इंदौर/ धार /उज्जैन
इंदौर जैसे जलसंकट की आहट मध्य प्रदेश के 11 जिलों में सुनाई देने लगी है। इन जिलों में सामान्य से 80% या उससे कम बारिश हुई है। नदियों में पानी कम है और डैम भी पूरी तरह नहीं भर सके हैं। ऐसे में गर्मी से पहले ही जलसंकट का खतरा बढ़ने लगा है।
इंदौर की 40 लाख आबादी को पानी देने वाले जलस्रोत भी खाली होने लगे हैं। भीषण जलसंकट की आशंका को देखते हुए नगर निगम ने सरकार से 50 करोड़ रुपए का पैकेज मांगा है।
धार में हालात ज्यादा चिंताजनक हैं। यहां अक्टूबर में ही ट्यूबवेलों से कम पानी आ रहा है। उज्जैन में सिर्फ 70 दिन का पानी बचा है। पानी की कमी से पेयजल व्यवस्था के साथ सिंहस्थ की तैयारियां भी प्रभावित हो सकती हैं। शहर में भूजल स्तर गिरकर 200 फीट तक पहुंच गया है।
वहीं, प्रभावित जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग उठ रही है, लेकिन अब तक जलसंकट से निपटने के लिए कोई ठोस योजना तैयार नहीं हुई है।
उज्जैन में नर्मदा से पानी लेने की कवायद
उज्जैन में इस बार औसतन 682 मिमी यानी करीब 27 इंच बारिश हुई, जबकि यहां सामान्य बारिश 35 इंच है। कम बारिश के कारण शहर को पानी सप्लाई करने वाला गंभीर डैम पूरी तरह नहीं भर पाया।
डैम की क्षमता 2,250 एमसीएफटी है, लेकिन इस बार इसमें पानी का स्तर केवल 636 एमसीएफटी तक पहुंचा। इसमें से 100 एमसीएफटी डेड स्टोरेज घटाने के बाद जलापूर्ति के लिए उपलब्ध पानी से सिर्फ 70 दिन, यानी 22 दिसंबर तक ही पानी सप्लाई किया जा सकेगा।
उज्जैन निगम के अपर आयुक्त पवन कुमार सिंह ने बताया कि इससे पहले, इस साल जून में भी गंभीर डैम में पानी की कमी के चलते रोजाना जलप्रदाय के लिए नर्मदा की पाइपलाइन से पानी लिया गया था।
इंदौर के 22 जोन में पानी की किल्लत
इंदौर में गर्मी शुरू होने से पहले ही जलसंकट चुनौती बनने लगा है। नगर निगम की सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक शहर में कुल 6,040 ट्यूबवेल हैं, जिनमें से 361 बंद हो चुके हैं। वहीं, शहर की जरूरत पूरी करने के लिए 200 नए ट्यूबवेल खोदने की आवश्यकता बताई गई है।
इनमें से 100 के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। शहर के 22 जोन में पानी की समस्या बनी हुई है। कई इलाकों में लोग अभी से टैंकर बुलवाकर पानी की व्यवस्था कर रहे हैं।
चिंता इसलिए भी बढ़ गई है, क्योंकि इस बार शहर में सामान्य से करीब 14 इंच कम बारिश हुई है। ऐसे में नए ट्यूबवेल की खुदाई के साथ भूजल की उपलब्धता भी चुनौती रहेगी। नगर निगम को बंद ट्यूबवेल चालू करने, नए जलस्रोत विकसित करने और मौजूदा संसाधनों से जलप्रदाय बनाए रखने की व्यवस्था करनी होगी।
361 ट्यूबवेल बंद, 200 नए खोदने की जरूरत
नगर निगम की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, शहर के 6,040 ट्यूबवेल में से 361 फिलहाल बंद हैं। इनमें ऐसे स्थान भी शामिल हैं, जहां नर्मदा जल का कनेक्शन नहीं है। ऐसे क्षेत्रों में स्थानीय जलस्रोत बंद होने से पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। निगम ने बंद ट्यूबवेल की मरम्मत, पंप सुधारने और तकनीकी समस्याओं के निराकरण के लिए 10 समर्पित टीमें लगाने की योजना बनाई है। दूसरी ओर, शहर की जरूरतों को देखते हुए 200 नए ट्यूबवेल खोदने की आवश्यकता बताई गई है। फिलहाल 100 के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए हैं।
भूजल स्तर कम, खुदाई से पहले सर्वे जरूरी
नए ट्यूबवेल खोदने की योजना के सामने भूजल की उपलब्धता बड़ी चुनौती है। कई इलाकों में भूजल स्तर नीचे होने के कारण बोरिंग से पर्याप्त पानी मिलना आसान नहीं है। ऐसे में खुदाई के लिए स्थान तय करते समय तकनीकी सर्वे और भूजल की स्थिति का आकलन जरूरी होगा। इसके साथ वर्षाजल संचयन, भूजल पुनर्भरण और मौजूदा जलस्रोतों के बेहतर इस्तेमाल पर भी ध्यान देना होगा।
105 में से 95 टंकियों से रोजाना जलप्रदाय
नगर निगम की रिपोर्ट के अनुसार, शहर में कुल 105 जलप्रदाय टंकियां हैं। इनमें से 95 से रोजाना पानी की सप्लाई की जा रही है। शेष 10 टंकियों से नियमित जलप्रदाय नहीं होने के कारणों का स्पष्ट ब्योरा सामने नहीं आया है। इन टंकियों से जुड़े क्षेत्रों में जलापूर्ति की स्थिति और वैकल्पिक व्यवस्था भी अहम होगी।
