जब सफेद झंडे के बीच हुई बातचीत, फिर भारत ने प्वाइंट 5465 पर लहराया तिरंगा; कारगिल की दिलचस्प कहानी

 कारगिल
 कारगिल युद्ध का नाम आते ही दिमाग में तोपों की गर्जना, बर्फ से ढकी दुर्गम चोटियां और भारतीय सैनिकों की अदम्य वीरता की तस्वीर उभरती है. 1999 की गर्मियों में भारत और पाकिस्तान के बीच 85 दिनों तक चली इस लड़ाई ने दोनों देशों के रिश्तों का एक ऐसा अध्याय लिखा, जिसे आज भी साहस और बलिदान की मिसाल माना जाता है. 26 जुलाई 1999 को भारतीय सेना ने पाकिस्तानी घुसपैठियों को कारगिल की ऊंचाइयों से खदेड़कर विजय हासिल की. लेकिन, इस भीषण युद्ध के बीच एक ऐसा पल भी आया, जब कुछ मिनटों के लिए बंदूकें खामोश हुईं, सफेद झंडा लहराया गया और दो दुश्मन सैनिकों ने एक-दूसरे के साथ सिगरेट और चॉकलेट शेयर की। 

यह कहानी है भारतीय सेना के सेवानिवृत्त कर्नल राजिंदर कुमार शर्मा की, जो उस समय युवा लेफ्टिनेंट थे. उनके सैन्य जीवन के इस अनोखे अनुभव का जिक्र उनके बेटों द्वारा लिखी गई पुस्तक ‘शूरवीर’ में किया गया है. ये सभी बातें इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने एक रिपोर्ट में छापी है। 

17 हजार फीट पर आमना-सामना
जून 1999 में 22 ग्रेनेडियर्स की टुकड़ी प्वाइंट 5465 की ओर बढ़ रही थी. करीब 17 हजार फीट की ऊंचाई पर लेफ्टिनेंट राजिंदर शर्मा अपनी छोटी टीम के साथ आगे बढ़ रहे थे. तभी पास की पहाड़ी पर जमे पाकिस्तानी सैनिकों ने फायरिंग शुरू कर दी. शर्मा ने पहले से ही रणनीतिक तैयारी कर रखी थी. उन्होंने अपने जवानों और हथियारों की ऐसी तैनाती की थी कि जवाबी हमला सीधे पाकिस्तानी बंकरों पर पड़े. कुछ ही मिनटों में भारतीय सेना की जवाबी कार्रवाई इतनी सटीक और तेज थी कि दुश्मन के बंकरों में अफरा-तफरी मच गई. तभी अचानक एक पाकिस्तानी बंकर के पीछे से सफेद झंडा दिखाई दिया. युद्ध के नियमों में इसका मतलब होता है कि सामने वाला पक्ष बातचीत के लिए फायरिंग रोकने की अपील कर रहा है। 

जब भारतीय अफसर अकेले दुश्मन के पास पहुंच गया
भारतीय सैनिकों ने अपने अधिकारी को चेताया कि पाकिस्तानियों पर भरोसा नहीं किया जा सकता. लेकिन लेफ्टिनेंट शर्मा ने हालात का आकलन किया और बातचीत के लिए आगे बढ़ने का फैसला किया. मुश्किल यह थी कि भारतीय दल के पास सफेद झंडा था ही नहीं. तभी लांस नायक तुला राम ने अपनी सफेद बनियान उतारी और उसे INSAS राइफल की नाल पर बांधकर अस्थायी सफेद झंडा बना दिया. इसके बाद शर्मा दुश्मन की ओर बढ़े. कुछ दूरी पर पाकिस्तानी सैनिकों ने कहा कि सिर्फ एक अधिकारी आगे आए. तब शर्मा अकेले लगभग 150 मीटर ऊपर चढ़कर पाकिस्तानी अधिकारी मेजर जावेद से मिले। 

