राजस्व बढ़ाने को राजस्थान सरकार का बड़ा फैसला, टैक्स चोरों पर कसेगा शिकंजा अब

जयपुर
राजस्थान के विकास की गति को तेज करने और 8.5 करोड़ प्रदेशवासियों की सामाजिक व आर्थिक उन्नति को सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। जयपुर के शासन सचिवालय में आयोजित इस उच्च स्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राजस्व संग्रहण ही राज्य की प्रगति और जनकल्याणकारी योजनाओं का मुख्य आधार है, इसलिए टैक्स की चोरी को किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को 10 कड़े और व्यावहारिक निर्देश जारी किए हैं, ताकि साल की शुरुआत से लेकर अंतिम तिमाही तक कर संग्रहण की रफ्तार समान बनी रहे। इस दौरान यह भी सामने आया कि सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के कारण चालू वर्ष की पहली तिमाही में रिकॉर्ड 33,969 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 11.54 प्रतिशत की शानदार बढ़ोतरी दर्शाता है।

1. टैक्स चोरों के खिलाफ एक्शन और डिकॉय ऑपरेशन्स
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने वाणिज्यिक कर विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि कर चोरी करने वाले बड़े कारोबारियों और रिपीट ऑफेंडर्स पर लगाम लगाने के लिए अब केवल कागजी कार्रवाई नहीं बल्कि धरातल पर असरदार छापेमारी की जाए। उन्होंने कर चोरी रोकने के लिए आधुनिक तकनीकों और 'डॉय ऑपरेशन्स' यानी औचक डमी छापों का उपयोग करने की हिदायत दी है। इसके साथ ही, देश के अन्य राज्यों में चल रही बेस्ट कर प्रणालियों का अध्ययन कर उन्हें राजस्थान की भौगोलिक और व्यापारिक परिस्थितियों के अनुरूप लागू करने को कहा गया है।

2. जीएसटी रिटर्न और फेसलेस स्क्रूटनी में सख्ती
बैठक में यह गर्व का विषय सामने आया कि राजस्थान पूरे देश में 'फेसलेस स्क्रूटनी' की व्यवस्था को पूरी तरह लागू करने वाला पहला राज्य बन गया है। इसके अलावा, GST रिटर्न फाइलिंग कंप्लायंस के मामले में भी राजस्थान पूरे देश में तीसरे स्थान पर काबिज है। मुख्यमंत्री ने इस गति को बरकरार रखते हुए उन व्यापारियों पर सख्ती बरतने को कहा है जो लगातार रिटर्न फाइलिंग में देरी करते हैं।

3. माइनिंग पर GPS और CCTV से निगरानी
प्रदेश में चल रहे अवैध खनन को पूरी तरह जड़ से खत्म करने के लिए खान एवं पेट्रोलियम विभाग को सख्त तकनीकी निर्देश दिए गए हैं। अब राजस्थान में खनिज परिवहन के लिए जारी होने वाले 'ई-रवन्ना' सिस्टम को पूरी तरह से वाहनों में लगे जीपीएस (GPS) और मुख्य माइनिंग चेक-पोस्टों पर लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों से लिंक किया जाएगा, ताकि अवैध रूप से बिना रॉयल्टी चुकाए निकलने वाले पत्थरों और बजरी के ट्रकों पर लाइव नजर रखी जा सके।

4. अवैध शराब परिवहन पर सख्ती
आबकारी विभाग की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने बॉर्डर और स्थानीय इलाकों में अवैध शराब की तस्करी पर पूर्ण विराम लगाने की बात कही। उन्होंने कहा कि अवैध शराब के परिवहन में जो भी गाड़ियां या कंटेनर जब्त किए जाते हैं, उनके कानूनी मामलों का समय पर निस्तारण कर उनकी नीलामी या जब्ती की प्रक्रिया को तेज किया जाए, ताकि वे पुलिस थानों या आबकारी डिपो में खड़े-खड़े कबाड़ न बनें।

