AI के खिलाफ बढ़ा गुस्सा! OpenAI ऑफिस में प्रदर्शन के बाद 13 गिरफ्तार, जानें क्यों बढ़ रही नाराजगी

वॉशिंगटन
अमेरिका और यूरोप में AI के खिलाफ विरोध भी तेज होता जा रहा है. ताजा मामला अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी का है, जहां प्रदर्शनकारियों ने OpenAI के दफ्तर में घुसकर AI के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के खिलाफ प्रदर्शन किया. फ्यूचरिज्म की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में OpenAI  के वॉशिंगटन डीसी स्थित लॉबिंग ऑफिस में करीब दो घंटे तक प्रदर्शन हुआ और 13 छात्रों को गिरफ्तार किया गया। 

यह सिर्फ एक कंपनी के दफ्तर के बाहर हुआ नॉर्मल प्रोटेस्ट नहीं है. दरअसल अमेरिका और यूरोप में पिछले कुछ समय से AI को लेकर अलग-अलग मुद्दों पर लोगों का गुस्सा सामने आ रहा है. कहीं लोगों को अपनी नौकरी जाने का डर है, कहीं कलाकार अपने काम के इस्तेमाल को लेकर परेशान हैं, तो कहीं AI के लिए बनाए जा रहे बड़े डेटा सेंटर्स बिजली और पानी की भारी खपत को लेकर विरोध का कारण बन रहे हैं। 

मार्च 2026 में सैन फ्रांसिस्को में भी प्रोटेस्टर्स OpenAI के मुख्यालय से लेकर एलॉन मस्क के xAI तक मार्च कर चुके हैं. रॉयटर्स के मुताबिक, प्रोटेस्टर्स AI के डेवेलपमेंट को रोकने की मांग कर रहे थे। 

OpenAI के दफ्तर में प्रदर्शन क्यों हुआ?
वॉशिंगटन डीसी में हुआ यह प्रदर्शन AI के तेजी से बढ़ते असर और उसके संभावित नुकसान को लेकर था. उनका कहना है कि एआई कंपनियां जिस रफ्तार से नई तकनीक बना रही हैं, उसके मुकाबले सरकारों की तरफ से नियम और सुरक्षा इंतजाम उतनी तेजी से नहीं बन रहे हैं. यही वजह है कि अमेरिका में एआई को लेकर विरोध करने वाले अलग-अलग समूह अब कंपनियों के दफ्तरों, सरकारी संस्थानों और डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। 

मार्च में सैन फ्रांसिस्को में OpenAI,  Anthropic और Google Deepmind से जुड़े ठिकानों पर भी प्रोटेस्ट हुआ था. जुलाई में सैन फ्रांसिस्को में स्टॉपएआई से जुड़े लोगों ने इन कंपनियों के खिलाफ मार्च किया और एआई की रफ्तार पर सवाल उठाए। 

सबसे बड़ा डर नौकरी जाने का है
AI के खिलाफ गुस्से की सबसे बड़ी वजह नौकरी है. ब्रिटेन में किंग्स कॉलेज लंदन की 2026 की एक स्टडी में सामने आया कि करीब 10 में से 7 लोग AI की वजह से होने वाले नौकरी के नुकसान के आर्थिक असर को लेकर चिंतित हैं. 57 फीसदी लोगों को लगता है कि AI बड़े पैमाने पर बेरोजगारी ला सकता है. वहीं करीब 22 फीसदी लोगों का मानना है कि AI की वजह से इतनी तेजी से नौकरियां खत्म हो सकती हैं कि इससे सामाजिक अशांति पैदा हो सकती है। 

युवाओं और नई नौकरी शुरू करने वालों को लेकर डर और ज्यादा है. स्टडी में करीब 10 में से 6 लोगों ने माना कि एआई की वजह से शुरुआती स्तर की सफेदपोश नौकरियों पर बड़ा असर पड़ सकता है.  यही डर अब सिर्फ कर्मचारियों तक नहीं है. यूरोप में सरकारें भी इस बात पर चर्चा कर रही हैं कि AI के दौर में लोगों की नौकरियां कैसे बचाई जाएं और कर्मचारियों को नई स्किल कैसे दी जाए। 

