नेपाल संकट में भारत-चीन की ओर बढ़ा, मदद की अपील पर दिल्ली ने तुरंत बढ़ाया हाथ

नई दिल्ली
   नेपाल में आई भीषण बाढ़ में प्रभावित इलाकों में अंतर्राष्ट्रीय खोज और बचाव टीमों की मदद न लेने के अपने फैसले को नेपाल सरकार ने बदला है. यह फैसला उन देशों के राजनयिक दबाव के बाद लिया गया जिनके नागरिक इस आपदा में लापता है। 

भारत की टेक्निकल टीम मदद के लिए काठमांडू पहुंच गई हैं. भारतीय वायु सेना भी नेपाल में राहत-बचाव अभियान में जुटी है. भारत ने दवाइयों और खाने-पीने की चीजें समेत 10 टन जरूरी राहत सामग्री नेपाल भेजी है. प्रभावित लोगों की मदद के लिए भारतीय वायु सेना का सी-130 विमान 10 टन जरूरी राहत सामग्री लेकर नेपाल पहुंचा है। 

नेपाल सरकार ने बुधवार 26 जून को कहा था कि उसके बचाव कर्मी खोज अभियान संभालने में सक्षम हैं और विदेशी बचाव टीमों को अनुमति नहीं दी जाएगी. हालांकि अब नेपाल सरकार ने अपना रुख बदलते हुए DNA टेस्ट, फॉरेंसिक जांच और बचाव कार्य जैसे क्षेत्रों में सीमित अंतर्राष्ट्रीय मदद लेने का फैसला लिया है। 

'द काठमांडू पोस्ट' के मुताबिक एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से सरकार पर विदेशी सर्च एंड रेस्क्यू टीमों और विशेषज्ञों की मदद लेने का काफी दबाव था. बाढ़ में कई विदेशी नागरिक लापता हुए हैं. हम कुछ खास क्षेत्रों में सीमित संख्या में एक्सपर्ट्स को आने की इजाज़त दे रहे हैं। 

इन देशों से जाएगी मदद
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन केंद्र के आकलन के आधार पर नेपाल की बालेन शाह सरकार ने अंतर-मंत्रालयी समन्वय समिति के माध्यम से भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया को सुरंग से बचाव, डीएनए और फोरेंसिक जांच में अनुभवी विशेषज्ञों और तकनीशियनों की टीमों को काठमांडू भेजने की मंजूरी दे दी है।

कई देशों ने नेपाल को राहत सहायता की घोषणा करते हुए विशेषज्ञ टीमें भेजने की इच्छा जताई थी। बालेन सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया। काठमांडू में कम से कम दो देशों के दूतावासों के अधिकारियों ने कहा कि वे अपनी टीमों को मदद की अनुमति देने का अनुरोध कर रहे थे लेकिन उन्हे सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली।

हमारे देश के लोगों का पता लगाने में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है और तीन दिन बीत चुके हैं। हम वास्तव में उनके बारे में चिंतित हैं। मदद के लिए हमारे अनुरोधों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है।

भारत ने की मदद की पेशकश
भारत समेत कई देशों ने नेपाल को खोज और बचाव कार्यों में मदद की सार्वजनिक रूप से पेशकश की है। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है कि भारत ने टनल रेस्क्यू टीम, मेडिकल टीम और अपनी नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स की टीमों को भेजने की पेशकश की है।

दक्षिण कोरिया ने भी सार्वजनिक रूप से अतिरिक्त मदद की पेशकश की है। गुरुवार को दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून ने नेपाली विदेश मंत्री खनाल से बात की। उन्होंने नेपाल में दक्षिण कोरियाई नागरिकों की सुरक्षा पर चिंता जताई। इनमें नौ लोग ऐसे हैं, जिनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है।

हमने मदद के लिए तीन क्षेत्रों की पहचान की है और उसी के अनुसार अंतरराष्ट्रीय सहायता मांग रहे हैं। चार देशों की विशेषज्ञ टीमों को रसुवा और नुवाकोट जिलों में हाइड्रोपावर सुरंगों के अंदर फंसे लोगों को बचाने की अनुमति दी जाएगी। बाढ़ से चौदह पनबिजली परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं- आठ रसुवा में और छह नुवाकोट में।

नेपाल में बाढ़ से तबाही
नेपाल के भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के किनारे बसे इलाकों में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। शुक्रवार तक 550 लोगों की मौत हो चुकी है और 977 अभी भी लापता हैं। लापता लोगों में 31 देशों के 517 विदेशी नागरिक शामिल हैं। इनमें सबसे ज्यादा 178 भारतीय नागरिक बाढ़ के बाद लापता हैं। अमेरिका, यूके और कई दूसरे देशों के नागरिक भी लापता हैं।

बता दें, चीन-नेपाल सीमा के पास अचानक आई बाढ़ में 77 ईशा तीर्थयात्रियों के अब भी लापता होने की खबर है. विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने रॉयटर्स से कहा, "नेपाल को उन तकनीकी क्षेत्रों में विदेशी मदद की जरूरत है, जहां उसके पास एक्सपर्टाइज की कमी है. लेकिन सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए विदेशी मदद की जरूरत नहीं है। 

नेपाल में आई भीषण बाढ़ में तबाही का आंकड़ा 600 के पार पहुंच गया है. अब तक 626 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 2,500 लोग लापता हैं. इस आपदा में बड़ी संख्या में भारतीय भी फंसे हुए हैं. करीब 320 भारतीयों समेत भारतीय मूल के 100 लोगों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है. राहत की बात है कि तिब्बत में मौजूद करीब 400 भारतीयों से संपर्क हो चुका है और वे सुरक्षित हैं। 

रसुवा की भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ के कारण लापता हुए लोगों में से नवलपरासी जिले में शुक्रवार शाम तक 158 शव बरामद किए गए. आज ही, 48 शव और बरामद किए गए हैं। 
पुलिस के मुताबिक, नवलपरासी पूर्व से होकर बहने वाली नारायणी नदी के अलग-अलग जगहों पर शुक्रवार शाम तक 158 शव मिले. DSP ने बताया कि नारायणी नदी के किनारे मिले शवों को विभिन्न अस्पतालों और वन कार्यालय के भवनों में सुरक्षित रखा गया है. उन्होंने बताया कि 9 शव अभी नदी किनारे ही हैं और उन्हें सुरक्षित स्थान पर लाने की तैयारी की जा रही है। 

More From Author

EV स्कूटर बाजार में Ather की बड़ी एंट्री! 29 अगस्त को लॉन्च होगा नया Konark, Chetak-iQube से मुकाबला

प्रदेश में जारी है फार्मर आईडी बनाने का अभियान: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

RO No. 13967/1

RO No. 13944/210

city24x7.news founded in 2021 is India’s leading Hindi News Portal with the aim of reaching millions of Indians in India and significantly worldwide Indian Diaspora who are eager to stay in touch with India based news and stories in Hindi because of the varied contents presented in an eye pleasing design format.