मध्य प्रदेश का बैतूल बनेगा Green Model, 100 करोड़ की योजना सफल रही तो पूरे देश में होगी लागू

बैतूल
बैतूल में विकास और पर्यावरण संरक्षण को लेकर 100 करोड़ रुपए का ‘लैंडस्केप प्रोजेक्ट’ तैयार हो रहा है। इस परियोजना में पहली बार जंगल, वन्यजीव, जल, जैव विविधता और वन अधिकार पाने वाले हजारों परिवारों को एक ही विकास मॉडल में शामिल किया जाएगा।

यदि यह प्रयोग सफल रहा तो इसे देशभर के लिए मॉडल बनाया जा सकता है। अभी तक जंगलों का प्रबंधन अलग-अलग वन मंडलों के हिसाब से होता है, लेकिन इस परियोजना में पूरे सतपुड़ा से मेलघाट तक फैले जंगल, वन्यजीवों के कॉरिडोर, नदियां, गांव, खेती और वनाधिकार वाले क्षेत्रों को एक इकाई मानकर योजना बनाई जाएगी। यानी जंगल और गांव को अलग-अलग नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक के रूप में देखा जाएगा।

एक ओर जंगलों के संरक्षण की जरूरत है, तो दूसरी ओर वन अधिकार अधिनियम के तहत हजारों परिवारों को जंगलों के आसपास रहने और आजीविका का अधिकार मिला है। अब पहली बार इस चुनौती का समाधान तलाशने की कोशिश बैतूल से शुरू हो रही है।

पूरी परियोजना का राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व बैतूल के पूर्व मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) एवं वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र के फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन (एफएओ) में सीनियर एडवाइजर राकेश भूषण सिन्हा कर रहे हैं।

आखिर 'लैंडस्केप प्रोजेक्ट' है क्या? अब तक वन विभाग अलग-अलग वन मंडलों के हिसाब से वर्किंग प्लान तैयार करता रहा है। एक वन मंडल की योजना दूसरे से अलग होती है, लेकिन जंगल किसी प्रशासनिक सीमा को नहीं मानते। वन्यजीव, नदियां, पहाड़ और जैव विविधता पूरे क्षेत्र में फैली होती है।

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से लेकर मेलघाट टाइगर रिजर्व तक के पूरे वन क्षेत्र को एक लैंडस्केप यानी एक साझा पारिस्थितिकी तंत्र मानकर योजना बनाई जाएगी। इसमें जंगल, वन्यजीवों के कॉरिडोर, जल स्रोत, ग्रामीण आबादी, खेती, वनाधिकार वाले गांव और प्राकृतिक संसाधनों को एक साथ जोड़कर विकास और संरक्षण की रणनीति तैयार होगी।

सबसे बड़ी चुनौती... जंगल भी बचें और वनवासी भी आगे बढ़ें राकेश भूषण सिन्हा बताते हैं कि वन अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद जंगलों के आसपास रहने वाले हजारों परिवारों को वन भूमि पर अधिकार मिले हैं। इसका उद्देश्य उन्हें सम्मानपूर्वक आजीविका उपलब्ध कराना था। अब चुनौती यह है कि इन परिवारों की आय बढ़े, लेकिन जंगलों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।

दो राज्यों का साझा मॉडल सतपुड़ा और मेलघाट भले ही दो राज्यों में स्थित हों, लेकिन पर्यावरण की दृष्टि से दोनों एक ही लैंडस्केप का हिस्सा हैं। बाघ, तेंदुए और अन्य वन्यजीव प्रशासनिक सीमाओं को नहीं पहचानते।

ऐसे में यह परियोजना मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के बीच समन्वित कार्यप्रणाली विकसित करेगी। अभी तक दोनों राज्यों की योजनाएं अलग-अलग बनती रही हैं, जबकि नई व्यवस्था में साझा रणनीति के साथ काम होगा।

 

दक्षिण वन मंडल के डीएफओ अरिहंत ने बताया कि यह परियोजना संयुक्त राष्ट्र (United Nations) और फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन (FAO) के संयुक्त प्रयासों से तैयार की जा रही है। इसका क्रियान्वयन मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम, बैतूल और छिंदवाड़ा जिलों के साथ महाराष्ट्र के मेलघाट तक फैले वन्यजीव कॉरिडोर क्षेत्र में प्रस्तावित है।

More From Author

3 साल तक गर्भधारण की चिंता खत्म! पश्चिमी सिंहभूम में महिलाओं को मुफ्त मिलेगा गर्भनिरोधक इम्प्लांट

2598 शिविरों में 1 लाख 25 हजार से अधिक उपभोक्ताओं की शिकायतों का मौके पर निराकरण

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

RO No. 13843/161

city24x7.news founded in 2021 is India’s leading Hindi News Portal with the aim of reaching millions of Indians in India and significantly worldwide Indian Diaspora who are eager to stay in touch with India based news and stories in Hindi because of the varied contents presented in an eye pleasing design format.