नई दिल्ली
भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर जल्दी ही सहमति बन सकती है। बताया जा रहा है कि यह फाइनल स्टेज में है। इससे पहले अमेरिका की ओर से भारतीय उद्योग जगत के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर आई है। अमेरिका ने अपनी उस पाबंदी सूची से चार भारतीय कंपनियों के नाम हटा दिए हैं, जिन पर रूस के सैन्य-औद्योगिक क्षेत्र को उन्नत तकनीक और उपकरण सप्लाई करने के आरोप लगे थे।
अमेरिकी वित्त विभाग ने मंगलवार को इस फैसले की घोषणा की। इन कंपनियों को अमेरिकी विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) की विशेष रूप से नामित नागरिकों और अवरुद्ध व्यक्तियों (SDN) की सूची से पूरी तरह बाहर कर दिया गया है।
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कौन सी हैं ये 4 भारतीय कंपनियां?
प्रतिबंधों की सूची से हटाए गए नामों में दो कंपनियां हैदराबाद की, एक अहमदाबाद की और एक नई दिल्ली की है। इन चारों के नाम इस प्रकार हैं:
आरआरजी इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (हैदराबाद)
लोकेश मशीन्स लिमिटेड (हैदराबाद)
गैलेक्सी बियरिंग्स लिमिटेड (अहमदाबाद)
शौर्य एयरोनॉटिक्स प्राइवेट लिमिटेड (नई दिल्ली)
इन कंपनियों पर क्या थे आरोप?
साल 2024 में अमेरिका ने रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों को दरकिनार करने के आरोप में इन कंपनियों पर पाबंदियां लगाई थीं। अमेरिकी प्रशासन का दावा था कि ये कंपनियां रूस को दोहरे उपयोग वाले सामान और तकनीक भेज रही थीं, जिनका इस्तेमाल नागरिक और सैन्य दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।
गैलेक्सी बियरिंग्स लिमिटेड: अक्टूबर 2024 में इस कंपनी पर आरोप लगा था कि उसने रूसी संस्थाओं को रोलर बियरिंग्स और रोलर असेंबली जैसे दर्जनों संवेदनशील सामान निर्यात किए थे।
शौर्य एयरोनॉटिक्स प्राइवेट लिमिटेड: इस कंपनी पर रूस को रडार उपकरण, रेडियो नेविगेशन सहायता उपकरण, रेडियो रिमोट कंट्रोल सिस्टम और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भेजने का आरोप था।
आरआरजी इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजीज: अमेरिका ने आरोप लगाया था कि इस कंपनी ने ब्लैकलिस्टेड रूसी फर्म आर्टेक्स लिमिटेड को माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक की 100 से अधिक खेप भेजी थीं।
लोकेश मशीन्स लिमिटेड: इस कंपनी पर विभिन्न रूसी मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को दर्जनों मशीन टूल्स निर्यात करने का आरोप लगाया गया था।
क्या हैं इस फैसले के मायने?
अमेरिकी सरकार ने फिलहाल इन कंपनियों को सूची से हटाने की कोई आधिकारिक वजह स्पष्ट नहीं की है। हालांकि, माना जा रहा है कि भारत सरकार द्वारा लगातार अमेरिकी प्रशासन के साथ किए गए कूटनीतिक संवाद और भारतीय कंपनियों द्वारा निर्यात नियमों के कड़ाई से पालन के आश्वासनों के बाद यह कदम उठाया गया है।
कंपनियों के लिए बड़ी राहत
अमेरिकी प्रतिबंधों की सूची में होने के कारण इन कंपनियों के वैश्विक व्यापार, बैंक लेनदेन और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर पूरी तरह रोक लग गई थी। ऐसा इसलिए क्योंकि वैश्विक वित्तीय प्रणालियां काफी हद तक अमेरिकी डॉलर और वहां के नियमों से जुड़ी हैं। अब पाबंदियां हटने के बाद ये कंपनियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामान्य रूप से अपना बिजनेस दोबारा शुरू कर सकेंगी।
