आरक्षण छोड़ने की मांग क्यों कर रहा तमिलनाडु का यह SC समुदाय? जानें देवेंद्रकुला वेल्लालर की पूरी कहानी

चेन्नई
तमिलनाडु में एक जाति है देवेंद्रकुला वेल्लालर (Devendra kula Vellalar- DVK), जो कि दलित समुदाय से संबंध रखती है। आज जहां देश में कई जातियां आरक्षण के लाभ के लिए खुद को पिछड़ा घोषित कराने की होड़ में हैं, वहीं अनुसूचित जाति (SC) की सूची में शामिल यह समुदाय SC सूची से बाहर होने की कोशिश कर रहा है। इनका साफ कहना है कि इन्होंने SC/ST कानून का इस्तेमाल नहीं करने का निर्णय किया है।

इडिया टुडे की एक संडे स्पेशल रिपोर्ट में कहा गया है कि आईआईटी बॉम्बे के एक छात्र साहिल वाकोडे की खुदकुशी के बाद प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला पर SC/ST अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया। तमिलनाडु के तेनकासी से भाजपा जिलाध्यक्ष और इसी समुदाय से आने वाले अनंतन अय्यासामी ने प्रोफेसर पर लगे आरोपों का कड़ा विरोध किया। उन्होंने एक्स पर लिखा कि डीवीके समुदाय ने स्वैच्छिक रूप से यह सिद्धांत अपनाया है कि वे किसी के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत केस दर्ज नहीं कराएंगे, क्योंकि उनका मानना है कि इस कानून के दुरुपयोग से सामाजिक कटुता और दुश्मनी बढ़ती है।

देवेंद्रकुला वेल्लालर (DKV) कौन हैं?
यह समुदाय तमिलनाडु की कुल अनुसूचित जाति आबादी का एक बड़ा हिस्सा है और राज्य की कुल आबादी में इनकी हिस्सेदारी 5% से 9% के बीच है। मुख्य रूप से यह समुदाय दक्षिणी तमिलनाडु और कावेरी डेल्टा क्षेत्रों जैसे कि मदुरै, रामनाथपुरम, तिरुनेलवेली, थूथुकुडी आदि में रहती है। देवेंद्रकुला का अर्थ भगवान इंद्र के वंशज से है और वेल्लालर का संबंध कृषि-खेती से है। यह मुख्य रूप से एक कृषक और गो-पालक समुदाय है।

मार्च 2021 में संसद द्वारा एक विधेयक पारित करके पल्लार सहित सात उप-जातियों को मिलाकर देवेंद्रकुला वेल्लालर नाम से एक पहचान दी गई थी। तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष और गृह मंत्री अमित शाह ने भी समुदाय के द्वारा खुद के सामाजिक उत्थान के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की थी।

SC सूची से बाहर होने की मांग क्यों?
इंडिया टुडे के मुताबिक, इस समुदाय के नेताओं का कहना है कि यह मांग आर्थिक संपन्नता के कारण नहीं, बल्कि सामाजिक प्रतिष्ठा और आत्मसम्मान के लिए है। उनका मानना है कि SC टैग से जुड़ा सामाजिक कलंक समुदाय के समग्र विकास, विशेषकर व्यवसाय और व्यापार में बाधा बनता है। आपको बता दें कि तमिलनाडु में पहले से ही 69% आरक्षण लागू है। इनका मानना है कि SC श्रेणी में होने से इन्हें कोई विशेष लाभ नहीं मिल रहा, उल्टा सामाजिक भेदभाव सहना पड़ता है।

समुदाय की मांग है कि उन्हें पहले SC से OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) श्रेणी में ट्रांसफर किया जाए। 10-15 साल OBC में रहने के बाद अंतिम लक्ष्य सामान्य यानी कि अनारक्षित कैटेगरी में शामिल होना है। |

समुदाय के भीतर मतभेद
इस समुदाय का एक बड़ा हिस्सा हिंदू परंपराओं से जुड़ा है। वे SC सूची से हटने और सामाजिक प्रतिष्ठा हासिल करने के पक्ष में हैं। DKV समुदाय के वे लोग जिन्होंने ईसाई धर्म अपना लिया है, वे इस मांग का विरोध करते हैं। वे आरक्षण मॉडल में विश्वास रखते हैं। आपको बता दें कि तमिलनाडु विधानसभा ने 2023 में एक प्रस्ताव पारित कर धर्म परिवर्तन करने वाले दलितों को भी SC आरक्षण देने की सिफारिश केंद्र सरकार से की थी

आपको बताते चलें कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह अपनी तरह का पहला और अनूठा मामला है। कोई समुदाय आरक्षण के लाभ और सख्त कानूनों का मोह त्यागकर सामाजिक गरिमा और आत्मसम्मान के लिए खुद को इस कैटेगरी से बाहर करने की मांग कर रहा है।

More From Author

ट्रेड शो में यूपी की महिला उद्यमियों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर सजाए अपने उत्पाद

सीएम डॉ. मोहन यादव की बड़ी सौगात, ‘भोपाल मास्टर प्लान-2047’ का ड्राफ्ट तैयार, जानें कैसी होगी आपकी प्रपोज्ड लेक सिटी?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

RO No. 13997/202

city24x7.news founded in 2021 is India’s leading Hindi News Portal with the aim of reaching millions of Indians in India and significantly worldwide Indian Diaspora who are eager to stay in touch with India based news and stories in Hindi because of the varied contents presented in an eye pleasing design format.