दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की बड़ी कार्रवाई, भट्टी मॉड्यूल से जुड़े 8 संदिग्ध गिरफ्तार

नई दिल्ली

 शहजाद भट्टी हाल के महीनों में ये नाम भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की जांच में बार-बार सामने आया है। इसका कथित तौर पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से संबंध है।

कभी पाकिस्तान के एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के तौर पर पहचाने जाने वाले भट्टी को अब एजेंसियां एक ऐसे डिजिटल नेटवर्क के पीछे का मुख्य चेहरा बता रही हैं, जिसका कथित तौर पर गैंगस्टर मॉड्यूल, युवाओं के कट्टरपंथीकरण, हथियारों की तस्करी और भारत में अशांति फैलाने की साजिश से जुड़ाव है।

आरोपियों के पास से हथियार और चोरी की बाइक बरामद
शनिवार को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने भट्टी के मॉड्यूल से जुड़े आठ संदिग्धों को गिरफ्तार किया, जो कथित तौर पर पूरे देश में बड़े हमलों की योजना बना रहे थे। स्पेशल कमिश्नर ऑफ पुलिस (स्पेशल सेल) अनिल शुक्ला ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि आरोपियों के पास से पाकिस्तान में बने चार हैंड ग्रेनेड, दो ग्लॉक पिस्तौल, 24 जिंदा कारतूस, एक चोरी की मोटरसाइकिल और एक चोरी का स्कूटर बरामद किया गया है।

आरोपियों में उत्तर प्रदेश से विजय उर्फ शूटर (23), झारखंड से नीतीश पासवान (23), महाराष्ट्र से तौकीर रिजवान अहमद शेख (27) और साजिद मेहबूब शेख उर्फ अरबाज खान (27), पंजाब से हरविंदर सिंह (28), गगनदीप सिंह (28) और मंजीत सिंह (23) और नेपाली नागरिक अनग कामी लामा (66) शामिल हैं।

यूपी एटीएस और एसटीएफ ने भी चार गुर्गों को किया गिरफ्तार
इस महीने की शुरुआत में उत्तर प्रदेश एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड (एटीएस) और स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने भी एक संयुक्त अभियान चलाया और भट्टी-आबिद जट्ट मॉड्यूल से जुड़े चार गुर्गों को गिरफ्तार किया।

भट्टी इस समय दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), उत्तर प्रदेश एटीएस, उत्तराखंड एसटीएफ और अन्य केंद्रीय एजेंसियों सहित कई एजेंसियों के लिए टॉप टारगेटों में से एक है।

इन्फ्लुएंसर से कैसे बना क्रिमिनल नेटवर्क का सरगना?
शाहजाद भट्टी मूल रूप से पाकिस्तान के पंजाब प्रांत का रहने वाला है। जहां एक ओर वह सोशल मीडिया पर खुद को एक व्यवसायी, समाज-सेवक और धार्मिक मुद्दों पर टिप्पणीकार के तौर पर पेश करता है, वहीं दूसरी ओर एजेंसियों का कहना है कि उसका आपराधिक रिकॉर्ड कुछ और ही कहानी बयां करता है।

पाकिस्तानी पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, 2013 में उसके खिलाफ चोरी और डकैती सहित कई मामले दर्ज किए गए थे, जिसके बाद बलात्कार जैसे गंभीर आरोप भी लगे। लगभग 2015 में वह पाकिस्तान से भागकर दुबई चला गया, जहां उसने डेयरी के कारोबार शुरू किए।

उस दौरान बताया जाता है कि वह बलूचिस्तान के फारूक खोखर गिरोह के संपर्क में आया और उसका एक प्रमुख सदस्य बन गया। भट्टी ने "333" नाम से अपनी ऑनलाइन पहचान बनाना भी शुरू कर दिया था, जिसके तहत वह भारत-पाकिस्तान संबंधों, धार्मिक मुद्दों और इन्फ्लुएंसर्स के बीच के विवादों पर वीडियो बनाता था।

उसे बड़ी संख्या में फॉलोअर्स मिले, लेकिन एजेंसियों का मानना है कि यह लोकप्रियता असल में एक बड़े नेटवर्क को खड़ा करने के लिए एक आड़ का काम कर रही थी।

आईएसआई से लिंक का आरोप
भारतीय एजेंसियों का दावा है कि भट्टी अकेले काम नहीं कर रहा है, बल्कि उसका संबंध पाकिस्तान की आईएसआई से है और उसे आबिद जट्ट, अजमल गुर्जर और यावर खान जैसे हैंडलर्स का समर्थन मिला हुआ है।

अधिकारियों का कहना है कि यह नेटवर्क फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए काम करता है। आरोप है कि यह भारत में कमजोर युवाओं की पहचान करता है, प्राइवेट मैसेजिंग के जरिए उनसे बातचीत शुरू करता है और फिर वीडियो कॉल के जरिए उन्हें भट्टी से जोड़ता है।

खबरों के अनुसार, इन लोगों को पैसों और सोशल मीडिया पर शोहरत दिलाने के वादों के जरिए, साथ ही हथियारों वाले वीडियो और विदेश में बसने के मौकों का लालच देकर फंसाया जाता है। शुरुआत में उन्हें छोटे-मोटे काम सौंपे जाते हैं जैसे कि किसी जगह की तस्वीरें या वीडियो शेयर करना और धीरे-धीरे उन्हें इस नेटवर्क के जाल में और भी गहराई तक खींच लिया जाता है।

पूरे भारत में बड़ी कार्रवाई जारी
नेटवर्क के सामने आने के बाद एजेंसियों ने मई के पहले हफ्ते में देशव्यापी स्तर पर एक बड़ा अभियान शुरू किया। 48 घंटे तक चले इस अभियान में दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों को शामिल किया गया।

सुरक्षा सूत्रों ने बताया कि एजेंसियां 500 से ज्यादा मोबाइल नंबरों और सोशल मीडिया अकाउंट्स को ट्रैक कर रही हैं। पंजाब के सीमावर्ती जिलों से 40 से ज्यादा संदिग्धों को हिरासत में लिया गया।
हरियाणा एसटीएफ ने करीब 90 युवकों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की।
दिल्ली में 20 से ज्यादा लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया गया, जहां उनमें से कुछ को समझाया-बुझाया गया और अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स डिलीट करने को कहा गया।
कुल मिलाकर, इस अभियान के तहत 481 संदिग्धों और अपराधियों को हिरासत में लिया गया।

तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान के लिंक्स
जांच में भट्टी के 'तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान' (TTH) नामक एक समूह से कथित संबंधों का भी खुलासा हुआ है। गिरफ्तार किए गए लोगों ने दिल्ली पुलिस को बताया कि उन्हें दिल्ली और फरीदाबाद की दीवारों पर 'TTH' लिखने का निर्देश दिया गया था।

उन्हें इसके नीचे "S" अक्षर लिखने का भी निर्देश दिया गया था, कथित तौर पर भट्टी की संलिप्तता का संकेत देने के लिए। एजेंसियों का कहना है कि इस गतिविधि को पाकिस्तान से मिली फंडिंग का समर्थन प्राप्त था।
पुलिसकर्मियों को निशाना बनाने की साजिश

   

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