बच्चों को एडिक्ट बना रहा सोशल मीडिया? अमेरिका में Meta पर बढ़ा दबाव, बैन के पक्ष में ज्यादातर लोग

वाशिंगटन

सोशल मीडिया हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है. सुबह उठते ही इंस्टाग्राम खोलना हो या फेसबुक पर दोस्तों और परिवार की खबर लेना, करोड़ों लोग इन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन अब अमेरिका में इन्हीं सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ लोगों का गुस्सा बढ़ता दिख रहा है. एक नए Reuters/Ipsos सर्वे में 61 फीसदी अमेरिकियों ने कहा है कि सोशल मीडिया कंपनियों पर सरकार को और सख्त नजर रखनी चाहिए. इतना ही नहीं, 66 फीसदी लोग चाहते हैं कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने के लिए कंपनियों के लिए उम्र की वेरिफिकेशन जरूरी किया जाए। 

अमेरिका में लोगों का मूड क्यों बदल रहा है?
Reuters/Ipsos का यह सर्वे 4,505 अमेरिकी लोगों के बीच किया गया था और इसमें करीब 2 फीसदी का मार्जिन ऑफ एरर है. सर्वे में 61 फीसदी लोगों ने सोशल मीडिया कंपनियों पर ज्यादा सख्त निगरानी की मांग की. दिलचस्प बात यह है कि यह सोच सिर्फ किसी एक पोलिटिकल पार्टी तक सीमित नहीं है. 71 फीसदी डेमोक्रैक्ट और 62 फीसदी रिपब्लिकन ने ज्यादा निगरानी का समर्थन किया। 

सबसे ज्यादा चिंता बच्चों को लेकर है. 66 फीसदी लोगों ने ऐसे कानूनों का समर्थन किया जिनमें सोशल मीडिया कंपनियों को 16 साल से कम उम्र के यूजर्स की उम्र चेक करनी पड़े. रिपब्लिकन्स में इसका समर्थन 74 फीसदी और डेमोक्रैट्स में 69 फीसदी रहा. यानी बच्चों को सोशल मीडिया से बचाने का मुद्दा अमेरिका में काफी हद तक दोनों तरफ के लोगों को एक साथ ला रहा है। 

लोग खुद मानते हैं कि सोशल मनीडिया की लत लग सकती है
सर्वे का एक और आंकड़ा काफी चौंकाने वाला है. 85 फीसदी अमेरिकियों का मानना है कि सोशल मीडिया बच्चों के लिए एडिक्टिव हो सकता है. लगभग इतनी ही बड़ी संख्या मानती है कि इसका इस्तेमाल बच्चों की मेंटल हेल्थ के लिए नुकसानदेह हो सकता है. वहीं दूसरी तरफ सोशल मीडिया को पसंद करने वालों की संख्या भी बहुत ज्यादा है. 70 फीसदी लोगों ने कहा कि इन प्लेटफॉर्म्स पर समय बिताना उन्हें मजेदार लगता है. 52 फीसदी लोगों ने माना कि वे सोशल मीडिया पर जरूरत से ज्यादा समय बिताते हैं। 

यानी समस्या यह नहीं है कि लोग फेसबुक या इंस्टाग्राम इस्तेमाल ही नहीं करना चाहते. समस्या यह है कि लोग चाहते हैं कि इन कंपनियों पर कुछ नियम हों, खासकर जब बात बच्चों की हो। 

मेटा के खिलाफ बढ़ता जा रहा है कानूनी दबाव
यह सर्वे ऐसे समय आया है जब मेटा के खिलाफ अमेरिका में कई मामलों में कानूनी दबाव बढ़ रहा है. हाल ही में न्यू मेक्सिको की एक अदालत ने मेटा को 567 मिलियन डॉलर का भुगतान करने का आदेश दिया. यह पैसा युवाओं की मेंटल हेल्थ से जुड़े कामों के लिए इस्तेमाल किया जाना है. इससे पहले इसी मामले में Meta पर 375 मिलियन डॉलर का जूरी अवॉर्ड लगाया गया था. दोनों को जोड़ें तो इस मामले में कंपनी की कुल फाइनांशियल लाइब्लिटी करीब 942 मिलियन डॉलर हो जाती है 

