ट्रेनों से ज्यादा कैमरों की गूंज, लखनऊ स्टेशन पर बॉलीवुड और ओटीटी का बढ़ता क्रेज

 गोंडा
जहाँ कभी सिर्फ ट्रेनों की सीटी और यात्रियों की भीड़ हुआ करती थी, आज वहाँ कैमरे घूमते हैं, स्पॉटब्वॉय दौड़ते हैं और बॉलीवुड के सितारे डायलॉग बोलते हैं। लखनऊ के रेलवे स्टेशन अब महज़ यात्रा का पड़ाव नहीं रहे, ये देश के उभरते फिल्मी मानचित्र पर एक चमकता हुआ नाम बन चुके हैं। पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल के आँकड़े बताते हैं कि 2017 से 2025 के बीच यहाँ के रेलवे परिसरों में 18 फिल्मों और वेब सीरीज की शूटिंग हो चुकी है। आयुष्मान खुराना से लेकर कार्तिक आर्यन तक, बॉलीवुड के तमाम चेहरे इन्हीं प्लेटफॉर्मों पर उतरे हैं। जब स्टेशन बन गया सेट

जब स्टेशन बन गया सेट
बात 2017 की है। बरेली की बर्फी की टीम लखनऊ सिटी रेलवे स्टेशन पहुँची और यहीं से शुरू हुआ यह सिलसिला। आयुष्मान खुराना, राजकुमार राव और कृति सैनन की इस फिल्म के बाद जैसे फिल्मकारों को अहसास हुआ कि लखनऊ के स्टेशनों में कुछ खास है। साल 2019 तक तो यह स्टेशन फिल्मों का पसंदीदा ठिकाना बन चुका था। जबरिया जोड़ी में सिद्धार्थ मल्होत्रा और परिणीति चोपड़ा लखनऊ सिटी स्टेशन पर नज़र आए। पति पत्नी और वो के लिए कार्तिक आर्यन, भूमि पेडनेकर और अनन्या पांडे ने लखनऊ जंक्शन को अपना सेट बनाया। फैमिली ऑफ ठाकुरगंज की शूटिंग ऐशबाग कोचिंग डिपो में हुई। हाल के वर्षों में मिशन मजनू, भैया जी, निकम्मा, कंट्रोल, कंजूस मक्खीचूस और सिंगल सलमा भी इस सूची में जुड़ गईं।

ओटीटी ने भी पहचाना लखनऊ का जादू
सिर्फ बड़े पर्दे की फिल्में ही नहीं, ओटीटी प्लेटफॉर्म के निर्माताओं ने भी लखनऊ के रेलवे परिसरों की ताकत को पहचाना है। दरअसल वेब सीरीज की शूटिंग के लिए ऐसी लोकेशन चाहिए होती है जो लंबे समय तक उपलब्ध रहे। जहाँ बड़े क्रू के साथ काम किया जा सके और जो कहानी के माहौल से मेल खाए। लखनऊ के रेलवे स्टेशन इन तीनों कसौटियों पर खरे उतरते हैं।

अमेज़न प्राइम की चर्चित थ्रिलर सीरीज ब्रीद इनटू द शैडोज़ के दूसरे सीजन के कई अहम दृश्य यहीं फिल्माए गए। इसी तरह अभिषेक बच्चन अभिनीत सीरीज इंस्पेक्टर अविनाश की कहानी का एक बड़ा हिस्सा लखनऊ के रेलवे परिसर की पृष्ठभूमि में बुना गया। सकारात्मक सामाजिक संदेश देने वाली सीरीज माई ने भी यहाँ की लोकेशन को अपनी कथा का हिस्सा बनाया। द उमेश क्रॉनिकल्स जैसे प्रोजेक्ट ने तो लखनऊ की गलियों और रेलवे स्टेशन को मिलाकर एक ऐसा विज़ुअल तैयार किया जो दर्शकों को सीधे शहर की रूह से जोड़ता है। यह महज़ संयोग नहीं है। ओटीटी निर्माता जानते हैं कि लखनऊ का रेलवे स्टेशन सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि एक किरदार है, जो हर सीरीज में अलग रंग ओढ़ लेता है।

शताब्दी वर्ष पर अनोखा तोहफा
लखनऊ जंक्शन इस साल अपनी स्थापना का 100वाँ साल यानी 1926 से 2026 पूरा कर रहा है। इस ऐतिहासिक मौके पर पूर्वोत्तर रेलवे ने एक दिलचस्प पहल की है। स्टेशन के कॉनकोर्स एरिया में एक बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाई गई है, जिस पर यहीं फिल्माए गए दृश्यों के क्लिप चलाए जा रहे हैं। यानी अब आप जिस प्लेटफॉर्म पर खड़े हैं,उसी जगह पर फिल्माए गए सीन उसी दीवार पर देख सकते हैं। ट्रेन का इंतज़ार अब थोड़ा और रोचक हो गया है। लखनऊ मंडल के जनसंपर्क अधिकारी महेश गुप्ता कहते हैं कि यह पहल यात्रियों को रेलवे की विरासत और फिल्म जगत से उसके जुड़ाव से परिचित कराने का प्रयास है।

आखिर क्यों चुनते हैं फिल्मकार लखनऊ को
इसका जवाब खुद इन स्टेशनों की बनावट में छुपा है। ब्रिटिशकालीन वास्तुकला, ऊँची छतें, विशाल हॉल और नवाबी शहर का वह खास मिज़ाज, यह सब मिलकर एक ऐसा माहौल बनाते हैं जो मुंबई के किसी स्टूडियो में नहीं मिलता। ऊपर से रेलवे प्रशासन का सहयोगी रवैया और अपेक्षाकृत किफायती शूटिंग की सुविधा, फिल्मकारों के लिए यह जगह स्वाभाविक पसंद बन जाती है। जिस रफ्तार से यह सिलसिला बढ़ रहा है, लगता है लखनऊ जंक्शन का अगला सौ साल सिर्फ ट्रेनों की नहीं, कैमरों की आवाजाही का भी गवाह बन गया है।

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