5. रजिस्ट्री प्रक्रिया में Geo-Tagging अनिवार्य
पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग को जमीनों और मकानों की रजिस्ट्री प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और विवादमुक्त बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि ई-पंजीयन के दौरान अब संबंधित अचल संपत्ति की 'जियो टैगिंग' का उपयोग अनिवार्य रूप से किया जाए, ताकि एक ही जमीन को दो बार बेचने या सरकारी जमीन की फर्जी रजिस्ट्री कराने वाले गिरोहों पर पूरी तरह नकेल कसी जा सके।

6. अपंजीकृत वाहन बॉडी निर्माताओं पर शिकंजा
परिवहन विभाग को निर्देश देते हुए सीएम ने कहा कि सड़कों पर बिना परमिट, बिना टैक्स चुकाए और क्षमता से अधिक माल लादकर चलने वाले अवैध वाहनों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया जाए। उन्होंने उन अनरजिस्टर्ड या अवैध रूप से चल रहे वाहन बॉडी निर्माण करने वाले कारखानों पर भी तुरंत ताला लगाने और कानूनी एक्शन लेने के निर्देश दिए हैं, जो बिना सुरक्षा मानकों के ट्रकों और बसों की बॉडी तैयार करते हैं।

7. निर्माण कार्यों से श्रमिक सेस की हर महीने समीक्षा
मजदूरों और निर्माण श्रमिकों के कल्याण के लिए चलने वाली योजनाओं का बजट न रुके, इसके लिए श्रम विभाग को कंस्ट्रक्शन वर्क्स पर देय श्रमिक सेस की प्रभावी और शत-प्रतिशत वसूली करने के आदेश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में निजी और सरकारी क्षेत्र में जितने भी बड़े निर्माण कार्य चल रहे हैं, उनकी पूरी मॉनिटरिंग की जाए और कलेक्ट होने वाले सेस की हर महीने उच्च स्तर पर समीक्षा की जाए।

8. लैंड यूज चेंज की नीति का सरलीकरण
आम नागरिकों, किसानों और उद्यमियों को अपनी जमीनों का रूपांतरण यानी लैंड यूज चेंज कराने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें, इसके लिए राजस्व विभाग को नीतिगत सुधार करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पूरी रूपांतरण प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन, पारदर्शी, सरल और समयबद्ध बनाया जाए ताकि लोग बिना किसी भ्रष्टाचार या देरी के उद्योग या मकान के लिए जमीन का डायवर्जन करा सकें।

9. सुविधाओं से लैस नई आवासीय कॉलोनियां
नगरीय विकास एवं आवासन विभाग को आदेश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न शहरों में अर्बन इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट (UIT) के माध्यम से नई आवासीय योजनाओं के ले-आउट प्लान तुरंत तैयार किए जाएं। उन्होंने विशेष जोर देकर कहा कि इन नए रिहायशी इलाकों के प्लान में चौड़ी सड़कें, पीने का साफ पानी, सीवरेज सिस्टम, बिजली की निर्बाध आपूर्ति, बड़े पार्क और गाड़ियों के लिए व्यवस्थित पार्किंग स्पेस जैसी आधुनिक व मूलभूत सुविधाएं पहले से ही नक्शे में शामिल होनी चाहिए।

राजस्व को अटकाने वाले बड़े कानूनी विवादों पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने सभी प्रशासनिक अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि विभिन्न अदालतों, ट्रिब्यूनल्स और हाईकोर्ट में राजस्व से जुड़े जितने भी सरकारी केस पेंडिंग पड़े हैं, उनमें सरकारी वकीलों के माध्यम से प्रभावी और मजबूत पैरवी कराई जाए। समय पर जवाब दाखिल कर कोर्ट से स्टे हटवाए जाएं ताकि अटका हुआ करोड़ों रुपये का टैक्स राजस्व जल्द से जल्द सरकारी खजाने में आ सके। इस बैठक में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास सहित वित्त, परिवहन, राजस्व और खान विभाग के तमाम अतिरिक्त मुख्य सचिव और प्रमुख शासन सचिव उपस्थित रहे।

 

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