मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर से किया राज्य स्तरीय बलराम कृषि महोत्सव का शुभारंभ

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को इंदौर में राज्य स्तरीय बलराम कृषि महोत्सव का शुभारंभ करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 को "किसान कल्याण वर्ष" के रूप में समर्पित किया है। इस उद्देश्य से कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य, सहकारिता, एमएसएमई, राजस्व, ऊर्जा सहित 16 विभागों को एक साथ लाकर किसानों के समग्र विकास का अभियान प्रारंभ किया गया है और किसानों की आय बढ़ाने के लिये रोडमैप तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि यह महोत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराने, प्रसंस्करण, विपणन और रोजगार से जोड़ने का व्यापक अभियान है, जो अब पूरे प्रदेश के सभी जिलों में आयोजित किया जाएगा। अभियान के तहत प्रदेश के सभी 55 जिलों में आगामी 13 नवम्बर तक अनेक आयोजन होंगे और खेती-किसानी पर आधारित गतिविधियां आयोजित की जायेंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों, महिलाओं, युवाओं और गरीबों के सर्वांगीण विकास का संकल्प लेकर सरकार आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि यदि देश के इन चार वर्गों का विकास सुनिश्चित हो जाता है तो भारत की उन्नति स्वतः सुनिश्चित हो जाएगी। किसान इन चारों वर्गों के केंद्र में है, इसलिए सरकार ने किसान कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष सरकार ने उद्योग एवं रोजगार वर्ष मनाया था, जिसके परिणामस्वरूप प्रदेश में 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश धरातल पर उतर रहे हैं। अब उसी प्रकार वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाते हुए कृषि क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन लाया जा रहा है।

इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट, सांसद  शंकर लालवानी, महापौर  पुष्यमित्र भार्गव, मध्यप्रदेश गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष  ओम जैन, जिला पंचायत अध्यक्ष मती रीना सतीश मालवीय, विधायक  मधु वर्मा, मती मालिनी गौड़,  गोलू शुक्ला, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, पुलिस कमिश्नर  संतोष कुमार सिंह, कलेक्टर  शिवम वर्मा,  श्रवण चावड़ा,  कपिल यार्दें सहित अन्य जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारीगण मौजूद थे।

शुभारंभ समारोह को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है। प्रदेश की 250 से अधिक नदियाँ लाखों लोगों के जीवन को समृद्ध बनाती हैं। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने नर्मदा जैसी जीवनदायिनी नदी के जल का समुचित उपयोग नहीं किया, जबकि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नर्मदा घाटी परियोजनाओं को नई गति मिली। अनेक योजनाओं ने मालवा अंचल को सिंचाई और पेयजल उपलब्ध कराया तथा प्रदेश की बिजली उत्पादन क्षमता को भी मजबूत किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1956 से लेकर 2003 तक प्रदेश में केवल 7.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध थी, जबकि हमारी सरकारों ने इसे बढ़ाकर 65 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाया है। आगामी वर्षों में सिंचित क्षेत्र को और बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान की समृद्धि का आधार पानी, बिजली और सड़क है। इन तीनों क्षेत्रों में सरकार ने ऐतिहासिक कार्य किए हैं। उन्होंने बताया कि किसानों को अब रात्रि के बजाय दिन में कृषि बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार तेजी से काम कर रही है, जिससे दुर्घटनाओं में कमी आएगी और खेती करना अधिक सुविधाजनक होगा। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए सरकार लगातार प्रयासरत है। इस वर्ष गेहूं की खरीदी 2625 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर की गई। इसी प्रकार सोयाबीन उत्पादकों को भावांतर योजना के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराई गई। उन्होंने कहा कि हमारी सरकारों को छोड़कर अन्य पूर्ववर्ती सरकारों के समय किसानों को न उचित मूल्य मिलता था और न ही समर्थन मूल्य पर व्यवस्थित खरीदी होती थी। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण उपलब्ध कराने की योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि अब किसानों को हर छह माह में ऋण नवीनीकरण कराने की आवश्यकता नहीं होगी। किसान यदि जून में ऋण लेते हैं तो अगले वर्ष जून में ही राशि जमा कर सकेंगे। इससे किसानों को बड़ी राहत मिलेगी।

