भोपाल में 2.89 लाख पेड़ों पर मंडराया संकट! 791 किमी सड़क नेटवर्क के प्रस्ताव से विशेषज्ञ चिंतित

 भोपाल
भोपाल के ड्राफ्ट मास्टर प्लान 2047 में प्रस्तावित 791 किमी सड़क नेटवर्क से लगभग 2.89 लाख पेड़ों पर खतरा मंडरा रहा है। पर्यावरणविदों और विशेषज्ञों ने ओवरलैपिंग मार्किंग व हरियाली के नुकसान को लेकर चिंता जताई है।

सड़क का नेटवर्क, विशेषज्ञों ने जताई चिंता
 भोपाल के ड्राफ्ट मास्टर प्लान 2047 में प्रस्तावित 791 किमी सड़क नेटवर्क से लगभग 2.89 लाख पेड़ों पर खतरा मंडरा रहा है। पर्यावरणविदों और विशेषज्ञों ने ओवरलैपिंग मार्किंग व हरियाली के नुकसान को लेकर चिंता जताई है।में भोपाल के ड्राफ्ट मास्टर प्लान 2047 में प्रस्तावित 791 किलोमीटर लंबे सड़क नेटवर्क को लेकर पर्यावरणविदों और शहर के विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। योजना के तहत 18 से 75 मीटर तक चौड़ी सड़कों के निर्माण और चौड़ीकरण से 2.89 लाख पेड़ों पर खतरा मंडराने लगा है। हाल ही में एनएचएआइ की 16.44 किमी लंबी सड़क के लिए लगभग 6,000 पेड़ काटे गए थे। इस आधार पर देखें तो पूरे 791.42 किमी नेटवर्क के निर्माण से सांकेतिक रूप से करीब 2.89 लाख पेड़ों पर कुल्हाड़ी चल सकती है। 1,450 रुपए प्रति पेड़ की मुआवजा दर के अनुसार इसका सांकेतिक मूल्य लगभग 42 करोड़ रुपए बनता है। इससे पहले भी बायपास और विभिन्न सड़क परियोजनाओं के नाम पर राजधानी में हजारों पेड़ों की बलि दी जा चुकी है।

डॉ. कृष्ण कुमार धोटे ने प्रस्तावित सड़कों की मार्किंग में विसंगति की ओर ध्यान आकर्षित किया है। उनका कहना है कि कई मार्ग, जो पहले से 10 मीटर या 15 मीटर की चौड़ाई में प्रस्तावित थे, वहां अतिरिक्त मार्किंग दिखाई दे रही है। इन्हें मिलाकर देखने पर गलियारा 24 मीटर से भी अधिक चौड़ा हो जाता है। इस प्रकार की ओवरलैपिंग से व्यावसायिक गतिविधियों को वैधता मिल सकती है। 

गौरव वैद्य के अनुसार वास्तविक पर्यावरणीय प्रभाव सड़कों का अंतिम रेखांकन, संबंधित मार्गों पर मौजूद वर्तमान वनस्पति की स्थिति, भू-अधिग्रहण की वास्तविक आवश्यकताएं और सड़कों के वास्तविक चौड़ीकरण का विस्तार जैसी बातों पर निर्भर करेगा।30 मीटर चौड़ी सड़कें- 48पर्यावरणविद डॉ. सुभाष सी. पांडेय और राशिद नूर का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में वृक्षों की कटाई से शहर का पर्यावरण संतुलन बिगड़ेगा।

धोटे और शहरी नियोजन विशेषज्ञ ने सड़कों की ओवरलैपिंग मार्किंग पर नीतिगत सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तविक पर्यावरणीय प्रभाव अंतिम रेखांकन और मौके पर मौजूद हरियाली की स्थिति पर निर्भर करेगा, लेकिन फिलहाल यह प्रस्ताव भोपाल की हरियाली के लिए बड़ा खतरा नजर आ रहा है।संभावित सांकेतिक वृक्ष कटाई: लगभग 2.89 लाख पेड़भोपाल में काटे जाएंगे 2.89 लाख पेड़। 

ओवरलैपिंग मार्किंग पर उठे सवाल
मैनिट भोपाल के डिपार्टमेंट ऑफ आकिटेक्चर एंड प्लानिंग के एचओडी प्रो. डॉ. कृष्ण कुमार धोटे ने प्रस्तावित सड़कों की मार्किंग में विसंगति की ओर ध्यान आकर्षित किया है। उनका कहना है कि कई मार्ग, जो पहले से 10 मीटर या 15 मीटर की चौड़ाई में प्रस्तावित थे, वहां अतिरिक्त मार्किंग दिखाई दे रही है। इन्हें मिलाकर देखने पर गलियारा 24 मीटर से भी अधिक चौड़ा हो जाता है। 

प्रस्तावित सड़क नेटवर्क का ढांचा
18 मीटर चौड़ी सड़कें- 111
24 मीटर चौड़ी सड़कें- 103
30 मीटर चौड़ी सड़कें- 48
45 मीटर चौड़ी सड़कें- 17
60 मीटर चौड़ी सड़कें- 15
ये नई सड़कें देंगी नया आकार

09 मीटर- 2 सड़कें
12 मीटर- 4 सड़कें
15 मीटर- 2 सड़कें
70 मीटर- 4 सड़कें
75 मीटर-6 सडकें

प्रोजेक्ट भोपाल की हरियाली के लिए खतरा
पर्यावरणविद डॉ. सुभाष सी. पांडेय और राशिद नूर का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में वृक्षों की कटाई से शहर का पर्यावरण संतुलन बिगड़ेगा। वहीं मैनिट के प्रो. डॉ. धोटे और शहरी नियोजन विशेषज्ञ ने सड़कों की ओवरलैपिंग मार्किंग पर नीतिगत सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तविक पर्यावरणीय प्रभाव अंतिम रेखांकन और मौके पर मौजूद हरियाली की स्थिति पर निर्भर करेगा, लेकिन फिलहाल यह प्रस्ताव भोपाल की हरियाली के लिए बड़ा खतरा नजर आ रहा है।

वित्तीय एवं पर्यावरणीय मानक
एनएचएआइ संदर्भ दरः 365 पेड़ प्रति किलोमीटर
संभावित सांकेतिक वृक्ष कटाई: लगभग 2.89 लाख पेड़
निर्धारित मुआवजा दरः 1,450 रुपए प्रति पेड़
अनुमानित कुल मुआवजा राशिः लगभग 42 करोड़ रुपए

 

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