TMC में सियासी भूचाल, चंद्रिमा भट्टाचार्य का सभी पदों से इस्तीफा; ममता बनर्जी की बढ़ी मुश्किलें

कलकत्ता

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद शुरू हुए TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी के बुरे दिन खत्म होते नहीं नजर आ रहे. पार्टी विधायक और सांसदों की बगावत के बाद अब बागी गुट ने कोलकाता में पार्टी के हेड ऑफिस पर भी कब्जा जमा लिया. अभी पार्टी दफ्तर पर कब्जे की रार मची ही है, इस बीच ममता बनर्जी को एक और झटका लगा है. बंगाल टीएमसी के अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य ने अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने पार्टी नेता ममता बनर्जी को पत्र लिखकर बताया कि वह 3 जून को संभाले गए इस पद को छोड़ रही हैं. चंद्रिमा ने तृणमूल कांग्रेस और उससे जुड़ी संस्थाओं के अलग-अलग बैंक खातों के लिए हस्ताक्षरकर्ता (सिग्नेटरी) के तौर पर अपनी ज़िम्मेदारियों से भी मुक्त किए जाने का अनुरोध किया. इसके अलावा, राज्य की पूर्व मंत्री ने चुनाव आयोग के सामने पार्टी का प्रतिनिधित्व करने की भूमिका से भी इस्तीफा दे दिया है। 

टीएमसी में मच रही उठापठक के बीच ममता बनर्जी की सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में शुमार चंद्रिमा का इस तरह अचानक जाना टीएमसी के लिए एक बहुत बड़ा सियासी झटका माना जा रहा है। 

 जानकारी के मुताबिक, टीएमसी की प्रदेश अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य ने पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी को एक पत्र लिखकर अपने इस फैसले की जानकारी दी है. इस पत्र में भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया है कि वे न केवल सांगठनिक पदों से मुक्त हो रही हैं, बल्कि उन्होंने पार्टी के महत्वपूर्ण वित्तीय और प्रशासनिक फैसलों से जुड़ी 'साइनिंग अथॉरिटी' के पद से भी तत्काल प्रभाव से कदम पीछे खींच लिए हैं। 

ममता के लिए ये कितना बड़ा झटका?
चंद्रिमा को ममता का करीबी माना जाता है। वे सरकार से लेकर संगठन तक में अहम भूमिका निभा चुकी हैं। पार्टी में जारी हालिया उथल-पुथल के बीच भी वे ममता के साथ खड़ी नजर आई थीं। हालांकि, उनके बेटे सौरव बसु को ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट की बैठक में देखा गया था। तबसे ही कई अटकलें लगाई जा रही थीं। अब उन्होंने ममता से दूरी बना ली है।    

चंद्रिमा भट्टाचार्य लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस का एक मजबूत चेहरा रही हैं और सरकार से लेक संगठन तक में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती रही है. फिलहाल इस मामले पर तृणमूल कांग्रेस या मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस घटनाक्रम ने बंगाल के सियासी पारे को अचानक बढ़ा दिया है। 

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