नदी जोड़ों परियोजनाओं से मिलेगा 13 जिलों को लाभ

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री स्वर्गीय  अटल बिहारी वाजपेयी के समय परिकल्पित केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना और प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रारंभ पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) परियोजना मध्यप्रदेश के जल इतिहास को बदल देंगी। लगभग एक लाख करोड़ रुपये की लागत वाली इन परियोजनाओं से श्योपुर, मुरैना, भिंड, ग्वालियर, राजगढ़, शाजापुर, देवास, उज्जैन, नीमच, मंदसौर सहित 13 जिलों को सिंचाई एवं पेयजल का लाभ मिलेगा। इससे पश्चिमी मध्यप्रदेश और मालवा क्षेत्र को भी बड़ी राहत मिलेगी।

मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि सरकार खेती को केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि "खेत से कारखाने और कारखाने से बाजार" तक संपूर्ण कृषि अर्थव्यवस्था विकसित की जा रही है। प्रदेश में तेजी से फूड प्रोसेसिंग इकाइयाँ स्थापित हो रही हैं। हाल ही में उज्जैन में 1250 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित आलू प्रसंस्करण इकाई प्रदेश के 32 जिलों से आलू खरीदेगी, जिससे किसानों को स्थायी बाजार मिलेगा। इसी प्रकार इंदौर, आगर, उज्जैन सहित अनेक जिलों में कृषि आधारित उद्योग स्थापित किए जा रहे हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर परिवहन के लिए शुरू होगी मुख्यमंत्री सुगम परिवहन योजना

उन्होंने कहा कि प्रदेश में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बस योजना प्रारंभ की जाएगी, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध हो सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि वर्तमान में मध्यप्रदेश देश के कुल दुग्ध उत्पादन में लगभग 12 प्रतिशत योगदान देता है। सरकार का लक्ष्य इसे बढ़ाकर 20 प्रतिशत करना है। उन्होंने घोषणा की कि 40 लाख रुपये तक की डेयरी इकाई स्थापित करने पर सरकार 10 लाख रुपये का अनुदान देगी, जिससे युवाओं और किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि सरकार निराश्रित गौवंश के संरक्षण के लिए बड़े स्तर पर गौशालाओं का संचालन कर रही है। गौशाला संचालकों को प्रति गौवंश 40 रुपये प्रतिदिन अनुदान दिया जाएगा। साथ ही फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले नीलगाय एवं अन्य वन्य पशुओं के प्रबंधन के लिए भी विशेष योजना लागू की जा रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के साथ हुए समझौते के बाद किसानों को दूध के दाम में 8 से 10 रुपये प्रति लीटर तक की अतिरिक्त आय मिल रही है। उन्होंने एक किसान का उदाहरण देते हुए कहा कि बेहतर मूल्य मिलने से किसानों की आय में प्रतिदिन हजारों रुपये की वृद्धि हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश की जीडीपी का लगभग 43 प्रतिशत योगदान कृषि क्षेत्र से प्राप्त हो रहा है। मध्यप्रदेश खाद्यान्न उत्पादन में देश में दूसरे स्थान पर है। मोटे अनाज, बाजरा, धनिया, लहसुन, संतरा, सोयाबीन, गेहूं, दलहन एवं तिलहन उत्पादन में प्रदेश अग्रणी राज्यों में शामिल है। फूलों की खेती में भी मध्यप्रदेश देश में दूसरा स्थान रखता है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के लगभग 6 लाख कपास उत्पादक किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए धार जिले में प्रधानमंत्री मित्र टेक्सटाइल पार्क स्थापित किया जा रहा है। इससे कपास से धागा, कपड़ा और रेडीमेड गारमेंट तक का संपूर्ण औद्योगिक तंत्र विकसित होगा तथा किसानों को बेहतर बाजार मिलेगा। बलराम कृषि महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवान बलराम की पूजा-अर्चना करते हुए कहा कि हल भारतीय कृषि संस्कृति, श्रम और समृद्धि का प्रतीक है। उन्होंने किसानों से किसान कल्याण वर्ष को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्रमुख घोषणाएं

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं—

• इंदौर की वर्तमान कृषि उपज मंडी को स्थानांतरित कर आधुनिक एवं विशाल कृषि उपज मंडी विकसित की जाएगी।

