Modi Cabinet Expansion: दल बदलकर आए सांसदों की लग सकती है लॉटरी, जानें किस पर गिर सकती है गाज

नई दिल्ली

कैबिनेट फेरबदल का ऐलान मंगलवार को हो सकता है। हालांकि, केंद्र सरकार की तरफ से तारीख को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरे से भारत लौटने के बाद मंत्री परिषद में बदलाव किए जा सकते हैं। इस दौरान सबसे ज्यादा चर्चा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के नाम की है। फिलहाल, साफ नहीं हो सका है कि उन्हें लेकर NDA की तरफ से क्या फैसला लिया जाएगा।

खास बात है इस बार कैबिनेट फेरबदल में हाल ही में पार्टियों की टूट के बाद NDA को समर्थन देने वाले नेताओं को भी जगह दी जा सकती है। हाल ही में तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव बालासाहब ठाकरे) और आम आदमी पार्टी के सांसदों ने एनडीए को समर्थन दिया था।

मंत्रिमंडल में फेरबदल की तारीख प्रधानमंत्री के व्यस्त कार्यक्रम को ध्यान में रखकर तय किए जाने की संभावना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27 से 29 जून तक सेशेल्स की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं। वह 6 से 11 जुलाई के बीच तीन देशों की यात्रा कर सकते हैं, जिनमें इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल है। वहीं जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची भी भारत दौरे पर आ रहीं हैं और यह कार्यक्रम 1 से 3 जुलाई का है।

अब संसद का मॉनसून सत्र 18 जुलाई से शुरू हो रहा है, जो अगस्त तक चलेगा। ऐसे में अटकलें तेज हैं कि मंगलवार को बड़ी घोषणा की जा सकती है। साल 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद यह पहली बार फेरबदल होगा।

मानसून सत्र से पहले हो सकता है कैबिनेट फेरबदल
संसद का मानसून सत्र आम तौर पर जुलाई के तीसरे सप्ताह में शुरू होता है। मंत्रिमंडल में फेरबदल की तारीख प्रधानमंत्री के व्यस्त कार्यक्रम को ध्यान में रखकर तय किए जाने की संभावना है। प्रधानमंत्री मोदी 27 से 29 जून तक सेशेल्स की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं। उनके छह से 11 जुलाई के बीच इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जाने की भी संभावना है। जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची का भी एक से तीन जुलाई तक नयी दिल्ली की यात्रा का कार्यक्रम है।

पार्टी संगठन पर भी फोकस
सूत्रों के अनुसार, सरकार के शीर्ष अधिकारियों के बीच यह राय प्रबल हो रही है कि अहम मंत्रालयों में नए चेहरों को शामिल किए जाने की आवश्यकता है। इसके अलावा क्षेत्रीय, राज्यवार, जातीय और राजनीतिक निष्ठा से जुड़े समीकरणों को ध्यान में रखकर मंत्रिपरिषद में संतुलन बनाने की राजनीतिक मजबूरियां भी हैं। दो केंद्रीय मंत्रियों पंकज चौधरी और हर्ष मल्होत्रा को क्रमशः बीजेपी की उत्तर प्रदेश और दिल्ली इकाई की जिम्मेदारी पहले ही दी जा चुकी है।
'एक व्यक्ति एक पद' का नियम होगा लागू
इस बात की प्रबल संभावना है कि बीजेपी ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के अपने नियम का पालन करेगी जिसके कारण दोनों को सरकार से हटना पड़ सकता है। दो अन्य केंद्रीय मंत्रियों जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू को हाल में संपन्न राज्यसभा चुनावों के लिए पार्टी ने दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया। उच्च सदन में उनका कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो गया। कुरियन अपने पद से पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं जबकि बिट्टू अब भी मंत्री हैं।

रवनीत सिंह बिट्टू को लेकर चल रही ये चर्चा
ऐसा बताया जा रहा है कि शीर्ष नेतृत्व ने बिट्टू को आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा है। कांग्रेस के पूर्व नेता और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पौत्र बिट्टू प्रभावशाली जाट सिख समुदाय का प्रमुख चेहरा हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं इसलिए इन तीन राज्यों के और प्रतिनिधियों को मोदी मंत्रिपरिषद में जगह मिलने की संभावना है। पश्चिम बंगाल में बीजेपी की भारी जीत के बाद राज्य से भी पार्टी के कुछ सांसदों को केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल किया जा सकता है।

