19.1 करोड़ की इंडिया-इजराइल परियोजना में तेजी, गंगावली में सोलर पंप, इंटेक पाइप व नेचुरल एसटीपी का काम पूरा

इंडिया-इजराइल परियोजना: बुंदेलखंड में जल संकट का समाधान निकाल रहा योगी सरकार का आधुनिक जल प्रबंधन मॉडल

19.1 करोड़ की इंडिया-इजराइल परियोजना में तेजी, गंगावली में सोलर पंप, इंटेक पाइप व नेचुरल एसटीपी का काम पूरा

जलाशय से खेत तक पहुंचेगा पानी, बूंद-बूंद के बेहतर इस्तेमाल का मॉडल तैयार, 31 दिसंबर तक निर्माण पूरा करने का लक्ष्य

8.5 हेक्टेयर में दिखेगी कम पानी में बेहतर खेती की तकनीक, गंगावली मॉडल का 24 गांवों तक विस्तार करने की तैयारी

72 प्रशिक्षण सत्रों से किसानों को मिलेंगे आधुनिक सिंचाई और खेती के गुर, हर सत्र में हिस्सा लेंगे 100 किसान

लखनऊ
 बुंदेलखंड में जल संकट और सीमित जल संसाधनों के बीच योगी सरकार जल संरक्षण, सिंचाई दक्षता और आधुनिक कृषि तकनीक को बढ़ावा देने के लिए इंडिया-इजराइल बुंदेलखंड वाटर प्रोजेक्ट को आगे बढ़ा रही है। झांसी के विकासखंड बड़ागांव स्थित ग्राम गंगावली में करीब 19.1 करोड़ रुपये की लागत से चल रहे मिनी पायलट प्रोजेक्ट में कई महत्वपूर्ण कार्य पूरे हो चुके हैं। जलाशय का अर्थवर्क और जियोमेम्ब्रेन लाइनिंग, सोलर पंप की स्थापना, नहर से जलाशय तक इंटेक पाइप और इंटेक वेल, पीयूएफ पैनल आधारित भवनों समेत कई प्रमुख काम पूरे किए जा चुके हैं। अब अगले चरण में माइक्रो इरिगेशन, ग्रीनहाउस, सिंचाई ऑटोमेशन और किसान प्रशिक्षण जैसे कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा।

जल संरक्षण से आधुनिक खेती तक एक ही मॉडल
नमामि गंगे और ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के विशेष सचिव एवं निदेशक, भूगर्भ जल विभाग डॉ राजेश कुमार प्रजापति ने कहा कि योगी सरकार की इस पहल का उद्देश्य बुंदेलखंड की स्थानीय जल उपलब्धता और कृषि परिस्थितियों के अनुसार ऐसा मॉडल तैयार करना है, जिसमें उपलब्ध पानी का अधिकतम और वैज्ञानिक तरीके से उपयोग किया जा सके। परियोजना में जल संरक्षण, जल भंडारण, सौर ऊर्जा, माइक्रो इरिगेशन, आधुनिक कृषि तकनीक और किसान प्रशिक्षण को एक साथ जोड़ा गया है। इसके तहत जलाशय, नहर से पानी लाने की व्यवस्था, पाइपलाइन, सोलर पंप, ड्रिप-स्प्रिंकलर, प्राकृतिक एसटीपी, कृषि मशीनरी और आधुनिक खेती की सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इसका मकसद किसानों को सीमित पानी में बेहतर सिंचाई और खेती का व्यावहारिक मॉडल उपलब्ध कराना है।

