं सुनेंगे. उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी की सरकार बनी है, लोगों ने उन्हें वोट देकर सत्ता सौंपी है, इसलिए सरकार चलाना उनका अधिकार है. लेकिन धार्मिक परंपराओं में दखल नहीं दिया जा सकता। 

‘इस्लाम में गाय, बकरी, ऊंट की कुर्बानी जायज
हुमायूं कबीर ने आगे कहा कि गाय, बकरी, ऊंट और दुम्बा समेत सभी जानवर, जिनकी कुर्बानी इस्लाम में जायज मानी गई है, उनकी कुर्बानी होती रहेगी. उन्होंने दावा किया कि इसे रोकने की ताकत किसी के पास नहीं है। 

हुमायूं कबीर का नाम इससे पहले भी विवादों में आ चुका है. दिसंबर 2025 में उन्होंने मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद के नाम पर नई मस्जिद बनाने का ऐलान किया था. उस समय उनकी ही पार्टी TMC ने इस बयान पर सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें पार्टी से सस्पेंड कर दिया था। 

इसके बाद हुमायूं कबीर ने अपनी नई पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी बनाई. नई पार्टी बनाने के बाद उन्होंने पहली बार विधानसभा चुनाव में हिस्सा लिया और दो सीटों पर जीत दर्ज की. हुमायूं कबीर ने रेजीनगर और नवदा सीट से चुनाव लड़ा और दोनों जगह जीत हासिल की. अब बकरीद से पहले दिया गया उनका नया बयान बंगाल की राजनीति में एक और बड़े विवाद की वजह बन सकता है। 

फुरफुरा शरीफ के वरिष्ठ पीरजादा बोले- गोहत्या रोकने के लिए कानून बने
वहीं पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम 1950 के तहत राज्य सरकार की ओर से जारी सार्वजनिक नोटिस पर फुरफुरा शरीफ के वरिष्ठ पीरजादा तोहा सिद्दीकी का कुछ और ही कहना है. उन्होंने कहा- ‘सभी को गोहत्या के खिलाफ बने कानून का पालन करना चाहिए. कुर्बानी के दौरान गायों का वध नहीं किया जाना चाहिए. हालांकि, कानून हर जगह एक जैसा होना चाहिए. जहां एक ओर कुर्बानी के दौरान गोहत्या प्रतिबंधित है, वहीं दूसरी ओर देश के विभिन्न हिस्सों में गायों का वध किया जा रहा है और उनके मांस का बड़ी मात्रा में विदेशों में निर्यात किया जा रहा है. बंगाल को छोड़कर अन्य राज्यों में भी गोहत्या हो रही है. इसे भी रोका जाना चाहिए. क्योंकि देश में कानून एक ही है; यह बंगाल या पूरे भारत में अलग नहीं है. हमने बीफ़ खाना छोड़ दिया है. अगर हम बीफ़ नहीं खाएंगे तो क्या हम मर जाएंगे?’

हम केवल 1950 का कानून लागू कर रहे हैं: मंत्री अग्निमित्रा पॉल
हुमायूं कबीर के बयान पर पश्चिम बंगाल की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा- ‘हमारे राज्य में 1950 से नियम है. हम यह नहीं कह रहे हैं कि बीफ बिजनेस को बंद करना है. 1950 के नियम में सख्ती से लिखा है कि 14 साल से कम उम्र के मवेशी को काटा नहीं जा सकता है. जो मवेशी बिल्कुल ही अस्वस्थ है या अपाहिज है या ज्यादा उम्र का है उसको काटने के लिए संबंधित अधिकारी से सर्टिफिकेट लेना होगा. ये अलग बात है कि 1950 के कानून को यहां सख्ती से लागू नहीं किया गया था, क्योंकि पिछली सरकार वोटबैंक के चक्कर में ढिलाई बरते हुए थे. इस सरकार में ऐसा नहीं चलेगा, क्योंकि हम गाय को माता मानते हैं। 

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