आइस हॉकी, फुटबॉल और फिगर स्केटिंग: इन खेलों ने रूस को बनाया दुनिया की बड़ी स्पोर्ट्स पावर

मॉस्को
रूस का नाम आते ही राजनीति, इतिहास और उसकी विशाल भौगोलिक सीमा के साथ खेलों की दुनिया भी याद आती है. रूस की खेल पहचान की बात हो तो आइस हॉकी का नाम सबसे पहले आता है. सोवियत दौर से चली आ रही हॉकी की मजबूत परंपरा ने रूस को दुनिया की बड़ी हॉकी शक्तियों में शामिल किया है. इसके साथ फुटबॉल, वॉलीबॉल, बास्केटबॉल और फिगर स्केटिंग भी देश की खेल संस्कृति का अहम हिस्सा हैं.

1. आइस हॉकी- रूस की खेल पहचान का बड़ा हिस्सा
रूस की खेल संस्कृति की बात हो और आइस हॉकी का जिक्र न हो, ऐसा संभव नहीं. ठंडे मौसम और बर्फीले क्षेत्रों वाले इस देश में हॉकी लंबे समय से बेहद लोकप्रिय रही है.

सोवियत संघ के दौर से ही रूस की हॉकी परंपरा दुनिया की सबसे मजबूत परंपराओं में गिनी जाती रही है. सोवियत टीम ने अंतरराष्ट्रीय हॉकी में लंबे समय तक दबदबा कायम रखा और उसके बाद रूस ने भी इस विरासत को आगे बढ़ाया.

देश की Kontinental Hockey League यानी KHL दुनिया की प्रमुख आइस हॉकी लीगों में शामिल है. रूस के कई शहरों में हॉकी क्लबों के पास मजबूत प्रशंसक आधार है.

राष्ट्रीय टीम के स्तर पर भी रूस ने ओलंपिक और विश्व चैम्पियनशिप सहित कई बड़े टूर्नामेंटों में शानदार प्रदर्शन किया है. यही वजह है कि आइस हॉकी रूस के लिए सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि उसकी खेल पहचान का अहम हिस्सा है.

2. फुटबॉल- रूस के सबसे लोकप्रिय खेलों में शामिल
रूस में फुटबॉल की लोकप्रियता काफी गहरी है. बच्चों और युवाओं से लेकर प्रोफेशनल स्तर तक इस खेल की मजबूत मौजूदगी है. स्कूलों और स्थानीय क्लबों से लेकर शीर्ष स्तर की लीग तक फुटबॉल का बड़ा नेटवर्क देखने को मिलता है.

हालांकि, फुटबॉल को रूस का निर्विवाद रूप से नंबर-1 खेल कहना सही नहीं होगा. अलग-अलग सर्वे में फुटबॉल और आइस हॉकी के बीच लोकप्रियता का अंतर बेहद कम या अलग-अलग रहा है. इसलिए रूस के सबसे लोकप्रिय खेलों की बात करें तो इन दोनों का नाम सबसे पहले लिया जाता है.

रूस की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम ने 1992 में सोवियत संघ के विघटन के बाद अलग पहचान के साथ अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में कदम रखा. रूस ने 1994, 2002, 2014 और 2018 में FIFA World Cup खेला.

2018 में रूस को मेजबान होने के कारण सीधे विश्व कप में जगह मिली थी. घरेलू मैदान पर टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय किया. यह विश्व कप में रूस का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है.

रूस से पहले सोवियत संघ ने सात विश्व कप टूर्नामेंटों में हिस्सा लिया था. उसका सबसे शानदार प्रदर्शन 1966 में आया, जब टीम चौथे स्थान पर रही थी.

3. वॉलीबॉल- स्कूलों से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक मजबूत पकड़
रूस में वॉलीबॉल की भी मजबूत परंपरा रही है. स्कूलों, खेल संस्थानों और क्लब स्तर पर इस खेल की अच्छी पहुंच है. पुरुष और महिला दोनों वर्गों में सोवियत संघ और बाद में रूस ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं.

इनडोर वॉलीबॉल के अलावा बीच वॉलीबॉल ने भी रूस में अपनी जगह बनाई है.
हालांकि, यूक्रेन पर 2022 में रूस के आक्रमण के बाद अंतरराष्ट्रीय वॉलीबॉल में रूस की स्थिति बदल गई. मार्च 2022 में FIVB ने रूस और बेलारूस की राष्ट्रीय टीमों, क्लबों, अधिकारियों और खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय और महाद्वीपीय प्रतियोगिताओं से बाहर कर दिया था.