कलाकारों को डर, उनका काम लेकर AI बना रहा कंटेंट
AI के खिलाफ दूसरा बड़ा मोर्चा कलाकारों और क्रिएटर्स का है. AI मॉडल को ट्रेन करने के लिए बड़ी मात्रा में डेटा की जरूरत होती है. इसमें इंटरनेट पर मौजूद किताबें, तस्वीरें, संगीत, लेख और दूसरे तरह का कंटेंट शामिल हो सकता है. कलाकारों और लेखकों का सवाल है कि अगर उनकी मेहनत से तैयार किए गए काम का इस्तेमाल एआई मॉडल को ट्रेन करने में हो रहा है, तो इसके लिए उनकी इजाजत और उन्हें पैसे क्यों नहीं मिल रहे?

यूरोप में यह मुद्दा इतना बड़ा हो चुका है कि यूरोपीय संसद ने एआई और कॉपीराइट को लेकर नए नियमों की जरूरत पर जोर दिया है. संसद की रिपोर्ट में कहा गया है कि एआई ट्रेनिंग में कॉपीराइट वाले काम के इस्तेमाल को लेकर मौजूदा नियम काफी नहीं हैं. इसमें एआई कंपनियों से ज्यादा पारदर्शिता और क्रिएटर्स के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा की मांग की गई है। 

लेखकों ने खाली पन्नों वाली किताबें छाप कर किया विरोध
मार्च में करीब 10 हजार लेखकों ने ब्रिटेन में एआई के खिलाफ एक अनोखा विरोध भी किया था. उन्होंने ऐसी किताब प्रकाशित की जिसमें लेखकों के नाम तो थे, लेकिन बाकी पन्ने खाली थे. इसका मकसद यह दिखाना था कि अगर एआई कंपनियों को इंसानों के लिखे काम का इस्तेमाल बिना इजाजत करने दिया गया, तो भविष्य में असली लेखकों और उनके काम की जगह क्या बचेगी। 

संगीत की दुनिया में भी ऐसा विरोध देखने को मिला है. एक हजार से ज्यादा कलाकारों ने AI के खिलाफ एक ऐसा म्यूजिक एल्बम जारी किया था जिसमें रिकॉर्डिंग की जगह खाली स्टूडियो की आवाजें थीं. यह विरोध एआई मॉडल की ट्रेनिंग में कलाकारों के काम के इस्तेमाल को लेकर था। 

अमेरिका में अब AI डेटा सेंटर भी विरोध की वजह बन रहे हैं
AI के खिलाफ अमेरिका में एक नया मोर्चा डेटा सेंटर को लेकर खुला है. AI मॉडल चलाने के लिए बहुत बड़ी कंप्यूटिंग ताकत चाहिए. इसके लिए विशाल डेटा सेंटर बनाए जा रहे हैं. इन सेंटरों को चलाने के लिए बहुत ज्यादा बिजली और पानी की जरूरत होती है. यही बात स्थानीय लोगों को परेशान कर रही है. कहीं लोग डेटा सेंटर के शोर से परेशान हैं तो कहीं इसके साइड इफेक्ट्स से। 

अमेरिका के कई इलाकों में लोगों का कहना है कि उनके शहर और गांव AI कंपनियों के डेटा सेंटर के लिए बिजली, पानी, जमीन और दूसरी सुविधाओं का बोझ क्यों उठाएं. उन्हें यह भी डर है कि बड़े डेटा सेंटर से पर्यावरण पर असर पड़ेगा, बिजली की कीमत बढ़ सकती है और स्थानीय लोगों को जितनी नौकरियां मिलने की उम्मीद दिखाई जा रही है, असल में उतनी नौकरियां लंबे समय तक नहीं मिलेंगी। 

हाल के महीनों में अमेरिका में डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स के खिलाफ विरोध काफी बढ़ा है. फ्लोरिडा में AI डेटा सेंटर के विरोध में अलग-अलग विचारधारा वाले लोग भी एक साथ आए हैं. वहां लोगों की चिंता पानी, पर्यावरण, बिजली और स्थानीय समुदाय की भूमिका को लेकर है। 

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