यूपी चुनाव में ‘आधी आबादी’ बनेगी गेमचेंजर! योगी-अखिलेश के बीच महिलाओं को साधने की होड़

लखनऊ
उत्तर प्रदेश की राजनीति का इतिहास उठाकर देखें तो चुनावी गुणा-गणित हमेशा जातियों के इर्द-गिर्द घूमता रहा है- यादव, गैर-यादव ओबीसी, दलित, ब्राह्मण और मुस्लिम। लेकिन 2027 के विधानसभा रण की बिसात बिछने से पहले ही एक नया और सबसे असरदार वोट बैंक उभरकर सामने आ रहा है, जो जाति और धर्म के बंधनों को तोड़ रहा है। यह साइलेंट वोट बैंक है प्रदेश की महिलाएं।

चुनावी रणनीतिकार चाहे जातियों की लामबंदी में लगे हों, लेकिन इस बार करीब 6.09 करोड़ महिला मतदाता (कुल मतदाताओं का लगभग 45.46%) सत्ता की चाबी अपने हाथ में थामे खड़ी हैं। यही वजह है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सपा प्रमुख अखिलेश यादव, दोनों ही 'आधी आबादी' को रिझाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे।

जब महिलाओं ने बदला यूपी का सियासी ट्रेंड
    2007 के यूपी चुनाव तक महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत पुरुषों से काफी कम (लगभग 42%) रहता था। लेकिन 2012 के बाद से तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है।
    2012 चुनाव में महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत उछलकर 60.3% पहुंचा, जो पुरुषों (58.7%) से ज्यादा था।

    2017 और 2022 दोनों ही चुनावों में महिलाओं ने पुरुषों के मुकाबले औसतन 3 से 4 फीसदी ज्यादा मतदान किया।
    2024 लोकसभा चुनाव में भी 57.22% महिला मतदाताओं ने वोट डाला, जबकि पुरुषों का आंकड़ा 56.46% ही रहा।

मध्य प्रदेश में 'लाडली बहना' और महाराष्ट्र में 'लाडकी बहिन' जैसी योजनाओं के दम पर जिस तरह भाजपा ने बंपर जीत दर्ज की, उसने हर राजनीतिक दल को यह समझा दिया है कि महिलाओं का साथ ही जीत की गारंटी है।

फ्री कैश ट्रांसफर को लेकर बयानों की जंग
चुनाव नजदीक आते ही महिलाओं के खाते में सीधे पैसे भेजने की होड़ मच गई है। जब मीडिया रिपोर्ट्स में यह चर्चा चली कि योगी सरकार महिलाओं को 50,000 रुपए की आर्थिक सहायता देने की योजना पर विचार कर रही है, तो अखिलेश यादव ने तुरंत दांव चल दिया।

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर ऐलान किया कि अगर उनकी सरकार बनी तो वे महिलाओं को सालाना 40,000 रुपए देंगे और हर साल इसमें बढ़ोतरी करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने भाजपा पर तंज कसते हुए इसे अपने "पापों की कमाई" बांटना करार दिया।

दूसरी ओर, भाजपा उपाध्यक्ष नीरज सिंह ने अखिलेश के दावों को छलावा बताते हुए कहा कि भाजपा जो भी योजना लाती है, उसका लाभ पारदर्शिता के साथ सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते तक पहुंचता है।

योजनाओं की झड़ी और जमीनी रणनीति
अखिलेश यादव के बड़े-बड़े वादों के बीच योगी सरकार भी जमीनी स्तर पर महिलाओं को साधने में लगातार जुटी है।

    आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को स्मार्टफोन और ग्रोथ डिवाइस बांटे गए, साथ ही हजारों नई नियुक्तियां की गईं।
    महिला सेल्फ हेल्प ग्रुप (SHG) के जरिए ई-रिक्शा चालकों की ट्रेनिंग कराई जा रही है, ताकि महिलाओं के लिए सुरक्षित परिवहन और रोजगार दोनों सुनिश्चित हों।
    स्कूलों और गन्ना सहकारी समितियों में महिलाओं को कैंटीन (प्रेरणा कैंटीन) खोलने के लिए मुफ्त जगह देने जैसी पहल जारी है।

दूसरी तरफ, 2022 में 'लड़की हूं, लड़ सकती हूं' का नारा देकर 40% टिकट महिलाओं को देने वाली कांग्रेस भी 2027 में नए सिरे से महिला वोटरों के बीच अपनी पैठ बनाने की तैयारी कर रही है।

क्या एकमुश्त वोट करेंगी महिलाएं?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या महिला वोटरों को एक सिंगल 'वोट बैंक' माना जा सकता है? जमीनी हकीकत यह है कि किसी जाटव, मुस्लिम या गैर-यादव ओबीसी महिला की प्राथमिकताएं एक-दूसरे से अलग हो सकती हैं। महंगाई, कानून-व्यवस्था, सुरक्षा, रोजगार और स्थानीय प्रत्याशी जैसे मुद्दे भी अपना असर दिखाएंगे।

लेकिन एक बात तय है- 2027 का यूपी चुनाव सिर्फ जातिगत समीकरणों से नहीं, बल्कि महिला वोटरों के भरोसे ही जीता जाएगा।

More From Author

प्रदेश में 20 अगस्त से चल रहा है फार्मर आईडी बनाने का अभियान

मध्य प्रदेश के किसानों को आसानी से मिलेगी खाद, शिकायत के लिए जारी हुआ WhatsApp और हेल्पलाइन नंबर

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

RO No. 13967/1

RO No. 13944/210

city24x7.news founded in 2021 is India’s leading Hindi News Portal with the aim of reaching millions of Indians in India and significantly worldwide Indian Diaspora who are eager to stay in touch with India based news and stories in Hindi because of the varied contents presented in an eye pleasing design format.