तकनीक, नवाचार और सतत प्रशिक्षण से सशक्त होंगे प्रदेश के इंजीनियर : मंत्री सिंह

भोपाल 

लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह ने रविवार को भोपाल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से आईआईटी मुम्बई में लोक निर्माण विभाग के 50 इंजीनियरों के लिए आयोजित ‘ट्रेनिंग से ट्रांसफॉर्मेशन’ वेबिनार का शुभारंभ किया। मंत्री  सिंह ने कहा कि विकसित भारत के संकल्प के साथ कदमताल करने के लिए नवाचार, आधुनिक तकनीक और सतत प्रशिक्षण को विभागीय कार्य-संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बनाना आवश्यक है।

मंत्री  सिंह ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में सहयोग के लिए आईआईटी बॉम्बे के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने प्रो. टॉम मैथ्यूज,  वेदागिरि और प्रो. धर्मवीर सिंह सहित संस्थान के विशेषज्ञों को धन्यवाद देते हुए कहा कि इस साझेदारी से मध्यप्रदेश के इंजीनियरों को नवीन तकनीकों, आधुनिक निर्माण पद्धतियों और उत्कृष्ट कार्य प्रणालियों को समझने एवं अपनाने का महत्वपूर्ण अवसर मिला है।

विकसित भारत के निर्माण में इंजीनियरों की महत्वपूर्ण भूमिका

मंत्री  सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में मध्यप्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस यात्रा में इंजीनियरों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनके बिना देश के विकास और नवनिर्माण की कल्पना नहीं की जा सकती। केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है। प्रशिक्षण ही ज्ञान को व्यावहारिक दक्षता, कार्य की गुणवत्ता और बेहतर परिणामों में परिवर्तित करता है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के इंजीनियर प्रतिभा और क्षमता से समृद्ध हैं। उन्हें विश्व में तेजी से बदलती तकनीकों के अनुरूप समय-समय पर प्रशिक्षण देकर प्रदेश के अधोसंरचना विकास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। निरंतर सीखने, जिज्ञासा बनाए रखने और शोधपरक सोच अपनाने से प्रत्येक कार्य को अधिक दक्षता एवं उत्कृष्टता के साथ पूरा किया जा सकता है।

 वर्ष 2026 के लिए विशेष प्रशिक्षण कैलेंडर तैयार

मंत्री  सिंह ने बताया कि विभाग द्वारा वर्ष 2026 का विशेष प्रशिक्षण कैलेंडर तैयार किया गया है। इसके साथ ही कैपेसिटी बिल्डिंग फ्रेमवर्क और ट्रेनिंग नीड असेसमेंट भी बनाया गया है। लोक निर्माण विभाग की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार मध्यप्रदेश का यह कैपेसिटी बिल्डिंग फ्रेमवर्क देश में अपनी तरह का पहला प्रयास है।

मंत्री  सिंह ने बताया कि विभाग ने आईआईटी बॉम्बे के साथ ही सीआरआरआई नई दिल्ली, आईएएचई और ईएससीआई हैदराबाद सहित देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ समझौते किए हैं। अलग-अलग प्रशिक्षण बैचों के माध्यम से लगभग 1,508 इंजीनियरों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। आईआईटी बॉम्बे में 100 इंजीनियरों को प्रशिक्षण देने का निर्धारित लक्ष्य भी वर्तमान बैच के प्रशिक्षण के साथ पूरा होने जा रहा है।

आधुनिक निर्माण तकनीकों में भी लिया जाएगा आईआईटी बॉम्बे का सहयोग

मंत्री  सिंह ने कहा कि आईआईटी बॉम्बे के साथ विभाग की साझेदारी केवल वर्तमान प्रशिक्षण कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहेगी। सड़क एवं पुलों के रखरखाव, कंक्रीट रोड एवं व्हाइट टॉपिंग, ब्रिज डिजाइन तथा भवन निर्माण में प्रीफैब्रिकेटेड और प्रीकास्ट तकनीक जैसे विषयों पर भी संस्थान का तकनीकी सहयोग लिया जाएगा।

मंत्री  सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि आईआईटी बॉम्बे से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले इंजीनियर अपने ज्ञान और अनुभव का उपयोग प्रदेश की परियोजनाओं में करेंगे। इससे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, टिकाऊपन और समयबद्धता में सुधार होगा तथा मध्यप्रदेश के अधोसंरचना विकास को नई गति मिलेगी।

