भारत-पाक चिट्ठी विवाद गरमाया, PM मोदी और शहबाज को पत्र लिखने वालों पर BJP हुई हमलावर

 नई दिल्ली

भारत और पाकिस्तान के बीच फिर से शांति और कूटनीतिक संबंध बहाल करने की मांग को लेकर एक नया सियासी बवाल खड़ा हो गया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला, पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती और आरजेडी सांसद मनोज झा समेत 100 से अधिक भारतीय और पाकिस्तानी नेताओं व सिविल सोसाइटी के सदस्यों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ को एक खुला पत्र लिखा है।

हालांकि, इस चिट्ठी के सामने आते ही सत्तारूढ़ बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और इन नेताओं को 'आतंकी समर्थक' करार दिया है। इस अपील का समन्वय नई दिल्ली स्थित थिंक टैंक 'सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस' के प्रमुख ओ.पी. शाह ने किया है। चिट्ठी में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों से दक्षिण एशिया में शांति, बातचीत और सहयोग की बहाली के लिए सार्थक कदम उठाने का आग्रह किया गया है।

चिट्ठी में की गई हैं ये मुख्य मांगें

  • पत्र में दोनों देशों के बीच संबंधों को सुधारने के लिए कई अहम कदम उठाने की वकालत की गई है।
  •     पूर्ण कूटनीतिक संबंधों को फिर से बहाल करना और नई दिल्ली व इस्लामाबाद में उच्चायुक्तों की दोबारा नियुक्ति करना।
  •     सामान्य वीजा सेवाओं को फिर से शुरू करना और जम्मू-कश्मीर समेत सभी लंबित मुद्दों पर व्यापक द्विपक्षीय बातचीत शुरू करना।
  •     2004-2007 के कश्मीर फ्रेमवर्क पर पुनर्विचार करते हुए दोनों देशों की सुरक्षा चिंताओं को दूर करते हुए सैन्य वापसी।
  •     साथ ही व्यापार और यात्रा के लिए अटारी-वाघा बॉर्डर को फिर से खोलना।
  •     श्रीनगर-मुजफ्फराबाद बस सेवा, लाहौर-दिल्ली बस सेवा, समझौता एक्सप्रेस और थार एक्सप्रेस को फिर से शुरू करना।
  •     कारगिल-स्कर्दू मार्ग पर यात्रा की अनुमति देना।
  •     कमर्शियल उड़ानों के लिए दोनों देशों का हवाई क्षेत्र फिर से खोलना और मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) का दर्जा वापस देना।
  •     करतारपुर साहिब कॉरिडोर और नीलम घाटी (पाकिस्तान) स्थित शारदा पीठ को फिर से खोलना। मीडिया और पत्रकारों पर लगे प्रतिबंधों में ढील देना।

किन प्रमुख चेहरों ने किए हस्ताक्षर?
भारत से फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, मनोज झा, अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक, पूर्व रॉ चीफ ए.एस. दुलत, मणिशंकर अय्यर, हुमायूं कबीर, जवाहर सरकार, मोहम्मद यूसुफ तारिगामी, प्रो. सैफुद्दीन सोज और प्रो. अपूर्वानंद आदि ने इस पर साइन किए हैं।

पाकिस्तान से पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी, पूर्व राजदूत अशरफ जहांगीर काजी, शिक्षाविद परवेज हुदभॉय, पूर्व सीनेटर फरहतुल्लाह बाबर, बीना सरवर, सलीमा हाशमी और ए.एच. नय्यर आदि ने साइन किए हैं।

' पहले आतंकियों का समर्थन बंद करे पाकिस्तान'
प्रेम शुक्ला ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पदाधिकारियों के 'पाकिस्तान से संवाद' वाले बयान पर साफ कहा, 'पाकिस्तान आतंकवादियों का समर्थन करना बंद कर दे तो बातचीत शुरू हो जाएगी.' हाल ही में RSS के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने कहा था कि भारत को 'पाकिस्तान के साथ संवाद के दरवाज़े पूरी तरह बंद नहीं करने चाहिएं.' हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि आतंकवाद के प्रति कड़े रुख में कोई नरमी नहीं बरतनी चाहिए। 

भारत-पाक के 117 प्रमुख लोगों ने लिखा ओपन लेटर
भारत-पाक के बीच पूर्ण राजनयिक संबंध बहाल करने और लोगों के आपसी संपर्क फिर शुरू करने की मांग को लेकर भारत और पाकिस्तान के 117 प्रमुख लोगों ने संयुक्त शांति प्रस्ताव के तहत पत्र पर साइन किया है. इसमें भारत की ओर से फारूक अब्दुल्ला, मीरवाइज उमर फारूक, महबूबा मुफ्ती, मनोज झा और हुमायूं कबीर समेत 61 हस्ताक्षरकर्ता शामिल हैं. डिजिटल फॉर्मेट पर नेताओं ने हस्ताक्षर किया है। 

सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस की ओर से पीएम मोदी और शहबाज शरीफ को लिखे गए ओपन लेटर में भारत-पाक के बीच बातचीत, पूर्ण राजनयिक संबंध बहाल करने और लोगों के आपसी संपर्क फिर शुरू करने की मांग की है. साथ ही धार्मिक और सांस्कृतिक आवाजाही को बढ़ावा देने की भी अपील की गई है। 

ये रहे 61 भारतीय जिन्होंने लेटर पर साइन किए हैं- 

क्रमांक साइन करने वाले भारतीयों के नाम
1. डॉ. फारूक अब्दुल्ला
2. मीरवाइज उमर फारूक
3. महबूबा मुफ्ती
4. मणिशंकर अय्यर
5. प्रो. मनोज झा
6. ए.एस. दुलत
7. जवाहर सरकार
8. मोहम्मद यूसुफ तारिगामी
9. आगा सैयद हसन मोसावी
10. शाहिद सिद्दीकी
11. रीता मनचंदा
12. संदीप पांडे
13. प्रो. सैफुद्दीन सोज़
14. आगा सैयद मुंतज़िर मेहदी
15. इमरान अहमद हसन
16. डॉ. जॉन दयाल
17. ललिता रामदास
18. हुमायूं कबीर
19. जयंत घोषाल
20. प्रो. अपूर्वानंद
21. मुजफ्फर शाह
22. दया सिंह
23. एम.एम. अंसारी
24. डॉ. फुआद अली हलीम
25. जफर मिन्हास
26. बिलाल गनी लोन
27. अरविंद सहारन
28. आई.डी. खजूरिया
29. बी.एल. सराफ
30. फादर सुनील रोसारियो
31. सैयद इरफान शेर
32. डॉ. मुस्लिम जान
33. गोपा मुखर्जी
34. डॉ. रमेश रैना
35. कुमार प्रशांत
36. एन.डी. पंचोली
37. प्रह्लाद गोयनका
38. सुभाष कालरा
39. रीता चक्रवर्ती
40. रूबी अरुण
41. के.एस. सुब्रमण्यम
42. सज्जाद अजहर
43. बलकार सिंह
44. सैयद सलीम गिलानी
45. बिमल शर्मा
46. मालती सुब्रमण्यम
47. अनिल हेब्बार
48. अमिताव दत्ता
49. डॉ. सुनीलम
50. सलीम इंजीनियर
51. सुजादा बशीर
52. बिन्नी यादव
53. रुमान मेक्की
54. तौसीफ अहमद खान
55. संतोष खजूरिया
56. एडवोकेट यासमीन
57. राकेश यादव
58. कुणाल बनर्जी
59. रोहिणी सिंह
60. सुनील वट्टल
61. ओ.पी. शाह

मीरवाइज ने किया बचाव- जब अमेरिका-ईरान बात कर सकते हैं, तो हम क्यों नहीं?

अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक ने इस अपील का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि अगर संघर्ष के बाद अमेरिका और ईरान बातचीत की मेज पर लौट सकते हैं, तो भारत और पाकिस्तान को भी संवाद करना चाहिए। उनका तर्क है कि युद्ध से विवाद हल नहीं होते, केवल बातचीत ही कश्मीर समेत अन्य लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों का समाधान कर सकती है।

 बीजेपी का करारा प्रहार- 'शहीदों का अपमान कर रहे हैं ये नेता'

इस कदम के बाद बीजेपी ने हस्ताक्षरकर्ताओं पर करारा हमला बोला है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इन नेताओं को 'आतंक का समर्थक' बताते हुए इनकी टाइमिंग पर सवाल उठाए। पूनावाला ने कहा कि यह अपील ऐसे समय में आई है जब 'पहलगाम आतंकी हमले' के बाद भारत आतंकवाद के खिलाफ बेहद सख्त नीति अपना रहा है।

उन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने साफ कर दिया है कि वह आतंकियों और उन्हें पनाह देने वालों के बीच कोई फर्क नहीं करेगा। पूनावाला ने सिंधु जल समझौते को स्थगित रखने के भारत के फैसले को याद दिलाते हुए कहा कि 'नया भारत' आतंकवाद का मुंहतोड़ जवाब देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सेना और आतंक के पीड़ितों के साथ खड़े होने के बजाय, ये नेता बार-बार पाकिस्तान के साथ बातचीत की वकालत कर रहे हैं। बीजेपी प्रवक्ता ने तंज कसते हुए कहा, "ये वही लोग हैं जिन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयरस्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर पर सवाल उठाए थे। इनका यह नया कदम देश के शहीदों और सशस्त्र बलों का सीधा अपमान है।"

 

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