नशे के खिलाफ निर्णायक जंग, DGP कैलाश मकवाणा ने रखा ड्रग फ्री MP का विजन

भोपाल 

मध्यप्रदेश पुलिस ने अगले तीन वर्षों में प्रदेश को "ड्रग फ्री मध्यप्रदेश" बनाने का बड़ा लक्ष्य तय किया है। इस दिशा में 15 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक पूरे प्रदेश में "नशे से दूरी है जरूरी 2.0" अभियान चलाया जाएगा। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) कैलाश मकवाणा ने पुलिस मुख्यालय भोपाल में आयोजित दो दिवसीय जोनल अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक एवं विशेष सशस्त्र बल (विसबल) जोनों की त्रैमासिक समीक्षा बैठक में अपराध नियंत्रण, न्यायालयीन प्रकरणों, पुलिस आधुनिकीकरण, मानव संसाधन प्रबंधन और प्रशासनिक सुधारों की विस्तृत समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सुशासन, जवाबदेही और प्रभावी पुलिसिंग के निर्देश दिए। 

AI आधारित 1 लाख कैमरों का नेटवर्क बनेगा
डीजीपी मकवाणा ने सेफगार्ड योजना के तहत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित लगभग एक लाख सीसीटीवी कैमरों का नेटवर्क विकसित करने के निर्देश दिए। यह नेटवर्क कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और अपराध नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही नवगठित जिलों मैहर, मऊगंज और पांढुर्णा में सीसीटीवी नेटवर्क विस्तार को प्राथमिकता देने के निर्देश भी दिए गए। 

स्कूल-कॉलेजों के आसपास बनेंगे ड्रग फ्री जोन
बैठक में निर्णय लिया गया कि शैक्षणिक संस्थानों के 500 मीटर के दायरे को चरणबद्ध तरीके से "ड्रग फ्री जोन" बनाया जाएगा। एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई, ड्रग हॉटस्पॉट क्षेत्रों की निगरानी और जन-जागरूकता अभियानों को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। 

लंबित न्यायालयीन मामलों के शीघ्र निराकरण पर जोर
डीजीपी ने उच्च न्यायालय सहित विभिन्न न्यायालयों में लंबित मामलों, अवमानना याचिकाओं, सेवा संबंधी विवादों और रिट याचिकाओं की नियमित समीक्षा कर समय-सीमा में जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से सतत मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने को कहा। बैठक में सभी कार्यालयीन कार्यों में ई-ऑफिस प्रणाली के शत-प्रतिशत उपयोग पर जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिकतम डिजिटल बनाया जाए और स्थानांतरित अधिकारियों-कर्मचारियों को समयबद्ध तरीके से भारमुक्त किया जाए। 

उत्कृष्ट पुलिसकर्मियों को मिलेगा सम्मान
डीजीपी ने उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पुरस्कृत करने तथा उनके नाम राज्य और राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कारों, विशेष रूप से के.एफ. रुस्तमजी पुरस्कार के लिए प्रस्तावित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अच्छे कार्यों को पहचान मिलना पुलिस बल के मनोबल और कार्य संस्कृति के लिए आवश्यक है। बैठक में बताया गया कि एनडीपीएस एक्ट के तहत पिछले छह महीनों में की गई कार्रवाई के दौरान 10 महत्वपूर्ण मामलों में लगभग 53 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति फ्रीज की गई है। इसके अलावा मादक पदार्थों के विनिष्टीकरण, चिन्हित अपराधियों पर कार्रवाई और बॉर्डर मीटिंग्स की समीक्षा भी की गई।

पुलिस कर्मियों के स्वास्थ्य पर विशेष फोकस
डीजीपी ने निर्देश दिए कि प्रत्येक जिले में पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के स्वास्थ्य संबंधी मामलों के त्वरित निराकरण के लिए जिला पुलिस अधीक्षक हर माह सिविल सर्जन के साथ बैठक करें। इसके लिए नोडल अधिकारी नियुक्त कर अस्पतालों के साथ एमओयू किए जाएंगे। 

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