सिगरेट, चॉकलेट और सैनिकों की बातचीत
मेजर जावेद ने बातचीत की शुरुआत करते हुए कहा कि उनके जवानों को भारी नुकसान हुआ है और पूछा कि भारतीय सेना ने फायरिंग क्यों की. शर्मा ने साफ जवाब दिया कि पहले गोली पाकिस्तान की ओर से चली थी, भारतीय सेना ने सिर्फ जवाब दिया. तनाव के उस माहौल में अचानक जावेद ने अपनी जेब से सिगरेट निकाली और शर्मा को पेश की. दोनों अधिकारियों ने कुछ मिनट तक साथ बैठकर सिगरेट पी. बातचीत के दौरान शर्मा ने स्पष्ट कहा कि यह इलाका भारतीय सीमा में है और पाकिस्तानी सैनिकों को यहां से पीछे हटना चाहिए। 

मेजर जावेद ने कहा कि वह भारत का संदेश अपने मुख्यालय तक पहुंचाएंगे. उन्होंने यह भी कहा कि वह सिर्फ आदेशों का पालन कर रहे हैं. जवाब में शर्मा ने भी साफ कर दिया कि यदि आगे बढ़ते समय भारतीय सैनिकों पर फिर हमला हुआ तो जवाब पहले से भी ज्यादा कड़ा होगा. बातचीत खत्म होने लगी तो जावेद ने उन्हें अपनी सिगरेट का पैकेट दे दिया. बदले में शर्मा ने अपनी जेब से कैडबरी चॉकलेट बार निकाला और जावेद को दे दिया. कुछ मिनट पहले तक एक-दूसरे पर गोलियां चलाने वाले दोनों अधिकारी फिर अपनी-अपनी चौकियों की ओर लौट गए। 

शाम तक फतह कर लिया प्वाइंट 5465
बातचीत खत्म होते ही भारतीय टुकड़ी ने फिर आगे बढ़ना शुरू किया. दुश्मन की गोलियों, बारूदी सुरंगों और बेहद कठिन पहाड़ी रास्तों के बीच 22 ग्रेनेडियर्स ने शाम होने से पहले प्वाइंट 5465 पर कब्जा कर लिया. यह जीत इसलिए भी खास थी क्योंकि यह बटालियन रेगिस्तानी इलाके में युद्धाभ्यास करने वाली यूनिट थी. हैदराबाद की 40 डिग्री गर्मी से सीधे शून्य से नीचे तापमान वाले कारगिल में पहुंची इस टुकड़ी को ऊंचाई के हिसाब से खुद को ढालने का भी ज्यादा समय नहीं मिला था. इसके बावजूद जवानों ने असाधारण साहस का परिचय दिया। 

चोटी पर कब्जा करने के बाद जवानों को याद आया कि उनके अधिकारी ने जीत के बाद साथ में सिगरेट पीने का वादा किया था. तब कर्नल शर्मा ने वही पाकिस्तानी सिगरेट अपने सैनिकों में बांटी. एक जवान मुस्कुराते हुए बोला, “साहब, यह तो नहीं बताया था कि जीत के बाद पाकिस्तानी सिगरेट मिलेगी। 

भारत के बेटे झुकना नहीं जानते
आज 60 वर्ष के हो चुके कर्नल राजिंदर कुमार शर्मा को उनकी वीरता के लिए कीर्ति चक्र, शौर्य चक्र और सेना मेडल से सम्मानित किया जा चुका है. उनका मानना है कि कारगिल युद्ध केवल एक सैन्य संघर्ष नहीं था, बल्कि दुनिया के लिए एक संदेश था. उनके शब्दों में- कारगिल सिर्फ एक युद्ध नहीं था, यह संदेश था कि भारत के बेटे मर सकते हैं, लेकिन कभी झुक नहीं सकते. 26 साल बाद भी अगर दुश्मन दोबारा ऐसी गलती करेगा, तो उसे फिर कारगिल जैसा जवाब मिलेगा। 

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