न्यू मेक्सिको के जज ब्रायन बीडशीड ने Meta के फेसबुक और इंस्टाग्राम के डिजाइन और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए. अदालत ने मेटा को कई बदलाव करने का आदेश दिया है. इनमें बच्चों की उम्र की बेहतर जांच, नाबालिगों के लिए इस्तेमाल की कुछ सीमाएं, रात और स्कूल के समय नोटिफिकेशन्स बंद करना और कुछ मामलों में पेरेंट्स की अनुमति जैसी चीजें शामिल हैं. मेटा इस फैसले के खिलाफ अपील करने की तैयारी में है। 

इस मामले में एक खास बात यह भी है कि अदालत ने मेटा के प्लेटफॉर्म्स को सिर्फ किसी एक बच्चे को नुकसान पहुंचाने वाली चीज के तौर पर नहीं देखा, बल्कि बड़े स्तर पर समाज पर असर डालने वाली समस्या के रूप में देखा. रॉयटर्स के मुताबिक जज ने Meta के डिजाइन को लेकर काफी सख्त रुख अपनाया. हालांकि अदालत के आदेश का असर सीधे न्यू मेक्सिको में है, वहां के अटॉर्नी जनरल का कहना है कि यह फैसला दूसरे मामलों के लिए एक उदाहरण बन सकता है। 

फेसबुक और इंस्टाग्राम पर क्या बदल सकता है?
इसका मतलब यह नहीं है कि कल से फेसबुक या इंस्टाग्राम बंद हो जाएंगे. बल्कि आने वाले समय में इन प्लेटफॉर्म्स पर एज वेरिफिकेशन और चाइल्ड सेफ्टी से जुड़े नियम और सख्त हो सकते हैं। 

मिसाल के लिए न्यू मेक्सिको के आदेश में नाबालिगों के लिए रात और स्कूल के समय पुश नोटिफिकेशन पर रोक, उम्र की बेहतर जांच और बच्चों के अकाउंट को लेकर ज्यादा सख्त नियम शामिल हैं. कुछ मामलों में प्लेटफॉर्म को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि कम उम्र के बच्चे सिस्टम में अपनी सही उम्र छिपाकर अकाउंट न बना सकें 

अमेरिका के कई राज्यों में पहले से ही बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर अलग-अलग कानून बनाए जा चुके हैं. कुछ जगहों पर एज वेरिफिकेशन, कुछ जगहों पर पेरेंट कंसेंट और कुछ जगहों पर बच्चों के लिए एडिक्टिव फीचर्स को लिमिट करने की कोशिश हो रही है। 

Meta के लिए सबसे बड़ी चिंता सिर्फ जुर्माना नहीं है
मेटा जैसी कंपनियों के लिए समस्या सिर्फ करोड़ों डॉलर का Fine नहीं है. अगर अलग-अलग राज्यों और अदालतों से ऐसे नियम आने लगते हैं जिनमें एज वेरिफिकेशन, नोटिफिकेशन रिकॉमेंडेशन और बच्चों के लिए दूसरे फीचर्स में बदलाव करना पड़े, तो कंपनियों को अपने पूरे प्रोडक्ट डिजाइन में बदलाव करना पड़ सकता है। 

रॉयटर्स के मुताबिक 29 अमेरिकी राज्यों से जुड़ा एक अलग फेडरल ट्रायल भी 12 अगस्त से कैलिफोर्निया में शुरू होने वाला है. इसमें मेटा समेत दूसरी कंपनियों पर बच्चों और टीनेजर्स को लेकर इसी तरह के आरोपों की सुनवाई होनी है. मेटा इन 
आरोपों से इनकार करता है। 

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