TMC सांसद अभिषेक बनर्जी पर राहत राशि में अनियमितता के गंभीर आरोप, CID जांच भी तेज

पश्चिम बंगाल
पश्चिम बंगाल में सियासी घमासान के बीच भाजपा के एक नेता ने शनिवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और सांसद अभिषेक बनर्जी पर अम्फान चक्रवात राहत कोष में 200 करोड़ रुपये से अधिक की कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. भाजपा नेता अभिजीत दास बॉबी ने डायमंड हार्बर के बिष्णुपुर थाने में 17 पन्नों की शिकायत सौंपी. इस बीच पश्चिम बंगाल सीआईडी ने जाली हस्ताक्षर करने के मामले में अभिषेक बनर्जी को पूछताछ के लिए एक और नोटिस जारी किया है.

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2020 में आए सुपर साइक्लोन अम्फान के पीड़ितों के लिए जारी राहत राशि के वितरण में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां की गईं. इसमें डुप्लीकेट और संदिग्ध एंट्री, एक ही मोबाइल नंबर और बैंक खाते के जरिए कई लाभार्थियों को भुगतान और एक ही आवासीय भवन से कई लोगों को लाभार्थी दिखाने जैसे आरोप शामिल हैं. अभिजीत दास बॉबी ने कहा, 'आज की शिकायत में मैंने विशेष रूप से डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत बिष्णुपुर के दो ब्लॉकों का उल्लेख किया है, जहां लगभग 57 हजार लाभार्थियों के बीच 57.86 करोड़ रुपये वितरित किए गए थे.'

डायमंड हार्बर लोकसभा सीट से दो बार अभिषेक बनर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ चुके बॉबी ने आरोप लगाया कि राहत राशि का बड़ा हिस्सा कथित तौर पर तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व द्वारा हड़प लिया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय सांसद अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व में यह खेल हुआ और इसमें ब्लॉक विकास अधिकारियों (BDO) और तत्कालीन अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (विकास) सहित कई सरकारी अधिकारी भी शामिल थे.

2020 में आया था अम्फान चक्रवात
बता दें कि 20 मई 2020 को आए अम्फान चक्रवात ने पश्चिम बंगाल के कई जिलों में भारी तबाही मचाई थी. पूर्वी मेदिनीपुर और उत्तर एवं दक्षिण 24 परगना जिलों में व्यापक नुकसान हुआ था और 96 लोगों की मौत हुई थी. भाजपा नेता ने दावा किया कि पूरे डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के आंकड़ों के आधार पर करीब 238 करोड़ रुपये के राहत घोटाले की आशंका है. उन्होंने मामले की जांच के लिए एसआईटी (SIT) गठित करने की मांग की है. अभिजीत दास बॉबी ने कहा कि जल्द ही डायमंड हार्बर क्षेत्र के अन्य थानों में भी इसी तरह की शिकायतें दर्ज कराई जाएंगी. साथ ही उन्होंने पूरे खर्च का फॉरेंसिक ऑडिट कराने और प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जांच कराने की मांग की.

अभिषेक बनर्जी की भूमिका पर क्यों उठे सवाल?
शिकायत में कहा गया है कि सार्वजनिक राहत पोर्टल से डाउनलोड किए गए आधिकारिक दस्तावेजों में हजारों स्वीकृत आवेदनों के 'Recommended By' कॉलम में अभिषेक बनर्जी और उनके कार्यालय का नाम बार-बार दिखाई देता है.
इससे यह सवाल उठता है कि राहत वितरण प्रक्रिया में उनकी भूमिका कितनी व्यापक थी और क्या उनके कार्यालय से जारी सिफारिशों ने सामान्य प्रशासनिक और भौतिक सत्यापन प्रक्रिया को प्रभावित किया.

ममता बनर्जी सरकार ने अम्फान प्रभावित लोगों के लिए 6,250 करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा की थी और पीड़ितों के खातों में सीधे धनराशि भेजने का वादा किया था. इसके लिए अम्फान साइक्लोन राहत कोष भी बनाया गया था. वहीं केंद्र सरकार ने नेशनल डिजास्टर​ रिलीफ फंड (NDRF) से अम्फान राहत और पुनर्वास के लिए 3,077 करोड़ रुपये मंजूर किए थे. राज्य सरकार ने पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 20,000 रुपये और आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 5,000 रुपये की सहायता देने की व्यवस्था की थी.

हालांकि आरोप है कि घरों के पुनर्निर्माण के लिए जारी राशि का कुछ हिस्सा पंचायत प्रतिनिधियों और उनके करीबी लोगों के खातों में पहुंच गया. अम्फान राहत वितरण को लेकर वर्ष 2020 में राज्य के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन भी हुए थे. इसके बाद ममता सरकार ने तृणमूल से जुड़े कुछ पंचायत पदाधिकारियों को निलंबित किया था और सुधारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया था.

एक मोबाइल नंबर से कई लाभार्थियों को भुगतान
भाजपा नेता ने अपनी शिकायत में दावा किया है कि भ्रष्टाचार एक सुनियोजित और संस्थागत तंत्र के जरिए किया गया. उन्होंने ऐसे दस्तावेज भी संलग्न किए हैं, जिनमें कथित तौर पर एक ही मोबाइल नंबर का इस्तेमाल 14 लाभार्थियों के लिए किया गया और उन सभी को मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने के आधार पर 20-20 हजार रुपये दिए गए. इसके अलावा चार अन्य मोबाइल नंबरों के जरिए भी 6 से 9 लाभार्थियों को राहत राशि मिलने का आरोप लगाया गया है.

बॉबी ने कहा, 'एक ही मोबाइल नंबर का इस्तेमाल अलग-अलग गांवों के लाभार्थियों के लिए किया गया. ये सभी विसंगतियां सरकारी धन के दुरुपयोग की ओर इशारा करती हैं.' वहीं तृणमूल कांग्रेस के सूत्रों ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है. पार्टी के एक सूत्र ने कहा, 'यह हमारे नेता के खिलाफ भाजपा की राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई है. हम इसका कानूनी तरीके से मुकाबला करेंगे.'

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