2026 में FIVB ने रूसी खिलाड़ियों और टीमों की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में वापसी का रोडमैप तय किया. इसके तहत रूस की पुरुष और महिला राष्ट्रीय टीमें 2027 Volleyball Nations League में हिस्सा लेंगी. यानी लंबे अंतराल के बाद रूसी वॉलीबॉल की अंतरराष्ट्रीय वापसी का रास्ता साफ हुआ है.

4. बास्केटबॉल- रूस की मजबूत क्लब परंपरा
रूस में बास्केटबॉल की भी मजबूत परंपरा रही है. खास तौर पर CSKA Moscow जैसे क्लब ने देश को यूरोपीय बास्केटबॉल में बड़ी पहचान दिलाई है.

CSKA Moscow यूरोपीय क्लब बास्केटबॉल के सबसे सफल नामों में शामिल रहा है. रूसी क्लबों ने यूरोपीय प्रतियोगिताओं में लंबे समय तक प्रभाव छोड़ा है.

स्कूल और युवा स्तर पर भी बास्केटबॉल की अच्छी मौजूदगी है. शहरी इलाकों में यह खेल खास तौर पर युवाओं के बीच लोकप्रिय रहा है.

हालांकि, रूस की बास्केटबॉल की कहानी सिर्फ क्लब स्तर तक सीमित नहीं है. सोवियत संघ के दौर से ही इस खेल में रूस और उसके खिलाड़ियों की मजबूत अंतरराष्ट्रीय परंपरा रही है.

5. फिगर स्केटिंग- खेल से कहीं आगे सांस्कृतिक जुनून
अगर किसी एक खेल ने रूस की अंतरराष्ट्रीय खेल पहचान को सबसे ज्यादा चमक दी है तो फिगर स्केटिंग उसका बड़ा उदाहरण है.

रूस में फिगर स्केटिंग सिर्फ प्रतियोगिता नहीं, बल्कि एक तरह का सांस्कृतिक जुनून है. ओलंपिक और विश्व स्तर की प्रतियोगिताओं में रूसी स्केटर्स ने लंबे समय तक शानदार प्रदर्शन किया है.

रूस के सबसे बड़े फिगर स्केटिंग सितारों में एवगेनी प्लुशेंको का नाम सबसे ऊपर आता है. उन्होंने 10 बार रूसी राष्ट्रीय चैंपियनशिप जीती और अपने करियर में चार ओलंपिक पदक हासिल किए. इनमें दो गोल्ड और दो सिल्वर शामिल हैं.

उनकी उपलब्धियों ने उन्हें रूस के सबसे सफल फिगर स्केटर्स में शामिल कर दिया.

मेदवेदेवा-जागितोवा ने भी दिखाया रूस का दबदबा
रूसी फिगर स्केटिंग की अगली पीढ़ी ने भी दुनिया को अपनी ताकत दिखाई. एवगेनिया मेदवेदेवा ने अपने करियर में कई विश्व रिकॉर्ड बनाए.

2018 PyeongChang Winter Olympics में रूस की अलीना जागितोवा ने महिला सिंगल्स का गोल्ड मेडल जीता, जबकि मेदवेदेवा ने सिल्वर हासिल किया. दोनों ने उस दौर में महिला फिगर स्केटिंग के उच्चतम स्तर को नई ऊंचाई दी.

यही वजह है कि रूस को फिगर स्केटिंग की दुनिया की सबसे प्रभावशाली शक्तियों में गिना जाता है.

रूस में खेल सिर्फ मनोरंजन नहीं
रूस में खेल सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि देश की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय पहचान का भी अहम हिस्सा हैं. फुटबॉल और आइस हॉकी बड़े पैमाने पर लोगों को जोड़ते हैं, वॉलीबॉल और बास्केटबॉल की मजबूत क्लब और युवा परंपरा है, जबकि फिगर स्केटिंग ने रूस को ओलंपिक और विश्व मंच पर अलग पहचान दिलाई है.

सोवियत संघ के दौर से चली आ रही खेल संस्कृति ने रूस को कई ऐसे चैंपियन दिए हैं, जिन्होंने दुनिया में देश का नाम रोशन किया. यही कारण है कि रूस की खेल दुनिया को समझने के लिए सिर्फ उसके लोकप्रिय खेलों को देखना पर्याप्त नहीं. इसके पीछे छिपी लंबी खेल परंपरा और अंतरराष्ट्रीय सफलता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है.

 

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