ईंधन कीमतों पर बड़ा झटका संभव, IMF की रिपोर्ट ने दिए संकेत

मुंबई 

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और बढ़ती भू-राजनीतिक तनाव ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला दिया है। अब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की पहली डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर और मशहूर अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ (Gita Gopinath) ने भारत को लेकर बड़ी चेतावनी दी है। उनका कहना है कि अगर जून तक यह संघर्ष जारी रहा, तो कच्चे तेल की कीमतें 140 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। ऐसा हुआ तो भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम, महंगाई और आर्थिक दबाव तेजी से बढ़ सकते हैं। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक मध्य-पूर्व पर निर्भर है। ऐसे में ईरान युद्ध और हार्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) में सप्लाई रुकावट का सीधा असर भारत पर पड़ रहा है। गीता गोपीनाथ ने कहा कि यह सिर्फ महंगे तेल का मामला नहीं है, बल्कि अब सप्लाई शॉक की स्थिति बन रही है, यानी तेल, LPG, LNG और खाद की उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है। अगर सप्लाई चेन टूटती है, तो उसे सामान्य होने में 2 से 3 महीने तक लग सकते हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि मौजूदा हालात में कच्चा तेल 110 डॉलर से बढ़कर 140 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है। अगर ऐसा हुआ, तो भारत में ट्रांसपोर्ट, मैन्युफैक्चरिंग और खेती की लागत तेजी से बढ़ेगी। इसका असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। पेट्रोल-डीजल महंगा होगा, ट्रक किराया बढ़ेगा और रोजमर्रा की चीजें भी महंगी हो जाएंगी।

गीता गोपीनाथ का मानना है कि सरकार हमेशा लोगों को पूरी तरह राहत नहीं दे पाएगी। उन्होंने कहा कि कुछ बोझ सरकार उठाएगी, लेकिन कुछ कीमतों का असर जनता और कंपनियों को भी झेलना पड़ेगा, यानी आने वाले समय में पेट्रोल पंप पर कीमतें बढ़ सकती हैं। उन्होंने साफ कहा कि अब हम ऐसे दौर में प्रवेश कर रहे हैं, जहां महंगाई लगातार बढ़ सकती है।

रुपये की कमजोरी पर भी उन्होंने बड़ा बयान दिया। हाल के महीनों में रुपया डॉलर के मुकाबले 91 से गिरकर करीब 97 तक पहुंच गया है और बाजार में चर्चा है कि यह 100 के स्तर तक जा सकता है। लेकिन, गीता गोपीनाथ ने कहा कि असली चिंता सिर्फ रुपये का आंकड़ा नहीं है। उनके मुताबिक, कमजोर रुपया आयात कम करने में मदद करता है और यह आर्थिक संतुलन बनाने का एक तरीका है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर सरकार और RBI जरूरत से ज्यादा हस्तक्षेप करेंगे, तो देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ सकता है।

हालांकि, उन्होंने लोगों से घबराने की अपील नहीं की। उनका कहना है कि भारत की घरेलू मांग मजबूत है, इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च बढ़ रहा है और विदेशी मुद्रा भंडार भी अभी मजबूत स्थिति में है। लेकिन, अगर युद्ध लंबा खिंचता है और तेल 140 डॉलर पर टिक जाता है, तो यह सिर्फ भारत नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए बड़ा आर्थिक संकट बन सकता है।

एक्सपर्ट का मानना है कि आने वाले महीनों में सरकार को गरीब परिवारों और छोटे कारोबारियों के लिए राहत पैकेज, कैश ट्रांसफर और लोन सपोर्ट जैसे कदम उठाने पड़ सकते हैं। फिलहाल, सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पश्चिम एशिया का तनाव जल्द खत्म होगा या दुनिया को एक नए आर्थिक झटके का सामना करना पड़ेगा।

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