• संबंधित क्षेत्र में देवी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा स्थापित की जाएगी।

• मंडी क्षेत्र के प्रभावित परिवारों को वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराने की घोषणा।

• किसानों को दिन में कृषि बिजली उपलब्ध कराने की व्यवस्था लागू की जाएगी।

• 40 लाख रुपये तक की डेयरी स्थापना पर 10 लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा।

• गौशाला संचालन के लिए प्रति गौवंश 40 रुपये प्रतिदिन अनुदान जारी रहेगा।

• किसानों की आय बढ़ाने के लिए फूड प्रोसेसिंग, डेयरी, मत्स्य पालन और कृषि आधारित उद्योगों का व्यापक विस्तार किया जाएगा।

• फसलों को नुकसान पहुंचाने वाली नीलगाय एवं अन्य वन्य पशुओं के प्रबंधन के लिए विशेष योजना लागू होगी। हेलिकॉप्टर से नीलगाय एवं अन्य वन्य पशुओं के नियंत्रण की योजना बनेगी।

महोत्सव में किसानों को मिली एक ही मंच पर सभी विभागों की जानकारी

बलराम कृषि महोत्सव में कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य, सहकारिता, एमएसएमई, ऊर्जा, राजस्व सहित विभिन्न विभागों द्वारा प्रदर्शनी लगाई गई। किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, प्राकृतिक एवं जैविक खेती, ड्रोन तकनीक, कृषि यंत्रीकरण, उद्यानिकी, डेयरी, मत्स्य पालन, खाद्य प्रसंस्करण, कृषि ऋण, बीमा, विपणन, मूल्य संवर्धन तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। किसानों को विभागीय विशेषज्ञों से सीधे संवाद करने तथा विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने का अवसर भी उपलब्ध कराया गया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में उत्कृष्ठ किसान, किसानों के परिवारों के विद्यार्थियों एवं खेती-किसानी की बेहतरी के लिये लगे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स का सम्मान भी किया।

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार किसानों को प्राकृतिक खेती, आधुनिक खेती और ऑर्गेनिक खेती के प्रति जागरूक करने के लिए लगातार कार्यशालाएं आयोजित कर रही है। उन्होंने कहा कि खेती में नई तकनीकों को अपनाने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से किसानों की आय बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त होगा।

मंत्री  विजयवर्गीय ने किसानों के हित में केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले किसानों को कृषि ऋण पर 18 प्रतिशत तक ब्याज देना पड़ता था, जबकि प्रदेश सरकार ने किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण की सुविधा उपलब्ध कराई है।

उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि आज किसानों के खातों में केंद्र सरकार की ओर से 6 हजार रुपये तथा राज्य सरकार की ओर से 6 हजार रुपये, कुल 12 हजार रुपये प्रतिवर्ष सीधे हस्तांतरित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों के कल्याण के लिए सरकार ने अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं और किसान हित सर्वोच्च प्राथमिकता है।

इस अवसर पर संबोधित करते हुए जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट ने कहा कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है और गांव, मातृशक्ति, युवा शक्ति तथा समाज के अंतिम व्यक्ति के समग्र विकास के लिए हमारी सरकार निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार वर्ष के सभी 365 दिन किसानों के विकास, प्रगति और समृद्धि के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार किसानों को सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।  सिलावट ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की किसान हितैषी सोच और निर्णयों की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में किसानों के हित में कई ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार किसानों के विकास, उन्नति और समृद्धि के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद  शंकर लालवानी ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार द्वारा किसानों को आधुनिक और उन्नत खेती के साथ जोड़ा जा रहा है। आदर्श खेती की ओर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए किसानों को सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें शिक्षित और प्रशिक्षित भी किया जा रहा है।

 

More From Author

राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन योजना से मिली गुणवत्ता युक्त बीज की सौगात

गर्मी बनी परमाणु ऊर्जा पर संकट, फ्रांस में बंद हुए 3 न्यूक्लियर रिएक्टर; क्या भारत को भी सतर्क होने की जरूरत?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

RO No. 13910/15

city24x7.news founded in 2021 is India’s leading Hindi News Portal with the aim of reaching millions of Indians in India and significantly worldwide Indian Diaspora who are eager to stay in touch with India based news and stories in Hindi because of the varied contents presented in an eye pleasing design format.