साइबर ठगों का नया नेटवर्क उजागर, लखनऊ में हजारों म्यूल खातों पर पुलिस की नजर

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लखनऊ
पुलिस के सामने म्यूल बैंक खातों का नेटवर्क अब चुनौती बन गया है। साइबर ठग दूसरों के नाम पर खुले बैंक खातों को कमीशन का लालच देकर या उनकी जानकारी का दुरुपयोग कर रकम मंगाने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। शहर में बीते कुछ महीनों में 3707 म्यूल खातों की पहचान हुई है। इनमें 3364 खाते फ्रीज कराए जा चुके हैं, जबकि 343 खाते अभी शेष हैं। लखनऊ के पूर्वी जोन में शामिल गोमतीनगर, गुंडबा, बक्शी का तालाब से जुड़े क्षेत्र अधिक 1425 म्यूल खातों की पहचान हुई है।
अपर पुलिस उपायुक्त अपराध किरन यादव ने बताया कि साइबर अपराधी सीधे अपने खाते में ठगी की रकम लेने से बचते हैं। इसके लिए पहले से तैयार बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता है। पीड़ित से रकम ट्रांसफर कराने के बाद उसे दूसरे खातों में भेजा जाता है। कई मामलों में रकम को अलग-अलग खातों में बांटकर आगे ट्रांसफर किया जाता है। इससे रकम के वास्तविक लाभार्थी तक पहुंचना पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

ठगी की रकम और पहचान छिपाने का जरिया बन रहे बैंक खाते व मोबाइल कनेक्शन
किरन यादव ने बताया कि यही खाते साइबर ठगी के बाद रकम की कड़ी जोड़ने में पुलिस के लिए अहम सुराग भी बनते हैं। सिर्फ बैंक खाते ही नहीं, साइबर ठगों के मोबाइल कनेक्शन भी पुलिस के रडार पर हैं। एनसीआरपी पोर्टल पर एक जनवरी से 21 जून 2026 तक 2222 संदिग्ध मोबाइल नंबर अपलोड किए गए। इनमें 1710 नंबर ब्लाक कराए जा चुके हैं। दक्षिणी जोन में सबसे अधिक 722 संदिग्ध नंबर सामने आए। इसी अवधि में 678 संदिग्ध आइएमईआइ नंबर भी चिह्नित हुए, जिनमें 599 ब्लाक किए जा चुके हैं।

ऐसे फंसाते हैं जाल में
ठग मोबाइल पर बैंक खाता बंद होने, केवाइसी अपडेट, बिजली बिल बकाया, पार्सल में अवैध सामान, डिजिटल अरेस्ट, निवेश में मोटा मुनाफा या नौकरी दिलाने जैसे बहाने बनाकर संपर्क करते हैं। बातचीत के दौरान पीड़ित पर जल्द कार्रवाई का दबाव बनाया जाता है। इसके बाद लिंक भेजकर बैंकिंग जानकारी हासिल करने, एप डाउनलोड कराने या सीधे खाते में रकम ट्रांसफर कराने का दबाव बनाया जाता है।

फ्रीज खातों से रकम रोकने की कोशिश
3707 म्यूल खातों में से 3364 को फ्रीज कराया जाना पुलिस की कार्रवाई का बड़ा आंकड़ा है। इन खातों में काफी रकम भी बचाई गई है, जिससे पीड़ित की कमाई रूक सकी है। यह सिर्फ हो सका है कि पीड़ित ने ठगी की तुरंत शिकायत की है। ऐसे में ठगी की जानकारी मिलते ही तुरंत 1930 या स्थानीय साइबर क्राइम थाने में संपर्क कर शिकायत करें।

ऐसे बचें

  • अनजान व्यक्ति के कहने पर ओटीपी, पिन, सीवीवी या नेट बैंकिंग पासवर्ड साझा न करें।
  • किसी के बताए लिंक से बैंकिंग एप या रिमोट एक्सेस एप डाउनलोड न करें।
  • बैंक, पुलिस या कोई सरकारी एजेंसी फोन पर धमकाकर खाते में रकम ट्रांसफर करने को नहीं कहती।
  • कमीशन के लालच में किसी दूसरे व्यक्ति को अपना बैंक खाता इस्तेमाल न करने दें।
  • खाते में अनजान स्रोत से रकम आने पर उसे आगे ट्रांसफर करने के बजाय बैंक को सूचना दें।
  • संदिग्ध मोबाइल नंबर, लिंक या खाते की जानकारी सुरक्षित रखें और तत्काल पुलिस/साइबर शिकायत तंत्र को दें

ग्रामीणों और युवाओं को लालच दे फंसा रहे जालसाज
म्यूल और आम खाते साइबर ठगों तक पहुंचाने के लिए भी बड़ी संख्या में गिरोह तैयार हो रहे है। यह गिरोह ग्रामीण इलाके के लोगों को रूपयों का लालच देकर फंसाते हैं। उधर, कुछ लोग युवाओं को फंसाते हैं। उनके कमिशन देने का लालच देकर उनके खातों का इस्तेमाल करते हैं। यही नहीं बहुत तेजी से यह गिरोह काम कर रहे हैं।

 

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