होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का सख्त रुख, ग़ालिबाफ बोले- हमारी शर्तों पर ही खुलेगा अहम समुद्री मार्ग

मॉस्को
 ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर ग़ालिबाफ ने गुरुवार को कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिका की धमकियों पर नहीं, बल्कि ईरान की शर्तों पर ही दोबारा खोला जाएगा।प्रेस टीवी के अनुसार,  ग़ालिबाफ ने कहा, "अमेरिका ने अभी तक यह नहीं सीखा है कि धौंस जमाने और अपनी प्रतिबद्धताएं तोड़ने की अब कीमत चुकानी पड़ती है। मैं स्पष्ट कर दूं कि यदि आप हमला करेंगे, तो जवाबी हमला झेलेंगे। व्यर्थ संघर्ष मत कीजिए, इससे आप और गहरे संकट में फंसेंगे। होर्मुज जलडमरूमध्य केवल ईरानी व्यवस्था के तहत खुलेगा, अमेरिकी धमकियों से नहीं।"

 इससे पहले ईरानी मीडिया ने फारस की खाड़ी स्थित अबू मूसा द्वीप तथा ईरान के ईरानशहर, चाबहार, कोनारक, सिरिक, जास्क और बंदर अब्बास शहरों में विस्फोटों की सूचना दी। मेहर समाचार एजेंसी के अनुसार बंदर अब्बास में वायु रक्षा बलों ने शहर के आसमान में अमेरिकी लक्ष्यों पर गोलीबारी की।
 
अमेरिकी सेना ने बुधवार को ईरान पर कई हमले किये थे। अमेरिकी केंद्रीय कमान ने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर ईरानी हमलों के जवाब में यह कार्रवाई की गयी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसके बाद कहा कि युद्धविराम अब प्रभावी नहीं रहा।

ईरान ने अमेरिका पर दोनों देशों के बीच हुए समझौता ज्ञापन का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए बहरीन और कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले किये।

अल मायदीन टीवी के अनुसार हवाई हमले की चेतावनी के बीच बहरीन में विस्फोटों की आवाजें सुनी गयीं। बहरीन के गृह मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा, "सायरन बजा दिया गया है। नागरिकों और निवासियों से शांत रहने तथा निकटतम सुरक्षित स्थान पर जाने का आग्रह किया जाता है।"

ईरान ने दी नई जानकारी, बढ़ने वाली है भारत की टेंशन!

ईरान ने धमकी दी है कि वह अमेरिकी हमलों के जवाब में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से बंद कर सकता है। ईरान की सरकारी टीवी ने कहा है कि इस जलडमरूमध्य को अमेरिका के साथ हुए समझौते के तहत कड़ी निगरानी में खोला गया था। तब से होर्मुज के रास्ते जहाजों की आवाजाही बढ़ी है। हालांकि, मंगलवार को तीन जहाजों पर ईरान के हमलों के बाद हालात बिगड़ गए। बुधवार सुबह अमेरिका ने होर्मुज से सटे ईरान के कम से कम 80 सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। इनमें रडार साइट, ईरानी नौसेना के ठिकाने, हथियार भंडार जैसे महत्वपूर्ण मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं। अगर होर्मुज फिर से बंद होता है तो भारत की टेंशन बढ़ सकती है।

होर्मुज को बंद करेगा ईरान?
सरकारी प्रसारक प्रेस टीवी ने एक सूत्र के हवाले से बताया, ईरान केवल अपनी व्यवस्थाओं के तहत ही जलडमरूमध्य को फिर से खोलेगा, जैसा कि इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन (एमओयू) में तय किया गया है। सूत्र ने आगे कहा कि अमेरिका के किसी भी हमले के जवाब में ईरान कम से कम दोगुने लक्ष्यों पर हमला करेगा। सूत्र ने बताया, "पिछले 48 घंटों के घटनाक्रम से पता चलता है कि ईरान होर्मुज नदी के प्रबंधन से पीछे नहीं हटेगा।"

ईरान बोला- करारा जवाब देंगे
इस बीच एक अनाम ईरानी अधिकारी ने कहा है कि किसी भी खतरे का करारा जवाब दिया जाएगा। उस ने कहा कि शासन अमेरिका और क्षेत्र में उसके सहयोगियों के बीच कोई भेद नहीं करता है। उसने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान के खिलाफ दी गई धमकियों का सीधा जवाब देते हुए कहा कि ऐसी धमकियां देने से उन्हें कुछ भी हासिल नहीं होगा। अधिकारी ने आगे कहा कि वह (ट्रंप) निश्चित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य और अंतिम समझौते पर बातचीत दोनों में हार जाएंगे। अब फैसला उनका है।"

ईरानी सेना के 8 जवानों की मौत
ईरान की सरकारी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बुधवार तड़के दक्षिणी ईरान पर अमेरिकी हमलों में ईरानी सेना के आठ जवान मारे गए। इसमें आगे कहा गया है कि मारे गए सैनिक वायुसेना और नौसेना से संबंधित थे और बंदर अब्बास और बुशहर में हुए हमलों के कारण उनकी मृत्यु हुई। इस बीच नाटो शिखर सम्मेलन के बाद बुधवार को तुर्की के अंकारा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप ने कहा कि वह "शायद आज रात ईरान पर हमला करेंगे"। ट्रंप ने कहा, "मैं थोड़ी चेतावनी दे रहा हूं। हम आज रात उन पर कड़ा प्रहार करने वाले हैं।

होर्मुज के बंद होने से भारत को कितना नुकसान

  •     भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य पर काफी ज्यादा निर्भर है।
  •     यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और रणनीतिक हितों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है।
  •     भारत अपनी जरूरत का लगभग 40% से अधिक कच्चा तेल होर्मुज के रास्ते आयात करता है।
  •     सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), इराक, ईरान और कतर से आने वाला तेल और गैस का बड़ा हिस्सा होर्मुज से होकर ही गुजरता है।
  •     होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते में किसी भी रुकावट के आने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं।
  •     इसका असर भारत में ईंधन की कीमतों, मुद्रास्फीति और राजकोषीय घाटा पर पड़ता है।

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