Ganga Water Treaty पर बढ़ा तनाव, संधि खत्म होने से पहले भारत सख्त; बांग्लादेश ने लगाई गुहार

नई दिल्ली

पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को भंग करने के बाद भारत अब बांग्लादेश के साथ गंगा जल संधि को लेकर भी सख्त है। यह संधि इस साल खत्म हो रही है तथा सरकार पर राज्यों का दबाव है कि इसका नवीनीकरण इस स्वरूप में न किया जाए। केंद्र सरकार भी यही चाहती है। वहीं बांग्लादेश बार-बार संधि के नवीनीकरण के लिए बातचीत करने के लिए गिड़गिड़ा रहा है। हालांकि भारत ने अभी इसपर चुप्पी साध रखी है।

बंगाल के साथ बिहार को भी बड़ा नुकसान
पश्चिम बंगाल के साथ-साथ बिहार ने भी चिंता जताई है कि बांग्लादेश को पानी देते समय पहले उनके राज्य के हितों की रक्षा हो। एनडीए के प्रमुख घटक दल जदयू ने तो बाकायदा गुरुवार को इस मुद्दे को राज्यसभा में विशेष उल्लेख के जरिये उठाया। बांग्लादेश के साथ गंगा जल संधि दिसंबर, 1996 में हुई थी, जो 30 साल के लिए थी। इसके तहत जनवरी से मई के बीच फरक्का बैराज में मौजूद पानी का 50% हिस्सा बांग्लादेश को देने का प्रावधान है। दूसरी शर्त यह है कि इस दौरान 70 हजार क्यूसेक पानी फरक्का बैराज में मौजूद रहना चाहिए। इन प्रावधानों के चलते इन महीनों में बिहार को गंगा का पानी नहीं मिल पाता है। दूसरी तरफ फरक्का में पानी रोके जाने से हुगली नदी के प्रवाह पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है।

क्या चाहती है केंद्र सरकार?
सूत्रों ने कहा, इस साल 12 दिसंबर को संधि खत्म हो रही है, पर अभी तक इसके नवीनीकरण को लेकर प्रयास शुरू नहीं हुए हैं। केंद्र सरकार भी इस स्वरूप में इसके नवीनीकरण के पक्ष में नहीं है। दरअसल, केंद्र को इस मुद्दे पर घरेलू दबाव का सामना करना पड़ रहा है। बंगाल-बिहार इसके खिलाफ हैं। दोनों राज्यों में इस समय भाजपा की सरकारें हैं। इस बीच गुरुवार को एनडीए के प्रमुख घटक दल जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय झा ने विशेष उल्लेख के जरिये इस मुद्दे को राज्यसभा में उठाया। कहा, बिहार की दीर्घकालिक ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखे बैगर इस संधि का नवीनीकरण न हो।

तो बिहार को हो सकता है सबसे ज्यादा नुकसान
यदि इस संधि का इसी स्वरूप में नवीनीकरण किया गया तो इससे बिहार को सबसे ज्यादा नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि फरक्का बैराज का निर्माण कोलकात्ता पोर्ट और हगुली नदी के प्रवाह को बनाए रखने के लिए किया गया था, लेकिन बांग्लादेश से संधि होने के कारण इसका नुकसान बिहार को उठाना पड़ा। पानी की एक तय मात्रा फरक्का बैराज में सुनिश्चित होने देने के लिए बिहार को गंगा का पानी नहीं मिल पाता है। उधर, पानी रोके जाने से हुगली नदी का प्रवाह भी प्रवाहित होता है।

2000 क्यूसेक अतिरिक्त जल की जरूरत : JDU
जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा, 2050 तक बिहार को कृषि व उद्योगों के लिए 2000 क्यूसेक अतिरिक्त जल की जरूरत होगी, इसलिए इस संधि का नवीनीकरण नहीं होना चाहिए। ‘हिन्दुस्तान’ से उन्होंने कहा, सरकार यदि मौजूदा स्वरूप में संधि का नवीनीकरण करेगी तो उनकी पार्टी इसका विरोध करेगी। विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि भारत-बांग्लादेश के बीच 54 नदियां आरपार होती हैं, इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच स्थापित तंत्र के तहत चीजें तय होती हैं।

More From Author

Chamba Bus Accident: अचानक पहाड़ी से नीचे सड़क पर गिरी बस, हादसे में 7 की मौत और कई घायल

मेरठ में आज शिवभक्तों पर पुष्पवर्षा करेंगे CM योगी, कांवड़ यात्रा में दिखेगा भव्य नजारा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

RO No. 13944/210

city24x7.news founded in 2021 is India’s leading Hindi News Portal with the aim of reaching millions of Indians in India and significantly worldwide Indian Diaspora who are eager to stay in touch with India based news and stories in Hindi because of the varied contents presented in an eye pleasing design format.