राजस्थान में बढ़ रहा मधुमक्खी पालन, भरतपुर-टोंक में बनेंगे एक्सीलेंस सेंटर; निर्यात को मिलेगी रफ्तार

जयपुर
राजस्थान में शहद अब सिर्फ मिठास नहीं, रोजगार और निर्यात का जरिया भी बन रहा है। देश-दुनिया में बढ़ती मांग के बीच राजस्थान में मधुमक्खी पालन तेजी से विस्तार ले रहा है। इसी संभावना को देखते हुए सरकार भरतपुर और टोंक में 17.5 करोड़ रुपए की लागत से मधुमक्खी एक्सीलेंस सेंटर तैयार कर रही है। यहां युवाओं को प्रशिक्षण, कॉलोनी व बॉक्स निर्माण, शहद की एक्सपोर्ट क्वालिटी तैयार करने और गुणवत्ता जांच जैसी सुविधाएं एक ही छत के नीचे मिलेंगी। राजस्थान में 2.52 लाख से ज्यादा मधुमक्खी कॉलोनियां पंजीकृत हैं। देशभर में 16 हजार 788 पालक और संस्थाएं पंजीकृत हैं, जबकि कॉलोनियों की संख्या 24,92,101 है। ऐसे में मधुमक्खी पालन का दायरा अब छत्ते और शहद के उत्पादन से आगे बढ़ रहा है।

युवाओं को आवासीय प्रशिक्षण भी
दोनों एक्सीलेंस सेंटर में पालन से जुड़ी तकनीकी जानकारी के साथ कॉलोनी और बॉक्स तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इच्छुक युवाओं के लिए आवासीय प्रशिक्षण की सुविधा भी होगी। तैयार शहद की प्रोसेसिंग और गुणवत्ता जांच की व्यवस्था भी यहीं होगी, ताकि उत्पाद घरेलू के साथ विदेशी बाजार की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जा सके। अक्टूबर-नवंबर में कॉलोनी तैयार करने के अनुकूल मौसम को देखते हुए उद्यान विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। विभाग 5 हजार कॉलोनी बॉक्स के साथ किट भी वितरित करेगा।

बढ़ता बाजार, राजस्थान के लिए अवसर
देश में शहद उत्पादन 2014-15 के 80,530 मीट्रिक टन से बढ़कर 2025-26 में 1,51,690 मीट्रिक टन हो गया। इसी अवधि में निर्यात 29,600 मीट्रिक टन से बढ़कर 1,14,570.19 मीट्रिक टन पहुंच गया। भारत प्राकृतिक शहद के निर्यात में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक बन गया है। राजस्थान में शुरुआत भरतपुर, कोटा और श्रीगंगानगर तक सीमित थी, लेकिन अब 25 जिलों में मधुमक्खी पालन हो रहा है। सरसों में फूल आने के समय मधुमक्खियां छोड़ने से उत्पादन 25 प्रतिशत तक बढ़ता है।

एक नजर में राजस्थान
पंजीकृत मधुमक्खी पालक/संस्थाएं – 1197
पंजीकृत मधुमक्खी कॉलोनियां – 2,52,179
देश में हिस्सेदारी – करीब 10 फीसदी
स्वीकृत परियोजनाएं – 584

राज्य के टॉप जिले
जिला – कॉलोनियों की संख्या
भरतपुर – 1,22,600
अलवर – 35,740
हनुमानगढ़ – 25,547
गंगानगर – 11,577

जहां फूल, वहीं मधुमक्खियों का डेरा
मधुमक्खियां मौसम के साथ ठिकाना बदलती हैं। राजस्थान में पालक सालभर फूलों की उपलब्धता के अनुसार कॉलोनियां एक जगह से दूसरी जगह ले जाते हैं। नवंबर से जनवरी तक सरसों के खेत इनका प्रमुख ठिकाना रहते हैं। फरवरी-मार्च में धनिया और जंगली बबूल के फूलों के बीच पहुंचती हैं। अप्रेल-मई में रंजका और बरसीम के खेतों में इनका डेरा रहता है। 15 मई से जून तक फर्रुखाबाद और कन्रोज क्षेत्रों में मक्का-बाजरा के फूलों के बीच कॉलोनियां पहुंचती हैं। जुलाई से सितंबर तक भरतपुर-करौली के आसपास तिल और बाजरा के फूलों पर मधुमक्खियां मंडराती हैं। अक्टूबर में इनका कारवां ग्वालियर-शिवपुरी क्षेत्र में अजवाइन के खेतों तक पहुंच जाता है। कुछ पालक उत्तराखंड, पंजाब और जम्मू-कश्मीर तक कॉलोनियां लेकर जाते हैं। अभी भी राज्य की मधुमक्खियां भ्रमण पर हैं।

More From Author

सीधी में धर्म परिवर्तन का मामला, 3 लोगों पर FIR; प्रचार सामग्री बरामद

ट्रंप की अचानक वापसी से मचा हड़कंप, पश्चिम एशिया में अमेरिकी नागरिकों के लिए नया सुरक्षा अलर्ट

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

RO No. 13997/202

city24x7.news founded in 2021 is India’s leading Hindi News Portal with the aim of reaching millions of Indians in India and significantly worldwide Indian Diaspora who are eager to stay in touch with India based news and stories in Hindi because of the varied contents presented in an eye pleasing design format.