जोधपुर एयरबेस पर F-35 की एंट्री, क्या भारत के सामने खुला 5वीं पीढ़ी के फाइटर का विकल्प?

नई दिल्ली
 राजस्थान के जोधपुर एयरबेस पर इस समय दुनिया के सबसे चर्चित लड़ाकू विमानों में शामिल अमेरिकी F-35A Lightning II की मौजूदगी ने सबका ध्यान खींचा है। अमेरिका के छह F-35 लड़ाकू विमान भारत के बहुराष्ट्रीय वायुसेना अभ्यास ‘तरंग शक्ति 2026’ में हिस्सा लेने के लिए भारत पहुंचे हैं। यह पहली बार है जब F-35 भारत में किसी सैन्य अभ्यास का हिस्सा बन रहा है।

F-35 का भारत आना इसलिए भी अहम है क्योंकि यह महज एक सैन्य अभ्यास तक सीमित घटनाक्रम नहीं है। अमेरिका लंबे समय से भारत के साथ रक्षा संबंधों को और मजबूत करने की कोशिश कर रहा है और इसी कड़ी में वह दुनिया के अपने सबसे आधुनिक स्टेल्थ लड़ाकू विमानों में से एक F-35 को भारत के सामने एक विकल्प के तौर पर रख चुका है। हालांकि, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि भारत ने F-35 खरीदने का फैसला कर लिया है।

राजस्थान में उतरा अमेरिका का सबसे घातक फाइटर F-35
F-35 को लेकर अमेरिकी पहल नई नहीं है। फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को F-35 बेचने की बात कही थी। ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका भारत को F-35 स्टेल्थ लड़ाकू विमान उपलब्ध कराने का रास्ता तैयार करेगा। दोनों देशों ने उस समय रक्षा सहयोग बढ़ाने और अमेरिकी सैन्य उपकरणों की बिक्री बढ़ाने पर भी जोर दिया था।

यानी अमेरिका का संदेश साफ था- अगर भारत अपनी वायुसेना के लिए पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान की तलाश कर रहा है तो उसके सामने F-35 का विकल्प मौजूद है। हालांकि भारत की ओर से उस समय भी साफ कहा गया था कि F-35 खरीदने को लेकर कोई औपचारिक प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है।

अब जोधपुर में F-35 की मौजूदगी क्यों महत्वपूर्ण है?
‘तरंग शक्ति 2026’ में F-35 की भागीदारी अमेरिका को भारत के सामने अपने विमान की क्षमताओं को वास्तविक ऑपरेशनल माहौल में दिखाने का मौका देगी। छह F-35A और 200 से ज्यादा अमेरिकी एयरमेन इस अभ्यास में शामिल हैं। अभ्यास जोधपुर में 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक चल रहा है।

यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि F-35 सिर्फ कोई सामान्य लड़ाकू विमान नहीं है। यह पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर है, जिसे कम रडार सिग्नेचर, सेंसर फ्यूजन और नेटवर्क-केंद्रित युद्ध क्षमता के लिए जाना जाता है। ऐसे विमान की मौजूदगी भारतीय वायुसेना के पायलटों और तकनीकी स्टाफ को उसकी क्षमताओं को करीब से समझने का अवसर भी देगी।

दूसरे शब्दों में कहें तो अमेरिका अपने सबसे एडवांस फाइटर जेट को भारत में लाकर सिर्फ अभ्यास में हिस्सा नहीं ले रहा, बल्कि भारतीय सैन्य प्रतिष्ठान को यह दिखाने का मौका भी दे रहा है कि F-35 किस तरह काम करता है।

भारत के सामने अब F-35 बनाम Su-57 का विकल्प?
भारत की पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान की जरूरत को देखते हुए अमेरिका का F-35 और रूस का Sukhoi Su-57 दोनों चर्चा में हैं। फरवरी 2025 में Aero India में दोनों विमान एक ही जगह नजर आए थे। इसके बाद से भारत के लिए दोनों विकल्पों को लेकर चर्चा और तेज हुई।

रूस की ओर से भी Su-57 को लेकर भारत को आकर्षित करने की कोशिश हुई है। रूस भारत को अपने Su-57 के साथ संभावित स्थानीय उत्पादन और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर जैसे विकल्पों के जरिए आकर्षित करना चाहता है। हालांकि, भारत और रूस के बीच भी इस विमान की खरीद को लेकर कोई औपचारिक खरीद प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। फिलहाल भारत की प्राथमिकता अपने स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की रही है।

भारत ने अभी किसी को हरी झंडी नहीं दी
सबसे अहम सवाल यही है कि क्या भारत F-35 खरीदने जा रहा है? फिलहाल जवाब है- नहीं, ऐसी कोई औपचारिक खरीद प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। भारत सरकार ने पहले ही स्पष्ट किया था कि अमेरिका के साथ F-35 खरीदने को लेकर कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने भी कहा था कि भारत अमेरिका के F-35 या रूस के Su-57 जैसे पांचवीं पीढ़ी के विमानों की खरीद को लेकर औपचारिक बातचीत नहीं कर रहा है। इसका मतलब यह हुआ कि अभी F-35 और Su-57 दोनों ही संभावित विकल्प और प्रस्ताव की श्रेणी में हैं, न कि भारत के तय किए हुए फाइटर जेट।

फिर अमेरिका इतना जोर क्यों दे रहा है?
इसके पीछे सिर्फ विमान बेचने की बात नहीं है। भारत दुनिया के बड़े रक्षा बाजारों में शामिल है और आने वाले वर्षों में भारतीय वायुसेना को अपने लड़ाकू विमानों की संख्या और क्षमता दोनों बढ़ाने की जरूरत है। भारतीय वायुसेना लंबे समय से स्वीकृत 42 स्क्वाड्रन की तुलना में कम लड़ाकू स्क्वाड्रनों के साथ काम कर रही है। ऐसे में भारत के भविष्य के फाइटर प्रोग्राम पर अमेरिका, रूस और यूरोप की रक्षा कंपनियों की नजर है।

लेकिन भारत के लिए फैसला इतना आसान नहीं
F-35 बेहद एडवांस विमान है, लेकिन भारत के लिए किसी पांचवीं पीढ़ी के विदेशी लड़ाकू विमान को खरीदना सिर्फ उसकी तकनीकी क्षमता देखने का मामला नहीं होगा। कीमत, लॉजिस्टिक्स, हथियारों और स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता, तकनीकी नियंत्रण, भविष्य के अपग्रेड और भारत की ‘मेक इन इंडिया’ प्राथमिकताओं जैसे कई सवाल भी महत्वपूर्ण होंगे।

भारत की अपनी रणनीति भी अब सिर्फ विदेशी विमान खरीदने तक सीमित नहीं है। देश स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) को विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में किसी विदेशी स्टेल्थ फाइटर को खरीदने का फैसला AMCA की समयसीमा और भारतीय वायुसेना की तत्काल जरूरतों के बीच संतुलन देखकर ही किया जाएगा।

F-35 के लिए राजस्थान में उतरना कितना बड़ा संकेत?
यही वजह है कि जोधपुर में F-35 की मौजूदगी को सिर्फ एक अभ्यास की तस्वीर के तौर पर देखना अधूरा होगा। भारत ने अमेरिका के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमानों में से एक को अपने सैन्य अभ्यास में शामिल होने का मौका दिया है। दूसरी ओर अमेरिका को भी भारतीय वायुसेना के साथ अपने विमान को ऑपरेशनल वातावरण में उड़ाने और उसकी क्षमताओं को प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है।

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