TMC, शिवसेना-UBT, AAP से आए MPs को मिल सकता है मौका
तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के बागी गुटों के कुछ प्रतिनिधियों को भी मंत्री पद मिलने की संभावना है। ऐसी भी संभावना है कि शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के किसी वरिष्ठ पदाधिकारी को कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है। सूत्रों ने बताया कि आम आदमी पार्टी (आप) छोड़कर भाजपा में शामिल हुए सात राज्यसभा सदस्यों में से एक या दो को मंत्रिपरिषद में जगह मिल सकती है।

हालांकि, तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (उबाठा) के बागी गुटों के सदस्यों को मंत्रिपरिषद में शामिल करने का कोई भी फैसला लोकसभा अध्यक्ष के निर्णय पर निर्भर करेगा। दोनों के मूल दलों ने दल-बदल विरोधी कानून के तहत उनकी सदस्यता समाप्त करने की मांग की है।

राष्ट्रपति से मिले पीएम मोदी, तभी से शुरू हुई चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी की 23 जून को राष्ट्रपति भवन में पद्म पुरस्कार समारोह के इतर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के बाद मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलें तेज हो गईं। इसके दो दिन बाद 25 जून को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की राष्ट्रपति से मुलाकात से इन अटकलों को और बल मिला। अधिकारियों ने इन मुलाकातों को शिष्टाचार भेंट बताया और कहा कि दोनों नेता नियमित अंतराल पर राष्ट्रपति से मिलते रहते हैं। हालांकि, इस बात की प्रबल संभावना है कि प्रधानमंत्री की राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान मंत्रिमंडल में फेरबदल के मुद्दे पर भी चर्चा हुई होगी।

हरदीप पुरी और बीएल वर्मा को लेकर भी अपडेट
दो केंद्रीय मंत्रियों हरदीप पुरी और बी एल वर्मा का राज्यसभा में कार्यकाल नवंबर में समाप्त होगा। अब यह देखना होगा कि उच्च सदन के लिए उन्हें फिर से उम्मीदवार बनाए जाने के संबंध में शीर्ष नेतृत्व क्या फैसला करता है। तीन राज्यपालों-कर्नाटक के थावर चंद गहलोत, मध्य प्रदेश के मंगुभाई पटेल और उत्तराखंड के लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह-का कार्यकाल आने वाले महीनों में पूरा होने वाला है।

गहलोत और पटेल का कार्यकाल जुलाई में तथा सिंह का कार्यकाल सितंबर में पूरा होगा। सरकार से हटाए जाने वाले कुछ मंत्रियों को राज्यपाल पद की जिम्मेदारी दिए जाने की भी संभावना है। हालांकि, जानकार हलकों का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी बड़े फैसलों को अंतिम समय तक गोपनीय रखते हैं और औपचारिक घोषणा होने पर ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।

कौन हो सकता है शामिल
अब तक यह साफ नहीं है कि कैबिनेट फेरबदल में किसे मौका मिलने जा रहा है। अटकलें हैं कि नए सदस्यों में भाजपा सांसद अरुण गोविल, शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे, पूर्व RBI गवर्नर शक्तिकांत दास, बिहार के पूर्व CM नीतीश कुमार, संजय दीना पाटिल, वीडी शर्मा, तरुण चुघ, राघव चड्ढा को शामिल किया जा सकता है।

इनका कट सकता है नाम
कहा जा रहा है कि धर्मेंद्र प्रधान, रवनीत सिंह बिट्टू और हरदीप सिंह पुरी को बदला जा सकता है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इसे लेकर कुछ नहीं कहा गया है। संभव है कि इन मंत्रियों के विभाग भी बदले जा सकते हैं। साथ ही मंत्री बीएल वर्मा का भी राज्यसभा कार्यकाल नवंबर में समाप्त हो रहा है। कहा यह भी जा रहा है कि 6 राज्यमंत्री भी बदले जा सकते हैं। इनके अलावा मनोहर लाल खट्टर और निर्मला सीतारमण के विभाग बदले जा सकते हैं।

संतुलन बनाने की कोशिश
एजेंसी भाषा के सूत्रों के अनुसार, सरकार के शीर्ष अधिकारियों के बीच यह राय प्रबल हो रही है कि अहम मंत्रालयों में नए चेहरों को शामिल किए जाने की आवश्यकता है। इसके अलावा क्षेत्रीय, राज्यवार, जातीय और राजनीतिक निष्ठा से जुड़े समीकरणों को ध्यान में रखकर मंत्रिपरिषद में संतुलन बनाने की राजनीतिक मजबूरियां भी हैं।

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