सामान्य से 14 इंच कम बारिश
शहर में सामान्य तौर पर करीब 37 इंच बारिश होती है, जबकि इस बार लगभग 23 इंच बारिश दर्ज की गई। यानी सामान्य बारिश के मुकाबले करीब 14 इंच कम पानी बरसा। कम बारिश का असर आने वाले महीनों में भूजल की उपलब्धता पर पड़ सकता है। ऐसे में गर्मी के दौरान बढ़ने वाली पानी की मांग को पूरा करना नगर निगम के लिए चुनौती होगा।
गेहूं का रकबा 75% तक घटेगा
भारतीय किसान संघ से जुड़े किसानों ने बताया कि इस बार गेहूं का रकबा 75% तक घटेगा। जिसके चलते खाद्यान की कमी तो होगी ही, साथ में महंगाई भी बढ़ेगी। इधर, मालवा में होने वाला लहसुन प्याज का रकबा भी 70 प्रतिशत तक कम होगा।
धार में 49.45% कम बारिश, खेती पर संकट
धार में इस बार सिर्फ 25.84 इंच बारिश हुई है, जो सामान्य से करीब 10 इंच कम है। 2025 में यहां औसतन 51.13 इंच बारिश हुई थी। कम बारिश का असर अब खेतों से लेकर बाजार तक दिखने की आशंका है। किसान लगातार जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग कर रहे हैं।
पर्याप्त बारिश होने पर किसान गेहूं, लहसुन, प्याज और मटर समेत कई फसलें उगाते हैं, लेकिन इस बार पानी की कमी को देखते हुए कई किसान चना, तिवड़ा, तुकमरी (तुकमारिया), रायड़ा और कम पानी में होने वाली दूसरी फसलों की बुवाई कर रहे हैं।
पानी की कमी के कारण कई बोरिंग अभी से बंद हो गए हैं, जबकि कुछ में रुक-रुककर पानी आ रहा है। इससे सिंचाई करने में परेशानी हो रही है और फसलों का उत्पादन घटने की आशंका है।
धार शहर की करीब डेढ़ लाख आबादी की पेयजल जरूरतें पूरी करने वाले दिलावरा, नटनागरा, नयापुरा और सीतापाट तालाबों में अब करीब 25 से 30% पानी ही बचा है। वहीं, मुंज तालाब भी लगभग 40% भरा हुआ है।
बोरिंग में पानी कम होने और तालाबों का जलस्तर घटने से आने वाले महीनों में पेयजल संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है। जरूरत पड़ने पर टैंकरों से पानी मंगाना भी लोगों के लिए महंगा साबित हो सकता है।
टैंकरों के लिए 71 नए हाइड्रेंट चिह्नित
टैंकरों के संचालन को आसान बनाने के लिए निगम ने 71 नए हाइड्रेंट स्थान चिह्नित किए हैं। इसके अलावा 12 मौजूदा समप-हाइड्रेंट स्थानों को आपातकालीन जल भराव केंद्र के रूप में उपयोग करने की योजना है। नए समप की संभावनाएं तलाशने, मौजूदा समप का इस्तेमाल करने और जरूरत के अनुसार ट्यूबवेल या पाइपलाइन को इन केंद्रों से जोड़ने का प्रस्ताव है। इससे टैंकरों में पानी भरने और प्रभावित क्षेत्रों तक आपूर्ति पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
जलसंकट से बचाव के लिए बना रहे योजना : बबलू शर्मा
एमआईसी सदस्य बबलू शर्मा ने बताया कि शहर में जलसंकट से बचाव के लिए योजना बनाई जा रही है। शहर में नए ट्यूबवेल खोदे जाएंगे। निगम की कोशिश है कि गर्मी के दौरान लोगों को पानी की परेशानी का सामना न करना पड़े।
इंदौर में सूखे से निपटने की तैयारी
प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में इस बार सामान्य से कम बारिश हुई है। यहां आमतौर पर करीब 37 इंच बारिश होती है, लेकिन इस बार सिर्फ 23 इंच पानी बरसा है।
इसे देखते हुए महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से जल प्रबंधन के लिए 50 करोड़ रुपए का पैकेज मांगा है। इस मुद्दे पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और तुलसी सिलावट भी बैठकें कर चुके हैं।
इंदौर के ज्यादातर तालाबों में पानी कम बचा है। छोला बिलावली और लिंबोदी तालाब में तो एक फीट पानी भी नहीं है। पिपलियापाला तालाब में 22 फीट की क्षमता के मुकाबले सिर्फ 7.6 फीट पानी बचा है।
यशवंत सागर, बड़ा बिलावली, बड़ा सिरपुर और छोटा सिरपुर तालाब में भी पानी की कमी है। इंदौर में रोजाना करीब 800 एमएलडी पानी की जरूरत होती है। ऐसे में कम बारिश और तालाबों में घटते जलस्तर के कारण शहर में 18 साल बाद गंभीर जलसंकट की आशंका बढ़ गई है।


