अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण: SIT की रिपोर्ट गृह विभाग को सौंपी गई

अयोध्या
अयोध्या के श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी (SIT) ने अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट में क्या है इस बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं दी गई है। बस इतना बताया गया है कि यह प्रारंभिक रिपोर्ट है। राममंदिर में कथित चढ़ावा चोरी का प्रकरण सामने आने के बाद ट्रस्ट के अनुरोध पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। एसआईटी को 15 दिन में जांच रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया था। अयोध्या में सात दिन की जांच के बाद मंगलवार को एसआईटी ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट सौंपी है। बताया जा रहा है कि करीब सवा सौ पन्नों की इस रिपोर्ट में कुछ सिफारिशें भी की गई हैं।

एसआईटी की जांच अभी जारी रहेगी। माना जा रहा है कि एसआईटी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपने के बाद वापस अयोध्या लौट जाएगी। लखनऊ के मंडलायुक्त और तीन सदस्यीय एसआईटी के प्रमुख विजय विश्वास पंत ने दोनों सदस्यों के साथ एसीएस होम को यह प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपी है। अभी तक जो तथ्य सामने आए हैं उनके आधार पर यह प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपी गई है। एसआईटी के सदस्यों ने रिपोर्ट के बारे में कुछ बताया नहीं है। बस इतना कहा गया है कि जांच की कार्यवाही अभी प्रचलित है। माना जा रहा है कि इस प्रारंभिक रिपोर्ट में कुछ अहम जानकारियां हो सकती है। एसआईटी इस मामले की जांच में लगातार जुटी हुई थी।
   
जारी है जांच, नए चेहरे रडार पर, चर्चा में कई नाम
चढ़ावा प्रकरण की प्रथम स्तर की जांच पूरी होने के बाद अब कुछ नए नामों की चर्चा तेज हो गई है, जो रामजन्मभूमि में कर्मचारी नहीं हैं फिर भी कहीं न कहीं उनका जुड़ाव ट्रस्ट के प्रभावशाली लोगों से रहा, जिसका फायदा भी उन्हें मिला। सूत्र बताते हैं कि अब उन लोगों ने भी एसआईटी पूछताछ कर सकती है। फिलहाल सोमवार को परिसर में एसआईटी के सभी अधिकारी उपस्थित नहीं थे, इसलिए ज्यादा लोगों से पूछताछ नहीं की गई है। कागजों की जांच-पड़ताल करने की जानकारी मिली है। माना जा रहा है किद मुख्यमंत्री को प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपने के बाद ही अधिकारी द्वितीय स्तर की जांच करने के लिए रामधाम पहुंचेंगे। एसआईटी सोमवार को पूरे मंदिर परिसर में नजर नहीं आई। उसका स्टाफ जरूर तथ्यों को जुटाने में लगा रहा।

धातुओं के मंदिर में इस्तेमाल, भंडारण जांच भी जद में
चढ़ावे की रकम के बाद दान में दी गई धातुओं के सही इस्तेमाल होने या न होने का शक, फिर मंदिर निर्माण में कमीशन लेने का आरोप, यह विषय इस तरह के हैं, जिससे कहा जा सकता है कि जांच की निर्धारित अवधि पर्याप्त नहीं है। एसआईटी के गठन के समय आरोप केवल मंदिर पर चढ़ावे की रकम में हेरफेर का था, इसके बाद जांच प्रक्रिया शुरू होने के साथ आरोपों की संख्या बढ़ती चली गई और मामला बड़ा हो गया। हालांकि, प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार है और माना जा रहा है, जिसमें चढ़ावे की रकम को प्रमुखता दी गई है। सूत्र बताते हैं कि प्रमुख आरोपियों से पूछताछ और मानक के विपरीत कार्य करने को आधार बनाया गया है। जांच में नोटों की गिनती और धातुओं को रखने के दौरान जिस प्रकार की सुरक्षा व्यवस्था होनी चाहिए, वह नहीं की गई। मामले में हर स्तर पर गलतियां उजागर हुई हैं।

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