नेचुरल एसटीपी का भी निर्माण
गंगावली में परियोजना की प्रगति अब जमीन पर दिखाई देने लगी है। जलाशय क्षेत्र की डिमार्केशन और फेंसिंग का कार्य पूरा हो चुका है। जलाशय का अर्थवर्क और जियोमेम्ब्रेन लाइनिंग भी पूरी हो गई है। पीयूएफ पैनल आधारित भवनों का निर्माण पूरा होने के साथ वहां सीसीटीवी की व्यवस्था भी की जा चुकी है। इसके अलावा सोलर पंप स्थापित किया गया है। नहर से जलाशय तक इंटेक पाइप और जलाशय में इंटेक वेल का निर्माण भी पूरा हो चुका है। गांव से आने वाले अपशिष्ट जल को जलाशय में पहुंचने से रोकने और उसके उपचार के लिए नेचुरल एसटीपी का निर्माण किया गया है। जलाशय के आसपास सड़क का काम अभी प्रगति पर है।

8.5 हेक्टेयर में होगा आधुनिक खेती का प्रदर्शन
मिनी पायलट प्रोजेक्ट के तहत करीब 8.5 हेक्टेयर क्षेत्र में आधुनिक कृषि गतिविधियों का प्रदर्शन प्रस्तावित है। अगले चरण में ड्रिप और स्प्रिंकलर आधारित माइक्रो इरिगेशन सिस्टम को स्थापित और क्रियाशील किया जाएगा। इसके साथ ही ग्रीनहाउस, टनल, पाइपलाइन और सिंचाई ऑटोमेशन-एससीएडीए व्यवस्था को भी क्रियाशील किया जाएगा।

इससे किसानों को यह समझने का अवसर मिलेगा कि फसल की जरूरत के अनुसार कितनी मात्रा में पानी दिया जाए और कम पानी में बेहतर उत्पादन कैसे हासिल किया जा सकता है। परियोजना में पानी की खपत, सिंचाई दक्षता, फसल उत्पादन, लागत और जल उत्पादकता जैसे मानकों पर तकनीकों के परिणामों का मूल्यांकन भी किया जाएगा।

किसानों को खेत पर मिलेगा व्यावहारिक प्रशिक्षण
परियोजना में केवल आधारभूत ढांचा तैयार करने के बजाय कि
सानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने पर भी जोर दिया गया है। प्रस्तावित प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल 72 प्रैक्टिकल ट्रेनिंग सेशन आयोजित किए जाएंगे। प्रत्येक सत्र में करीब 100 किसानों की भागीदारी का प्रावधान है। प्रशिक्षण में किसानों को वाटर बजटिंग, फर्टिगेशन, क्रॉप प्लानिंग, सिंचाई संचालन और कृषि मशीनरी के इस्तेमाल की जानकारी दी जाएगी। इससे किसान उपलब्ध पानी के आधार पर फसल क्षेत्र तय करने और सिंचाई का बेहतर प्रबंधन करने में सक्षम होंगे।

24 गांवों तक पहुंचेगा गंगावली का मॉडल
डॉ. राजेश कुमार प्रजापति ने कहा कि गंगावली में तैयार हो रहे मिनी पायलट प्रोजेक्ट के अनुभवों को आगे बड़े क्षेत्र में लागू करने की भी तैयारी है। अगले चरण में बड़ागांव विकासखंड में पाहुज नहर के डाउनस्ट्रीम स्थित 24 अन्य गांवों में विस्तृत प्रदर्शनात्मक प्रोजेक्ट प्रस्तावित है। इससे गंगावली में सफल रहने वाली उपयोगी तकनीकों को दूसरे गांवों तक पहुंचाने का रास्ता तैयार होगा।

31 दिसंबर तक निर्माण पूरा करने का लक्ष्य
भूगर्भ जल विभाग के अधिशासी अभियांता व वैयक्तिक सहायक निदेशक अनुपम ने कहा कि परियोजना के वर्तमान निर्माण एवं क्रियान्वयन चरण को 31 दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके बाद ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस के साथ परियोजना को जून 2029 तक संचालित करने का प्रस्ताव है। वहीं विस्तारित डेमोंस्ट्रेशन और किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम अक्टूबर 2026 से मई 2029 तक प्रस्तावित है।

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