Salary का बड़ा हिस्सा EMI में खत्म! भारत में लोग हर महीने किस पर उड़ा रहे हैं अपनी कमाई, रिपोर्ट चौंकाएगी

नई दिल्ली
भारत में लोग अपनी सैलरी का 39  परसेंट से ज्यादा EMI देने में खर्च कर देते हैं. इसका खुलासा एक  रिपोर्ट में हुआ है. भारत की सबसे बड़ी B2B SaaS फिनटेक कंपनी Perfios ने  PwC इंडिया के साथ मिलकर 19 फरवरी को यह रिपोर्ट जारी की. इस रिपोर्ट में बताया कि भारत में लोग अपनी कमाई का कितना हिस्सा कहां खर्च करते हैं? 

इंडियन कंज्यूमर्स के बिहेवियर पैटर्न का आकलन लगाने के लिए 30 लाख से अधिक कंज्यूमर्स पर सर्वे किया गया. इसमें महानगरों से लेकर तीसरी कैटेगरी के शहरों में रहने वाले ऐसे लोगों को शामिल किया गया, जिनकी सैलरी 20 हजार रुपए से लेकर 1 लाख रुपए तक है। 

ट्रेंड बढ़ने के कारण

आसान क्रेडिट अप्रूवलः लोन और ईएमआइ मिनटों में अप्रूव हो रहे हैं।

फेस्टिव ऑफर्सः नो-कॉस्ट इएमआइ और इंस्टेंट डिस्काउंट का प्रलोभन ।

इन्फ्लुएंसरः लग्जरी प्रोडक्ट्स दिखने से चाहत बढ़ी।

पियर प्रेशरः समान उम्र के लोगों के खर्च पैटर्न से प्रेरणा।

ईएमआइ को लेकर सुझाव
यदि मासिक आय 50,000 है। आय का लगभग एक-तिहाई यानी करीब 16,000 इएएमआइ में देते हैं, तो यह संकेत है कि आपके पास बाकी खर्च, बचत और अप्रत्याशित खर्चों को संभालने के लिए बहुत कम जगह बचती है। इसलिए बड़ी खरीदारियों से बचें।

30% से इएमआइ पर खर्च बनेगा अधिक जोखिम का शिकार
वित्तीय जानकारों का मानना है कि कुल इनकम का 30% से ज्यादा ईएमआइ पर खर्च करना वित्तीय रूप से सही नहीं है। उदाहरण के तौर पर, 20,000 आय वाले व्यक्ति को 6,000 से ज्यादा इएमआइ नहीं लेनी चाहिए।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट
 पहले लोग किसी भी चीज को खरीदने के लिए सालों तक बचत करते थे लेकिन अब ऐसा नही है। अब खर्च सिर्फ जरूरत नहीं, बल्कि सुविधा और आत्मविश्वास का प्रतीक बन गया है। आज उपभोक्ता आय का बेहतर प्रबंधन करना सीख रहे हैं। वे निवेश, बीमा और इएमआइ के बीच संतुलन बनाते हुए भविष्य को सुरक्षित कर रहे हैं। साथ ही डिजिटल समझ भी बढ़ी है।

हालांकि, यह भी जरूरी है कि बढ़ती सुविधाओं के साथ लोग क्रेडिट अनुशासन को बनाए रखें। खर्च में योजना और संयम रहना बहुत जरूरी है नहीं तो गैर जरूरी खर्चों पर अधिक व्यय आपातकाल में परेशानी में डाल सकता है। आपातकाल फंड जरूर बनाकर रखें और ऋण से आय अनुपात का ध्यान रखें यह अनुपात 30% से कम होना चाहिए। यदि यह 50 फीसदी से अधिक हो जाए, तो यह संकेत है कि आपकी वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ रहा है।

1. EMI पर इतना खर्च कर लोग
    सर्वे के नतीजे से पता चला कि भारत में लोग अपनी आय का 39 परसेंट से ज्यादा हिस्सा लोन की EMI चुकाने में खर्च कर देते हैं। 

2. जरूरत की चीजों पर इतना बैठ रहा खर्च
    इस लिस्ट में जरूरी खर्च दूसरे नंबर पर है, जिसमें घर का किराया, बिजली बिल जैसी चीजें शामिल हैं. इन पर लोग अपनी कमाई का 39 परसेंट खर्च कर देते हैं। 

    अपनी कमाई का 32 परसेंट लोग खाने-पीने की चीजों और पेट्रोल वगैरह पर खर्च कर रहे हैं। 
    वहीं 29 परसेंट हिस्सा लाइफस्टाइल और शौक से जुड़े खर्चों (विवेकाधीन खर्च) में चला जाता है। 

3. लाइफस्टाइल पर खर्च
    भारत में लोग फैशन, पर्सनल केयर और शॉपिंग पर सबसे ज्यादा खर्च करते हैं. कमाई का 62 परसेंट हिस्सा इन पर जाता है। 

4. खाने-पीने पर खूब जा रहा पैसा
    अब सैलरी बढ़ेगी तो खर्च भी बढ़ेगा. जैसे-जैसे सैलरी बढ़ रही है वैसे-वैसे बाहर जाकर खाने या घर बैठे ऑनलाइन फूड ऑर्डर करने फ्रीक्वेंसी भी रही है. लोग इन पर भी अपनी कमाई का एक मोटा हिस्सा खर्च कर रहे हैं। 

5. ऑनलाइन गेमिंग पर खर्च
    सर्वे में यह देखा गया कि 20,000 रुपये से कम कमाने वाले लोग ऑनलाइन गेमिंग पर सबसे ज्यादा 22 परसेंट खर्च कर रहे हैं. जैसे-जैसे कमाई बढ़ती जाती है वैसे-वैसे ऑनलाइन गेमिंग पर खर्च करने वालों की संख्या भी घटती जाती है. 75,000 रुपये से ज्यादा कमाने वाले सिर्फ 12 परसेंट ही ऑनलाइन गेमिंग पर खर्च करते हैं। 

6. पेमेंट करने का तरीका
    जरूरी चीजों पर खर्च के लिए लोग आमतौर पर  ECS (इलेक्ट्रॉनिक क्लियरिंग सर्विस) का इस्तेमाल करते हैं, जबकि लाइफस्टाइल और जरूरत की चीजों पर खर्च के लिए UPI से पेमेंट अधिक करते हैं। 

 

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