अच्छा अभियंता संरचना, श्रेष्ठ अभियंता भविष्य का निर्माण करता है :  पोल

सलाहकार  प्रशांत पोल ने कहा कि प्रशिक्षण की वास्तविक सफलता तभी है, जब उसका प्रभाव निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, समयबद्धता और स्थायित्व में दिखाई दे। उन्होंने अभियंताओं को ‘लर्न, अप्लाई, शेयर एंड स्टैंडर्डाइज’ का सूत्र देते हुए प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान को कार्यक्षेत्र में लागू करने और सहकर्मियों के साथ साझा करने का आह्वान किया।

 पोल ने कहा कि सड़क केवल दो स्थानों को नहीं जोड़ती, बल्कि किसान को बाजार, विद्यार्थी को विद्यालय, रोगी को अस्पताल और उद्योग को उपभोक्ता से जोड़ती है। आज अभियंता टेक्नोलॉजी एवं प्रोजेक्ट मैनेजर, पर्यावरण नियोजक तथा सार्वजनिक संसाधनों के संरक्षक की भूमिका भी निभा रहे हैं।

उन्होंने बिल्डिंग इन्फॉर्मेशन मॉडलिंग, डिजिटल ट्विन और डेटा एनालिटिक्स जैसी तकनीकों के उपयोग पर बल देते हुए कहा कि अभियंता गुणवत्ता, समय, लागत, सुरक्षा और स्थायित्व को ध्यान में रखकर कार्य करें। अच्छा अभियंता संरचना बनाता है, जबकि श्रेष्ठ अभियंता भविष्य का निर्माण करता है।

प्रशिक्षण का अंतिम लक्ष्य जनकल्याण पर प्रभाव होना चाहिए : डॉ. तोमर

सलाहकार डॉ. विक्रांत सिंह तोमर ने कहा कि लोक निर्माण मंत्री  सिंह के मार्गदर्शन में तैयार कैपेसिटी बिल्डिंग फ्रेमवर्क ने कम समय में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। तेजी से बदलती तकनीक के दौर में प्रासंगिक बने रहने के लिए निरंतर प्रशिक्षण आवश्यक है। प्रशिक्षण केवल सीखने तक सीमित न रहे, बल्कि ‘फील, लर्न, एक्ट और इम्पैक्ट’ के क्रम में धरातल पर जनकल्याणकारी परिणाम प्रस्तुत करे।

डॉ. तोमर ने कहा कि कार्य की गुणवत्ता, दक्षता, सतत अध्ययन, पारदर्शिता, जवाबदेही और नवाचार से ही लोक निर्माण विभाग को वास्तविक अर्थों में ‘लोक कल्याण विभाग’ बनाया जा सकता है। अभियंताओं के निर्माण कार्य ही भविष्य में उनकी पहचान और योगदान की कहानी कहेंगे। उन्होंने सभी इंजीनियरों से प्रशिक्षण के ज्ञान को व्यवहार में उतारते हुए मध्यप्रदेश के लोक निर्माण विभाग को देश का सर्वश्रेष्ठ विभाग बनाने का आह्वान किया।

दीर्घकालीन तकनीकी एवं शोध साझेदारी होगी मजबूत

प्रो. टॉम मैथ्यूज ने कहा कि मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग की प्रशिक्षण के प्रति गंभीरता सराहनीय है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह कार्यक्रम आईआईटी मुम्बई और विभाग के बीच दीर्घकालीन तकनीकी एवं शोध साझेदारी को और मजबूत करेगा।

 वेदागिरि ने बताया कि पांच दिवसीय प्रशिक्षण में निर्माण गुणवत्ता नियंत्रण और रखरखाव की आधुनिक पद्धतियों पर व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और टिकाऊ अधोसंरचना के लिए डिजाइन से लेकर निर्माण एवं रखरखाव तक आधुनिक तकनीक और सतत निगरानी आवश्यक है।

 धर्मवीर सिंह ने कहा कि अधोसंरचना में निवेश के साथ अभियंताओं का कौशल विकास भी आवश्यक है। आईआईटी बॉम्बे और मध्यप्रदेश शासन की साझेदारी में आयोजित तीसरे प्रशिक्षण बैच का उद्देश्य कक्षा में प्राप्त ज्ञान को कार्यस्थल पर लागू कर ‘ट्रेनिंग से ट्रांसफॉर्मेशन’ की अवधारणा को साकार करना है।

 

More From Author

वन स्टॉप सेंटर की व्यवस्थाओं का राज्य महिला आयोग ने किया निरीक्षण

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

RO No. 13997/202

city24x7.news founded in 2021 is India’s leading Hindi News Portal with the aim of reaching millions of Indians in India and significantly worldwide Indian Diaspora who are eager to stay in touch with India based news and stories in Hindi because of the varied contents presented in an eye pleasing design format.